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कहानी मुलायम सिंह के तख्ता पलट की!

लखनऊ: समाजवादी पार्टी में मुलायम और शिवपाल को किनारे लगाने की स्क्रिप्ट रामगोपाल यादव ने लिखी और इसपर काम तब शुरू हुआ जब एक प्रेस कांफ्रेंस में रो पड़े थे. मुलायम सिंह को हटा कर अखिलेश खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं थे. नेताजी जब शिवपाल के साथ मिल कर टिकट बांटने में लगे थे, अखिलेश और रामगोपाल ने पार्टी पर कब्जे की पूरी तैयारी कर ली थी. अब टीम अखिलेश की तैयारी साइकिल चुनाव चिन्ह जब्त होने पर मोटर साइकिल पर सवार होने की है.

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कुछ ख़ास नेताओं के साथ रामगोपाल ने इटावा में की थी बैठक

ये आंसू भी किस्म किस्म के होते है. कभी गम के तो कभी खुशियों के. इटावा में हुई इस प्रेस कांफ्रेंस में राम गोपाल यादव के आंसू अभी सूखे भी नहीं थे. और समाजवादी पार्टी में तख्ता पलट की तैयारी शुरू हो गयी. बात इसी नवम्बर महीने की चौदह तारीख की है. टीम अखिलेश के कुछ ख़ास नेताओं के साथ रामगोपाल ने इटावा में अपने घर पर बैठक की. और फिर तय हुआ अगर शिवपाल यादव की मनमानी चलती रही और मुलायम ने उन्हें नहीं रोका तो फिर उन्हें ही किनारे कर दिया जाए.

इसके लिए समाजवादी पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मलेन बुलाने पर आम राय बन गयी. पार्टी के सभी विधायक, सांसद, एमएलसी, ज़िला पंचायत अध्यक्ष और कुछ सक्रिय कार्यकर्ता इसमें बुलाये जाते है. इन सबके दस्तखत लेने का अभियान शुरू हो गया.

अखिलेश ने भी जारी कर दी अपनी अलग से लिस्ट

अखिलेश के समर्थक नेताओं को दो से चार ज़िलों की जिम्मेदारी दे दी गयी. सब कुछ गुप चुप तरीके से होता रहा. शिवपाल यादव के खेमे को जब तक भनक मिलती. राष्ट्रीय सम्मलेन के करीब चालीस फीसदी सदस्यों के दस्तखत हो चुके थे. इस दौरान रामगोपाल यादव एक बार भी लखनऊ नहीं आये. लेकिन सब कुछ उनकी ही अगुवाई में होता रहा. फिर जब मुलायम सिंह ने टिकट बांटने शुरू किये तो अखिलेश ने भी अपनी अलग से लिस्ट जारी कर दी.

निराश मुलायम ने टाल दी अपनी मीटिंग

बात बढ़ता देख प्रोफ़ेसर साहेब ने लखनऊ में डेरा डाल दिया. मुलायम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रामगोपाल और अखिलेश को ही पार्टी से बाहर कर दिया. मुलायम ने समाजवादी पार्टी दफ्तर पर विधायकों और उम्मीदवारों की बैठक बुलाई तो अखिलेश ने भी उसी दिन घंटे भर पहले ही ऐसी ही एक अलग मीटिंग बुला ली. दो मंत्रियों को को छोड़ कर 207 विधायक अखिलेश के घर जा पहुंचे. मुलायम की मीटिंग के लिए सिर्फ 15 एमएलए ही पहुंचे. निराश मुलायम ने अपनी मीटिंग ही टाल दी.

कहानी मुलायम सिंह के तख्ता पलट की!

तुरंत रद्द हो गया अखिलेश और रामगोपाल का पार्टी से निष्कासन

विधायकों के बैठक में अखिलेश भावुक हो गए. बोले मैं नेताजी का और वे मेरे हैं. मैं यूपी जीत कर उन्हें तोहफे में दूंगा. आप सबका साथ चाहिए. लेकिन इसी बीच पिता-पुत्र में झगड़ा सुलझाने के लिए आज़म खान ने एंट्री ली. वे पहले मुलायम से मिले और फिर पहुंचे अखिलेश के घर. अखिलेश को बीच बैठक से लेकर आज़म खान नेताजी के घर पहुंच गए. शिवपाल यादव को भी बुला लिया गया. घंटे भर की बैठक के तुरंत बाद अखिलेश और रामगोपाल का पार्टी से निष्कासन रद्द हो गया.

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पिता को हटा कर अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हो रहे थे अखिलेश

खबर ये भी आई कि अब सम्मलेन नहीं होगा. लेकिन रामगोपाल यादव के मन में कुछ और ही चल रहा था. वे अड़ गए. नए साल के पहले दिन होने वाले सम्मलेन का एजेंडा भी उन्होंने ही बनवाया. एजेंडे के मुताबिक अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. शिवपाल को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया जाएगा और अमर सिंह समाजवादी पार्टी से आऊट होंगे. लेकिन अखिलेश अपने पिता को हटा कर अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हो रहे थे. वे किसी भी सूरत में मुलायम से मुकाबला करते हुए नहीं दिखना चाहते थे. वैसे भी एक बड़े अखबार में उनके औरंगजेब होने की खबर छप चुकी थी. वे इस आरोप के साथ आगे बढ़ने को तैयार नहीं थे.

किरणमय नंदा ने की अधिवेशन की अध्यक्षता

अध्यक्ष पद के लिए धर्मेंद्र यादव से लेकर नरेश उत्तम जैसे कई नामों पर चर्चा हुई. लेकिन बात नहीं बनी आखिरकार राम गोपाल के कहने पर अखिलेश यादव ये जिम्मेदारी लेने को तैयार हो गए. भारी मन से सम्मलेन के मंच वे अपने पिता मुलायम को हटा कर अध्यक्ष बन गए. लोगों से हाथ उठवा कर राम गोपाल ने उनके लिए समर्थन जुटाए. पार्टी के इकलौते उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने अध्यक्षता की.

एक दिन मिल जाएंगे अखिलेश और मुलायम

अब समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर मुलायम और अखिलेश गुट चुनाव आयोग के दरवाजे पर है. टीम अखिलेश की माने तो झगड़े में साएकिल निशान जब्त हो जाएगा. इसीलिए प्लान बी पर काम शुरू हो गया है. अखिलेश मोटर साइकिल पर सवारी को तैयार हैं. वे इसे बदलते हुए समाजवादी पार्टी का प्रतीक मानते हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर प्लान सी भी तैयार है. समाजवादी जनता पार्टी के कमल मोररका पिछले दिनों अखिलेश से लखनऊ आ कर मिल चुके हैं. वे बरगद चुनाव चिन्ह देने को तैयार हैं. लेकिन आप पूछेंगे प्लान बी और सी तो जान लिया लेकिन ये प्लान ए क्या है. अखिलेश खेमे के कुछ नेताओं को अब भी ये लगता है एक दिन पिता-पुत्र एक हो जाएंगे.

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