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गोरखपुर-बस्‍ती मंडल में गेम चेंजर बनेगा 'द मुनिया' फार्मूला, या फिर भाजपा की सुनामी ढाएगी विपक्षी पार्टियों पर कहर?

एग्जिट पोल में भले ही भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है. लेकिन, गोरखपुर-बस्‍ती मंडल में 'द मुनिया' का जादू चला, तो भाजपा के लिए ये मुश्किल का सबब हो सकता है.

गोरखपुरः साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और विपक्षी पार्टियों के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा है. एग्जिट पोल में भले ही भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है. लेकिन, गोरखपुर-बस्‍ती मंडल में 'द मुनिया' का जादू चला, तो भाजपा के लिए ये मुश्किल का सबब हो सकता है.

गोरखपुर-बस्‍ती मंडल में सपा-बसपा गठबंधन को 'द' यानी दलित के साथ 'मुनिया' यानी 'मु' से मुस्लिम 'नि' से निषाद और 'या' से यादव का वोट मिल गया, तो गठबंधन एक बार फिर उप चुनाव की तरह भाजपा के गुणा-गणित पर पानी फेर सकता है. 'द मुनिया' फार्मूला चुनावी गेम चेंजर की भूमिका में है. गोरखपुर, फूलपुर व कैराना संसदीय उपचुनाव में 'द मुनिया' फार्मूले ने ही बड़ा उलटफेर किया था.

यही वजह है कि दलित, मु‍स्लिम, निषाद और यादव बहुल गोरखपुर-बस्‍ती मंडल में इस फार्मूले को हल्‍के में नहीं लिया जा सकता है. 23 मई को 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद ये तस्‍वीर भी साफ हो जाएगी कि गेम चेंजर फार्मूला काम करेगा या एक बार फिर भाजपा की सुनामी साल 2017 और 14 की तरह चलेगी. चलिए गोरखपुर-बस्‍ती मंडल की नौ लोकसभा सीटों का आंकलन कर लेते हैं, जहां भाजपा की प्रतिष्‍ठा दांव पर लगी है.

निषाद वोटर गोरखपुर मंडल के छह संसदीय क्षेत्रों में निर्णायक की भूमिका में है. राजनीतिक दलों के आंकड़ों के मुताबिक मंडल में सर्वाधिक निषाद मतदाता गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में है. गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में निषादों की संख्या तीन से 3.50 लाख के बीच बताई जाती है. देवरिया में एक से सवा लाख, बांसगांव में डेढ़ से दो लाख, महराजगंज में सवा दो से ढाई लाख और पडरौना में भी ढाई से तीन लाख निषाद बिरादरी के मतदाता हैं. मंडल के 28 विधानसभा में भी 30 से 50 हजार के बीच निषाद मतदाता है.

गोरखपुर मंडल की गोरखपुर सदर लोकसभा सीट की बात करें, तो यहां मुसलमान करीब 2.02 लाख, निषाद तीन से 3.50 लाख, यादव 2.40 लाख, दलित 2.55 लाख वोटर हैं. पिछले उपचुनाव में 'द मुनिया' की बदौलत प्रवीण निषाद सपा के टिकट से जीते थे. अब वे भाजपा में हैं. यहां सपा ने रामभुआल निषाद पर दांव आजमाया. भाजपा ने अभिनेता रविकिशन पर भरोसा किया है. कांग्रेस के टिकट पर मधुसूदन त्रिपाठी चुनाव लड़े हैं. लेकिन, मुकाबला भाजपा और गठबंधन के बीच ही है. दो दिन बाद चुनाव परिणाम स्थिति साफ कर देंगे.

लेखा जोखा मतदाता- 19,54,018 पुरुष- 10,70,242 महिला- 883677, थर्ड जेंडर- 162

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण- 6 लाख, ओबीसी- 9 लाख, दलित- 2.54 लाख, मुस्लिम- 2 लाख

बांसगांव (सुरक्षित) सीट पर भी सपा-बसपा गठबंधन नया करने की जुगत में है. बसपा ने सदल प्रसाद पर भरोसा जताया है. उनके सामने दो बार के भाजपा सांसद कमलेश पासवान चुनाव मैदान में डटे रहे हैं. जनगणना 2011 के मुताबिक यहां अनुसूचित जाति की आबादी 28 फीसद, अनुसूचित जनजाति एक फीसद, मुस्लिम 6.39 फीसद है. यहां निषाद वोटर करीब डेढ़ से दो लाख के बीच हैं. यादव वोटर भी अच्छी तादाद में हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 47.6, बसपा को 26 और सपा को 15.2 फीसद वोट मिला था. सदल प्रसाद की दावेदारी को यहां पर कम नहीं आंका जा सकता है. क्‍योंकि मायावती के साथ अख्रिलेश ने भी उनके लिए रैलियां की है. 'द मुनिया' यहां गेम चेंजर बन सकता है.

लेखा जोखा मतदाता- 1734098, पुरुष - 947642, महिला - 786364, थर्ड जेंडर - 92

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 5 लाख, ओबीसी - 8.34 लाख, दलित - 2.50 लाख, मुस्लिम 1.50 लाख

महराजगंज लोकसभा क्षेत्र में मुसलमान वोटर करीब 4 लाख हैं. निषाद करीब सवा दो से ढाई लाख वोटर हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां अनुसूचित जाति की आबादी 18 फीसद, अनुसूचित जनजाति एक फीसद, मुस्लिम 17.1 फीसद हैं. यादव भी ठीकठाक संख्‍या में हैं. यहां से सपा-बसपा गठबंधन ने कुंवर अखिलेश सिंह पर विश्‍वास जताया है. बीजेपी ने पंकज चौधरी पर ही भरोसा किया. पिछले चुनाव में बीजेपी को यहां से 44.65 फीसद, बसपा को 21.88 फीसद वोट मिला था. सपा तीसरे नम्बर पर थी. कांग्रेस की वर्तमान प्रत्याशी सुप्रिया श्रीनेत के पिता हर्षवर्द्धन चौथे नम्बर पर आये थे. 'द मुनिया' यहां भी ठीक-ठाक जादू दिखा सकती है.

लेखा जोखा मतदाता - 1857606, पुरुष - 998822, महिला - 858541, थर्ड जेंडर - 243

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 6 लाख, ओबीसी - 8 लाख, दलित - 3 लाख, मुस्लिम 1.57 लाख

कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटर करीब 3.50 लाख हैं. निषाद बिरादरी के वोटर करीब ढ़ाई से तीन लाख है. जनगणना 2011 के मुताबिक यहां की आबादी में अनुसूचित जाति 15 फीसद, अनुसूचित जनजाति दो फीसद, मुस्लिम 17.4 फीसद हैं. यादव वोट भी अच्‍छी संख्‍या में हैं. यहां से सपा ने नथुनी कुशवाहा को टिकट दिया है. बीजेपी ने वर्तमान सांसद राजेश पांडेय का टिकट काट दिया और विजय दूबे ने यहां से चुनाव लड़ा है. कांग्रेस ने कुंवर आरपीएन सिंह को मैदान में उतारकर ताकत दिखाई. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 38.9, कांग्रेस 29.9, बसपा 14, सपा 11.7 फीसद वोट हासिल की थी. हार-जीत का अंतर 9 फीसद का रहा है. देखते है 'द मुनिया' यहां क्या कमाल दिखा पाती है.

लेखा जोखा मतदाता - 2495688, पुरुष - 1362541, महिला - 1132956, थर्ड जेंडर - 191

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 6 लाख, ओबीसी - 11.65 लाख, दलित - 3.80 लाख, मुस्लिम 4.50 लाख

देवरिया लोकसभा क्षेत्र में निषाद वोटर एक से सवा लाख के करीब हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की आबादी में अनुसूचित जाति 15 , अनुसूचित जनजाति 4, मुस्लिम 11.6 फीसद हैं. यादव वोटर भी जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं. बीजेपी से रमापति राम त्रिपाठी ने चुनाव लड़ा है. बसपा ने विनोद कुमार जायसवाल और कांग्रेस ने बसपा से निकाले गये नियाज अहमद को प्रत्याशी बनाया था. पिछले चुनाव में बसपा से लड़े नियाज अहमद को 27.3, सपा के बालेश्वर यादव को 15.5 व बीजेपी के कलराज मिश्र को 51.1 फीसद वोट मिला था. देखना दिलचस्प होगा यहां 'द मुनिया' क्या कमाल करती है.

लेखा जोखा मतदाता - 2188099, पुरुष - 1186801, महिला - 1001298, थर्ड जेंडर - 95

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 7 लाख, ओबीसी - 11.78 लाख, दलित - 1.30 लाख, मुस्लिम 1.80 लाख

सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में 2011 की जनगणना के मुताबिक आबादी में 13.5 फीसद मुसलमान, 16 फीसद अनुसूचित जाति और चार फीसद अनुसूचित जनजाति हैं. यादव और निषाद वोटर यहां ठीक-ठाक संख्या में हैं. यहां बीजेपी ने रविंद्र कुशवाहा, बसपा ने आरएस कुशवाहा और कांग्रेस ने राजेश मिश्रा को टिकट दिया था. यहां 'द मुनिया' अहम रोल अदा कर सकती है. पिछले चुनाव में बीजेपी को 45.89, बसपा को 21.18 फीसद वोट मिला था. सपा तीसरे नम्बर पर रही है.

लेखा जोखा मतदाता - 1970664, पुरुष - 1075480, महिला - 895113, थर्ड जेंडर - 00

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 7 लाख, ओबीसी - 8 लाख, दलित - 2.60 लाख, मुस्लिम 2.10 लाख

डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों की तादाद जीत-हार में अहम भूमिका निभाती है. यहां 6 लाख के करीब मुस्लिम वोटर हैं. करीब 30-40 हजार निषाद वोटर भी हैं. डुमरियागंज तहसील में मुस्लिम आबादी 43 फीसद के करीब है. दलित और यादव वोटर चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां बीजेपी ने जगदम्बिका पाल, बसपा ने आफताब आलम को टिकट दिया. कांग्रेस ने डा. चंद्रेश उपाध्याय को टिकट दिया है. पिछले चुनाव में बीजेपी को 32, बसपा को 20.9 वोट मिला था. सपा तीसरे, पीस पार्टी चौथे और कांग्रेस की वसुंधरा पांचवें नम्बर पर थीं. यहां 'द मुनिया' का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा.

लेखा जोखा मतदाता - 1865465, पुरुष - 1007793, महिला - 857449, थर्ड जेंडर - 174

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 5 लाख, ओबीसी - 6 लाख, दलित - 3 लाख, मुस्लिम 2.65 लाख

संतकबीरनगर लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटर 4 लाख के करीब हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक आबादी में 22 फीसद अनुसूचित जाति और 24 फीसद मुस्लिम हैं. बसपा ने भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी और गोरखपुर सदर सांसद प्रवीण निषाद को भाजपा ने मैदान में उतारा है. यहां निषाद और यादव वोटर, मुस्लिम और दलित वोटर के साथ जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं. कांग्रेस ने भालचंद यादव को उतारा है. 'द मुनिया' यहां सपा-बसपा गठबंधन की राह आसान कर रहा था. लेकिन, भालचंद यादव के मैदान में आने से टक्कर कांटे की हो गई है.

लेखा जोखा मतदाता - 1944454, पुरुष - 1057141, महिला - 887227, थर्ड जेंडर - 86

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 4.85 लाख, ओबीसी - 5.50 लाख, दलित - 4.48 लाख, मुस्लिम 4.61 लाख

बस्ती लोकसभा क्षेत्र में 2011 की जनगणना के हिसाब से आबादी में 21 फीसद, अनुसूचित जाति और 14.81 फीसद मुस्लिम हैं. निषाद और यादव वोटर यहां पूरा दखल रखते हैं. पिछले चुनाव में यहां जीत-हार का अंतर महज 3.2 फीसद था. बीजेपी के हरीश द्विवेदी को 34.1, सपा के राज किशोर को 30.9 वोट मिला था. बसपा के राम प्रसाद चौधरी ने 2,83,747 वोट हासिल कर सपा की राह में रोड़ा बनने का काम किया था. कांग्रेस चौथे नम्बर पर थी. अबकी बार बीजेपी ने फिर सिटिंग एमपी हरीश द्विवेदी, बसपा ने एक बार फिर राम प्रसाद चौधरी को मैदान में उतारा. सपा छोड़ने वाले राज किशोर पर कांग्रेस ने दांव खेला है. यहां 'द मुनिया' का जादू चल गया, तो भाजपा की राह में मुश्किल खड़ी हो सकती है.

लेखा जोखा मतदाता - 1831666, पुरुष - 990184, महिला - 841345, थर्ड जेंडर - 137

अनुमानित जातीय समीकरण सवर्ण - 5.98 लाख, ओबीसी - 6.20 लाख, दलित - 4.30 लाख, मुस्लिम 1.83 लाख

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