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सुशील मोदी ने खाली किया बंगला मगर तेजस्वी यादव अब भी ज़िद पर अड़े

बिहार के सीएम ने जहां पूर्व सीएम का बंगला लौटा दिया है तो वहीं डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने भी तत्काल ठिकाना बदल लिया है. अब सवाल है कि क्या तेजस्वी खाली करेंगे बंगला ?

पटना: बिहार के सीएम ने जहां पूर्व सीएम का बंगला लौटा दिया है तो वहीं डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने भी तत्काल ठिकाना बदल लिया है. अब सवाल है कि क्या तेजस्वी खाली करेंगे बंगला ? बता दें कि बुधवार को बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने एक पोलो रोड पर स्थित बंगला खाली कर दिया. ये बंगला सरकार ने विपक्ष के नेता के तौर पर आवंटित किया था पर वो डिप्टी सीएम होने के नाते जो बंगला आवंटित हुआ था उसमें शिफ्ट नहीं हो पाए. उन्हें तत्काल के लिए 25 A हार्डिंग रोड शिफ्ट करना पड़ा क्योंकि डिप्टी सीएम वाले बंगले को तेजस्वी यादव ने खाली नहीं किया है. आज सुशील मोदी अपने घर पर मीडिया को बुलाया और अपने सामान का लिस्ट भी जारी कर दिया. बाकायदा सभी सामानों का वीडियो रिकार्डिंग भी कराया. मोदी ने तेजस्वी को निशाने पर लिया.

सुशली मोदी ने कहा,''अंतिम सप्ताह में महागठबंधन की सरकार का खात्मा हुआ था और नई सरकार का गठन हुआ था. कोई भी नई सरकार बनती है तो पुराने सरकार के जो मंत्री हैं उनको अपना सरकारी आवास जो है समय सीमा के भीतर खाली कर देना चाहिए. आरजेडी के कुछ विधायक यानि जो पूर्व मंत्री थे वो कोर्ट में चले गए. 6 महीना बाद कोर्ट का आदेश आया और लगभग आधे दर्जन मंत्री जो थे जिनकी याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया. उस समय तेजस्वी यादव कोर्ट नहीं गए. यह एक सोची समझी राजनीति के तहत थी कि किसी तरह बंगले को अपने कब्जे में रखा जाए नहीं तो उस समय वो भी कोर्ट जा सकते थे. जब आधे दर्जन पूर्व मंत्रियों के मामले में हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया कि उन बंगलों पर आपलोगों को रहने का कोई अधिकार नहीं है. उसके बाद कुछ महीने बाद तेजस्वी कोर्ट गए. फिर जब सिंगल बेंच का फैसला आ गया तब भी उन्होंने बंगला खाली नहीं किया, लेकिन सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ वो डबल बेंच में चले गए. तो सिंगल बेंच का जो फैसला था उसके बाद डबल बेंच ने भी कोई स्टे नहीं दिया था लेकिन फिर भी सरकार ने सोचा कि इंतजार करना ठीक होगा.''

सुशील मोदी ने आगे कहा, ''डबल बेंच का हमलोगों ने इंतजार किया. अब डबल बेंच का भी फैसला आ गया है. लेकिन कहीं से भी उनकी मंशा मकान को खाली करने का दिखाई नहीं देती है. अखबार में पढ़ रहे हैं कि ये सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. फिर हो सकता है सुप्रीम कोर्ट के बाद यूनाइटेड नेशन्स भी जा सकते हैं. यानि येन केन प्रकारेण उस मकान में और उस मकान को कब्जे में रखा जाए यही उनकी मंशा है. उनकी पूरी पार्टी बेशर्मी के साथ उनके पीछे दिखाई पड़ती है. आश्चर्य तब होता है जब बंगले पर अवैध कब्जा के मामले में उनकी समर्थन में रामचन्द्र पूर्वे से लेकर तमाम नेता उनके पक्ष में हैं.''

सुशील मोदी ने कहा, ''हमको मालूम है कि हमलोगों ने जो लगातार खुलासे किए थे और कुल मिलाकर 52 सम्पत्ति के मालिक यानि 29 साल की उम्र में 52 सम्पत्ति के मालिक हैं. उनके पास 5 मकान है, एक दो मंजिला मकान गोपालगंज में है, पटना में एक मकान जो कांति सिंह को दिए थे. एक मकान जो प्रभुनाथ को मुफ्त में दिया दो मंजिला मकान है. चौथा जो टिस्को का गेस्ट हाउस और पांचवा दिल्ली में 4 मंजिला मकान है. जिस व्यक्ति के पास पटना में तीन-तीन मकान हो जिसके पास दिल्ली और पटना में करोड़ो मकान हो. 47 लाख से ज्यादा सम्पत्ति हो, जमीन हो, कुल मिलाकर 52 सम्पत्ति हो वो भी एक अदने मकान को लेकर डेढ़ साल से लड़ाई लड़ रहे हैं. गरीबों के मकान की लड़ाई लड़ते तो अलग बात होती. अपने मकान को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं.''

सुशील मोदी ने कहा कि मैंने यह तय किया था कि डबल बेंच का इंतजार करेंगे. डबल बेंच के फैसला आने के बाद हमलोगों ने मकान को खाली कर दिया है. तत्काल रूप से एक चार कमरे का छोटा फ्लैट आवंटित किया गया ताकि समान वगैरह रख सके जबतक कि वो बंगला खाली नहीं होता है. मुझे लगा कि मैं अगर बंगला खाली नहीं करूंगा तो कहेंगे कि मोदी जी तो बंगले में रह रहे तो हम जाएं कैसे. इसलिए मैंने आज औपचारिक रूप से इस पूरे मकान की जो चाभी है वो भवन निर्माण के अधिकारियों को सौंपने का निर्णय लिया है. अभी तक राजद की संस्कृति रही है कि जाओ तो पंखे से लेकर तार बेचने तक नोच नाच कर उठाकर ले जाओ. यहां पर ऐसी से लेकर पंखे तक टेबुल कुर्सी जितना सामान सरकार की तरफ से दिया था वो सारे समान को मैंने यथावत छोड़ दिया है. इसका वीडियो रिकॉर्डिंग भी मैंने करा दिया है. ताकि कल कोई आरोप नहीं लगा दे कि लेकर चले गए.

सुशील मोदी ने आगे कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि भगवान सद्बुद्धि दें उनको कि वे स्वयं मकान को खाली कर दें. नहीं तो भवन निर्माण को सरकार को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा. ऐसा लगता है ये लोग नाटक कर रहे हैं. सरकार जबरदस्ती खाली कराये ताकि हमलोगों को पता चले कि सरकार ज्यादती कर रही है. जैसे लालू यादव को कोर्ट ने सजा दिया और कोर्ट के सजा के कारण जेल में बंद हैं. पूरे बिहार में पर्चा बांटा जा रहा प्रचार किया जा रहा कि लालू यादव को बीजेपी, एनडीए वालों ने फंसा दिया. जबकि कौन किसको फंसा सकता. कोर्ट है चार्जशीट फाइल हुई है, ट्रायल हुआ है जिसके अंदर उनको सजा हुई है. अभी तो तेजस्वी यादव खुद भ्र्ष्टाचार के मामले में चार्जशीटेड हैं और बेल पर हैं.

सुशील मोदी ने कहा, ''मैं मीडिया के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष से आग्रह करूंगा कि इस मकान को प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाये. अगले 5-7 दिनों में मकान से शिफ्ट कर देना चाहिए था. मकान की कमी नहीं है और पिताजी का भी मकान है, माता जी का मकान है. माता जी का तो 40-42 फ्लैट है. जिनके पास इतनी सम्पत्ति हो वह व्यक्ति भी एक मकान को लेकर आखिर इस मकान में क्या खास है? ये तो कोर्ट ने भी कह दिया कि राज्यसरकार का अधिकार है कि हम आपको मंत्री परिषद के जो मंत्रियों को दिया जाने वाला मकान है वो हम दे रहे हैं. उनको कोई भी मकान दिया जा सकता है. लेकिन कोई कहे इनको यही मकान मुझे मिलना चाहिए, ये ना तो नैतिक अधिकार है न संवैधानिक अधिकार है. मैं अपेक्षा करूंगा कि उनके मकान में जितना भी फर्नीचर है, जितना भी सामान लगा हुआ है उस सामान को यथावत छोड़कर इस मकान में शिफ्ट करें. ऐसा नहीं कि सामान को कार्यकर्ताओं में बांट दे हम जानते हैं करोड़ो खर्च हुआ है इस मकान के फर्निशिंग में. खैर जो भी हुआ सरकार ने खर्च किया होगा. मैंने व्यक्तिगत तौर पर कहा है, इसमें कोई डेडलाइन की आवश्यकता नहीं है.

सुशील मोदी ने आगे कहा कि पिछली बार डीएम जब गए खाली कराने तब लोगों ने कहा हम कोर्ट में जाएंगे. सरकार चाहता तो खाली करा सकते थे लेकिन सोचा कि पद पर बैठा कोई व्यक्ति है तो उनको और 10 दिन मौका दिया जाए. क्या फर्क पड़ता है इसलिए उस दिन डीएम वापस लौट कर आ गए. वास्तव में कोई समय सीमा, नोटिस की जरूरत नहीं है. नोटिस दिया जा चुका है उनको. लेकिन फिर भी जो भी औपचारिकता होगी वो कहेंगे हमको और 10 दिन का समय दीजिये अब क्या कहते हैं. कल भी जो टिप्पणी की है पटना हाईकोर्ट ने तो उससे भी नेताओं को सबक लेना चाहिए.

उन्होंने कहा,''अगर कोर्ट कहेगा तो कानूनी रूप से प्रकिया होगी जो पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ा मामला है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंटरप्रेटेशन को लेकर अलग-अलग मत थे लेकिन अब जब यह कह दिया है तो निश्चित रूप से मैं इस पक्ष में हूं. मुझे याद है राबड़ी देवी का बयान आया था यूपी के संदर्भ में कि पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला नहीं मिलना चाहिए. तो सरकार तैयार है अब जो बिल है कि बिहार में एक बिल था विशेष सुरक्षा अधिनियम कर के कुछ था जिसके तहत वो बंगला था अब उसको विड्रॉ करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि वो सेक्शंस जो हैं वो नलिफाई हो जाएंगे और कानून के किताब में एक लाइन लिख दिया जायेगा. आज मुख्यमंत्री भी जो रह रहे हैं तो वो बंगला में काम चल रहा है तो तत्काल मरम्मती का काम पूरा नहीं हो जाता तबतक वो इस मकान में हैं. वैसे मुख्यमंत्री को 3 मकान भी रखने का अधिकार है, वे मुख्यमंत्री हैं.

सुशील मोदी ने कहा,''सवाल वर्तमान मुख्यमंत्री का नहीं है पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले का है. मैं इस पक्ष में हूँ कि पूर्व मुख्यमंत्री को उन बगलों को रद्द कर देना चाहिए. अगर कोर्ट कह रहा है तो सरकार इसको कर्टेल क्यों करेगी. लेकिन अब सरकार ने तो नोटिस कर दिया है तो खैर जवाब देंगे लेकिन राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि कोर्ट उस कानून के धारा को निरस्त्र कर देंगे जिसके तहत पूर्व मंत्री को मकान आवंटित किया गया है.'' उन्होंने आगे कहा,'' हमने तो शादी करते वक्त भी मुहूर्त नहीं निकलवाया बिना लगन के ही मैंने शादी किया। हमारी शादी तो चल गया 40 साल तो हो गया मेरी शादी को. मैं आजतक जितना चुनाव भी लड़ा हूं वो सब चुनाव जीते, एक भी चुनाव हारे नहीं. कभी मैंने मुहूर्त निकाल कर नॉमिनेशन फ़ाइल नहीं किया. इसलिए जो लोग इन सबों पर विश्वास करते हैं, कहेंगे कि खरमास है, खरमास में नहीं गृहप्रवेश करेंगे.

उन्होंने कहा,''पूर्वे जी जैसे लोग जो हमलोग से भी बढ़े हैं राजनीति में, शरीफ लोग और भले लोग जाने जाते हैं अब वो लोग भी धरणा पर बैठ जाते हैं. अरे आपको अधिकार क्या है अगर आप चले गए डबल बेंच तो मकान पर आपका अधिकार हो गया? स्टे तो नहीं दिया कोर्ट ने, आप जबरदस्ती चले गए जबकि 1% भी जाने की आवश्यकता नहीं थी. मामले को जैसे कानूनी लड़ाई लम्बा लड़ना है फिर चले जायेंगे सुप्रीम कोर्ट, नेताओं का बयान आया है. इसका तो कोई अंत नहीं न है, कोई आधार हो बेसिस हो तब आदमी जाता है.

सवर्ण आरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा,'' इसके पहले जिन लोगों ने सवर्ण आरक्षण देने का काम किया उन्होंने संविधान के प्रावधानों में कोई संशोधन नहीं किया. आज जो वर्तमान संवैधानिक प्रावधान है उसके तहत आप आर्थिक अधिकार के तहत आरक्षण नहीं दे सकते. संविधान के द्वारा 15 और 16 जो है उसमें केवल एससी/एसटी और शैक्षणिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है उसमें आर्थिक शब्द का उल्लेख नहीं है. नरेंद्र मोदी की सरकार ठोक ठाक कर काम करती है. उन्होंने बकायदा संविधान में संशोधन का काम किया है और एक नई धारा जोड़ने का काम किया है. इसमें आर्थिक आधार पर भी आरक्षण दिया जा सकता है.

सुशील मोदी ने आगे कहा,''जो 50% की बात आती है वो जो कास्ट बेस्ड रिजर्वेशन है वो उसपर लागू है. आर्थिक प्रावधान में इसके ऊपर है. तमिलनाडु में 69% से ऊपर है. एक दो और राज्यों में 50 % से ज्यादा है।. इंद्रा साहनी वाले केस में कोर्ट ने कहा था कि भारत जैसे डाईवर्जेंट इतनी विविधता वाले देश में अगर कोई विशेष परिस्थिति में 50 से ज्यादा करना है तो उसमें भी सरकार को अधिकार है. लेकिन अब ये तो नई व्यवस्था हो गई कि नई धारा जोड़ कर और उसका प्रावधान किया जायेगा. मामला तो कोई न कोई कोर्ट में जायगा ही. आरक्षण के सारे मामले कोर्ट में जाते हैं, लम्बी लड़ाई होती है। वो भी स्थिति आएगी तो सरकार तैयार है. लगभग सर्वसम्मति से लोकसभा में हुआ है. पता नहीं कौन तीन लोग थे जिन्होंने वॉक आउट किया. अगर राज्यसभा में पारित होता तो उसमें भी लगभग 90% लोग सम्मत होते. संसद ने लगभग सर्वसम्मति से पारित किया है और कोर्ट है जब स्क्रूटनी करेगा तो देखा जाएगा.''

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