इलाहाबाद का नाम 'प्रयागराज निषाद' रखने की मांग पर सीएम योगी ने कसा तंज, कहा- जिन्हें इतिहास की जानकारी नहीं उनसे क्या उम्मीद करें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "जिसको न निज गौरव, निज देश पर अभिमान है" उसके बारे में देश के प्रख्यात कवि की भावनाएं मुझे लगता है, बहुत कुछ संदेश देती है. लगभग 500 वर्ष पूर्व प्रयागराज का नाम मुगलकाल खंड में बदलकर इलाहाबाद कर दिया गया था. प्रयाग वह पवित्र स्थल है, जहां पर ब्रह्माजी ने प्रथम यज्ञ किया था.

गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद की इलाहाबाद का नाम "प्रयागराज" के बजाय "प्रयागराज निषाद" रखने की मांग पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि जिन्हें अपनी संस्कृति, विरासत और इतिहास के बारे में जानकारी नहीं है, उनसे और उम्मीद भी क्या की जा सकती है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "जिसको न निज गौरव, निज देश पर अभिमान है" उसके बारे में देश के प्रख्यात कवि की भावनाएं मुझे लगता है, बहुत कुछ संदेश देती है. लगभग 500 वर्ष पूर्व प्रयागराज का नाम मुगलकाल खंड में बदलकर इलाहाबाद कर दिया गया था. प्रयाग वह पवित्र स्थल है, जहां पर ब्रह्माजी ने प्रथम यज्ञ किया था.
देश की सात पवित्र नदियों में तीन पवित्र नदियों गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होने के नाते ये प्रयागराज कहलाया. जिन्हें अपने इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानकारी नहीं है, वे लोग इस प्रकार का प्रश्न खड़ा करते हैं. मुझे लगता है उन लोगों से बहुत उम्मीद भी नहीं की जा सकती.
उत्तराखंड से लेकर प्रयागराज तक अनेक प्रयाग हैं. विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, करणप्रयाग, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग. हर एक प्रयाग में दो नदियों का पवित्र संगम होता है. उस नाम पर वह प्रयाग बनता है.
इन सभी प्रयागों का क्योंकि हिमालय से निकलने वाली दो अत्यंत पवित्र नदियों का स्मरण हर सनातन हिंदू धर्मावलंबी प्रतिदिन स्नान करते समय प्रातः काल अपने उच्चारण में स्मरण करता है, वे गंगा-यमुना हैं. यह दोनों पवित्र नदियां हिमालय से निकलती हैं. हिमालय से निकलने वाली इन पवित्र नदियों का संगम स्थल है प्रयागराज.
यानी सभी प्रयागों का राजा है प्रयागराज. भारत की सनातन आस्था का प्रतीक है प्रयागराज. इसलिए हमारी सरकार ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस स्थल का नाम प्रयाग राज किया है.
लोगों की बहुत अच्छी प्रतिक्रिया देखने और सुनने में मिली है. मुझे लगता है हर एक व्यक्ति को अपनी परंपरा, संस्कृति और अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए. उसी परंपरा में हम लोगों ने इस पवित्र स्थल का नाम प्रयाग राज किया है.





















