ब्रेकिंग अप: भगवान के लिए अब रोना बंद करो
पायल से अपनी दोस्त की हालत देखी नहीं जा रही थी-लाल आंखें, आंसुओं से सने गाल और सुड़कती नाक. उसने एक आह भरी ‘गुंजन एक घंटे हो गए, भगवान के लिए अब रोना बंद करो. तभी बगल के कमरे में रहने वाली लड़की आ गई.

अकेली गुंजन को अपने अकेले रहने से खुशी ही होती थी, बस वेलेंटाइन्स डे को छोड़ कर. उस दिन जब उसकी दोस्त पार्टियां करतीं, वो अपने कमरे में आंसू बहाती और मन ही मन सवाल करती कि वो अकेली क्यों है? उसे क्या करना चाहिए? एक दिन उसके सवालों का जवाब मिला फेसबुक के मैसेज बॉक्स में.
ब्रेकिंग अप
प्राची गुप्ता

‘अरे यार गुंजन...अब बस करो’, पायल परेशान हो गयी थी. गुंजन ने उसकी बात पर ध्यान ही नहीं दिया और तकिए में मुंह छिपाकर और ज़ोर से रोने लगी. बीच-बीच में वह रुमाल से अपना नाक पोंछती और फिर रोना शुरू कर देती थी.
पायल से अपनी दोस्त की हालत देखी नहीं जा रही थी-लाल आंखें, आंसुओं से सने गाल और सुड़कती नाक. उसने एक आह भरी ‘गुंजन एक घंटे हो गए, भगवान के लिए अब रोना बंद करो. तभी बगल के कमरे में रहने वाली लड़की आ गई.
‘हाय, दोस्तों’, सिमरन एक खिली हुई मुस्कान के साथ हाज़िर थी. गुंजन ने एक पल के लिए सर उठाया और फिर से तकिए में मुंह छुपा लिया जो बेचारा पहले ही उसके आंसुओं से तरबतर हो चुका था.
‘क्या हुआ इसे? यह वैलेंटाइन पार्टी के लिए तैयार क्यों नहीं हो रही?’ सिमरन ने पूछा. ‘यह ‘वी’ शब्द सुनते ही गुंजन का रोना और तेज़ हो गया . ‘अरे, क्या दिक्कत है इसे’, सिमरन परेशान हो गयी थी.
‘तुम्हें क्या ज़रूरत थी यह कहने की’, पायल ने उसे आंखें दिखाई. ‘अरे, मैंने क्या कहा? क्या यह जा नहीं रही’, सिमरन अब एकदम असमंजस में थी. ‘मुझे कभी बॉय फ्रेंड नहीं मिलेगा,’ गुंजन की आवाज़ तकिए के नीचे से घुटी हुई आ रही थी. सिमरन और पायल ने एक दूसरे को परेशान नज़रों से देखा.
‘मैं अकेली ही मर जाऊंगी!’ गुंजन का रोना और तेज़ हो गया था. ‘इसके पास कोई ‘डेट’ नहीं’, पायल ने सिमरन को बताया.
‘ओह...बेचारी!”
लेकिन इससे पहले कि सिमरन कुछ और बोलती और गुंजन का रोना और बढ़ता, पायल ने उसकी बांह पकड़ी और उसे कमरे के बाहर खींच लिया.
घंटे भर बाद पायल और सिमरन तैयार होकर पार्टी के लिए चले गए और गुंजन ने भी रोना बंद कर दिया था. चार सालों से गुंजन अकेली ही थी, बिना किसी बॉय फ्रेंड के और हर साल वैलेंटाइन दे पर ख़ुद को कमरे में बंद कर लिया करती थी जबकि उसके सारे दोस्त अपने डेट के साथ पार्टी में जाते थे. ऐसी बात नहीं थी कि वह सुंदर नहीं थी. गठा हुआ शरीर, बड़ी-बड़ी गोल आंखें और प्यारी सी मुस्कान वाली गुंजन काफ़ी ख़ूबसूरत दिखती थी फिर भी अभी तक उसका कोई बॉय फ्रेंड नहीं था. इसकी वजह थी कि गुंजन लड़कों के मामले में बहुत नखरीली थी और जो लड़के उसे पसंद आए, उन्होंने कभी उससे दोस्ती की पहल ही नहीं की.
वह एक बहादुर लड़की थी इसलिए आख़िरकार उसने फैसला किया कि वह अब नहीं रोएगी. उसने अपना लैपटॉप उठाया और अपना फेसबुक अकाउंट खोला. जब वह सबकी पोस्ट देख रही थी, तभी उसके मन में अज़ीब सा ख़्याल आया. उसने फेसबुक मैसेज का ‘अदर’ फोल्डर खोला और उन्हें पढ़ने लगी. जबकि पहले कभी गुंजन ने उन्हें पढ़ने की ज़हमत नहीं उठाई थी. वहां दस संदेश थे और वे बहुत ही वाहियात तरीके से लिखे गए थे, जैसे कि हे बेब, मेरी दोस्त बनोगी. हेलो हॉटी आदि जिन्हें गुंजन ने बिना ज़्यादा सोचे डिलीट कर दिया लेकिन तभी एक संदेश ने उसका ध्यान आकर्षित किया, ‘तुम गुड़िया सी दिखती हो, प्यारी और मासूम. क्या मेरी वैलेंटाइन बनोगी’. उसने तुरंत भेजने वाले की प्रोफ़ाइल पिक्चर देखी. तस्वीर में दिख रहा लड़का बहुत ही स्मार्ट और गज़ब की मुस्कान रखता था. गुंजन की तरह वह भी एक डॉक्टर था, बिल्कुल वैसा ही जैसा गुंजन अपनी डेट के लिए चाहती थी. उसने तुरंत उस तीन साल पुराने मैसेज का रिप्लाई दिया, ‘हां, ज़रूर. मुझे अच्छा लगेगा’. अब वह थोड़ा बेहतर महसूस कर रही थी, उसने अपना लैपटॉप बंद किया और बिना आंखों में आंसू लिए एक मीठी नींद में डूब गयी.
अगले दिन जब गुंजन उठी तो उसने समय देखने के लिए अपना मोबाइल टटोला. सुबह के छह बजे थे. उसने बिस्तर से उठने की कोशिश की लेकिन उसका पैर बिस्तर की चादर से उलझ गया और वह गिरते-गिरते बची लेकिन उसका मोबाइल हाथ से फिसल कर सामने की दीवार से लगा और एक तेज़ आवाज़ हुई. इस आवाज़ से पायल की नींद खुल गयी और उसने अधखुली आंखों में ही बुदबुदाया, ‘गुंजन, सो जाओ. संडे को इतनी सुबह उठने के लिए ईश्वर तुम्हें कभी माफ़ नहीं करेगा’.
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(प्राची गुप्ता की कहानी का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)
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