बिहार: विधानसभा चुनाव से पहले आरजेडी के लिए खतरे की घंटी, NDA के सामने पूरी तरफ फेल हुए लालू के लाल तेजस्वी
राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन उससे पहले तेजस्वी यादव के नेतृत्व में इस लोकसभा चुनाव में आरजेडी का सूपड़ा साफ हो गया. आरजेडी तेजस्वी में बिहार का भावी सीएम देखती है लेकिन ये नतीजे आरजेडी के लिए खतरे की घंटी है.

नई दिल्ली: बिहार में लालू यादव की आरजेडी का सूपड़ा साफ हो गया. पिछले लोकसभा चुनाव में ‘मोदी लहर’ के बावजूद चार सीटें जीतने वाली आरडेडी इस बार के लहर के सामने टिक नहीं पाई. लालू यादव की गैरमौजूदगी में आरजेडी की कमान तेजस्वी यादव के हाथों में थी और वे पूरी तरह से फेल हो गए. ये चुनाव नतीजे साफ तौर पर बता रहे हैं कि तेजस्वी का अपरिपक्व नेतृत्व बिहार में एनडीए का सामना नहीं कर सका.
लोकसभा चुनाव में आरजेडी को झटका तो लगा ही, राज्य की डेहरी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी ये सीट आरजेडी के हाथ से निकल गई. इस सीट पर आरजेडी के उम्मीदवार फिरोज हुसैन को बीजेपी के कैंडिडेट सत्यनारायण सिंह ने हरा दिया. राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. आरजेडी तेजस्वी में बिहार का भावी सीएम देखती है लेकिन ये नतीजे आरजेडी के लिए खतरे की घंटी है. आरजेडी को इस लोकसभा चुनाव में 15.36% वोट मिले.
लालू यादव की गैरमौजूदगी का असर
बिहार की राजनीति में लालू यादव की अपनी एक अलग साख है. ठेठ देसी अंदाज में बातचीत करते हुए एक ही समय में अपने समर्थकों और विरोधियों दोनों को संदेश देने में लालू माहिर हैं यही कला उन्हें बाकी नेताओं से अलग पहचान दिलाती है. इस बार के लोकसभा चुनाव में उनका न होना आरजेडी के लिए बड़ी कमी बनकर सामने आई. विपक्ष के पास लालू जैसा कोई नेता नहीं था जो कि मोदी-नीतीश की जोड़ी को चुनौती दे सके. तेजस्वी चुनौती देने में पूरी तरह असफल रहे.
गठबंधन में तालमेल की कमी
इस बार बिहार में गठबंधन दलों के बीच तालमेल की कमी देखने को मिली. तीन चरण बीत जाने के बाद राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने एक साथ रैली की. आरजेडी और कांग्रेस के बीच अनबन की बात सामने आई हालांकि तेजस्वी यादव ने इसे खारिज किया. तीन चरण बीत जाने के बाद चौथे चरण के चुनाव प्रचार के दौरान 26 मई को समस्तीपुर में दोनों नेताओं ने बिहार में एक साथ पहली बार किसी चुनाव रैली को संबोधित किया.
सीटों के बंटवारे में चूक
राजनीतिक विशलेषक यह भी मानते हैं कि लालू यादव की अनुपस्थिति में सीटों के बंटवारे में भी गड़बड़ी देखने को मिली. इन गड़बड़ियों के कारण आरजेडी के कई कद्दावर नेता या तो बागी हो गए या कई नेता पार्टी छोड़कर निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया. बागी नेताओं ने न सिर्फ पार्टी छोड़ी बल्कि संबंधित क्षेत्र से महागठबंधन के उम्मीदवारों को नुकसान भी पहुंचाया.
तेजप्रताप और तेजस्वी के रिश्तों की ‘खटास’
इस चुनाव में दोनों भाइयों के बीच के रिश्तों में खटास देखने को मिली. तेजप्रताप ने अप्रत्यक्ष रूप से तेजस्वी पर निशाना भी साधा. इतना ही नहीं दोनों भाइयों ने आखिरी चरण के चुनाव से पहले जाककर एक साथ मंच साझा किया. इससे पहले तेजप्रताप ने इसको लेकर अपना दर्द भी जाहिर किया था कि वे तेजस्वी के साथ रैली करना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. पहली बार दोनों भाइयों ने 13 मई को मीसा भारती के लिए रैली की. इसके अलावा तेजप्रताप ने बागी रुख अपनाया और अपनी ही पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिया.
तेजप्रताप की बगावत
लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव इस चुनाव में अपनी ही पार्टी के खिलाफ रैली करते दिखे. बिहार की जहानाबाद, शिवहर और हाजीपुर सीट पर तेजप्रताप ने अपने उम्मीदवार उतार दिए. यहां तक कि तेजप्रताप ने अपने ससुर और सारण से आरजेडी के उम्मीदवार चंद्रिका राय के खिलाफ एक फेसबुक पोस्ट लिखा. उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लोगों से अपील की वे चंद्रिका राय को वोट न दें. तेजप्रताप यादव इस तरह से अपनी ही पार्टी के खिलाफ कदम उठाते गए और तेजस्वी इसे संभाल नहीं पाए.
Source: IOCL


























