महाबलीपुरम: सड़क पर भी दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक झांकी देखेंगे जिनपिंग
आयोजन की तैयारियों से जुड़े सूत्रों 11 अक्टूबर की शाम होने वाली कलाकारों की प्रस्तुतियों को पांच भागों में बांटा गया है. अलारिप्पू के साथ कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए, भगवान और गुरु को सम्मान देने के लिए मंगलाचरण, शांति सूत्र (कबीर दास भजन) प्रस्तुत किए जाएंगे.

महाबलीपुरम: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए चेन्नई के निकट प्राचीन बंदरगाह शहर मामल्लापुरम जाएंगे. इस दौरान वो करीब 50 किमी का सड़क सफर करेंगे और इस दौरान एक समृद्ध सांस्कृतिक झांकी उन्हें रास्ते में नज़र आएगी जिसमें करीब 35 स्थानों पर उनके स्वागत के लिए अभिनंदन दल खड़े होंगे.
पारंपरिक भरतनाट्यम, नागास्वरम, मयिलाट्टम, थापट्टम और काराकट्टम की लोक कला से लेकर नासिक ढोल तक और केरल के चन्दा मेलम जैसी प्रस्तुतियों के साथ सांस्कृतिक कलाकार दक्षिण भारत की नृत्य और लोक कलाओं का प्रदर्शन करेगा.
पेशेवरों कलाकारों के अलावा, संगीत और ललित कला महाविद्यालय के छात्रों भी शहर के विभिन्न सुविधाजनक स्थानों पर प्रदर्शन करेंगे. चेन्नई हवाई अड्डे पर औपचारिक स्वागत के साथ ही उनकी संस्कृतिक अगवानी भी होगी.
सड़क मार्ग से जाएंगे आईटीसी ग्रैंड चोला
शी 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आईटीसी ग्रैंड चोला पहुंचने के लिए सड़क से जाएंगे. पांच किलोमीटर के इस हिस्से को एलईडी लाइट्स से सजाया गया है और दीवारों को भारत-चीन मित्रता संदेशों के साथ चित्रित किया गया है. पूरे रास्ते में विभिन्न स्थानों पर आलग-अलग जगह संगीत और नृत्य प्रस्तुतियां होंगी. इस दौरान छात्रों सहित 6000 से अधिक लोग विभिन्न नृत्य रूपों के प्रदर्शन करेंगे करेंगे.
जिनपिंग के स्वागत के लिए तमिल परंपराओं के प्रतीक केले के पेड़ और गन्ने से बने मेहराब व तोरण द्वार बनाए गए हैं.होटल आईटीसी ग्रैंड चोला में भी कलाकारों और कर्मचारियों द्वारा भी उनका स्वागत किया जाएगा. होटल से ममल्लापुरम के रास्ते में भी उन्हें भारत के संगीत रूपों की झलक मिलेगी.
उनके होटल के बाहर नागास्वरम होटल किया जाएगा, करकट्टम और सैदापेट में ड्रम होगा, जबकि गांधी मंडपम में थापट्टम और आईटी कॉरिडोर पर सेंदाई मेलम नज़र आएगा.
शोर टेम्पल जाएंगे शी जिनपिंग
मामल्लापुरम में जब प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शोर टेम्पल पहुचेंगे तो वहां भी दोनों नेता रात्रिभोज से पहले प्रतिष्ठित कलाक्षेत्र फाउंडेशन के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा महात्मा गांधी और महाकाव्य रामायण, कथकली गायन और भरतनाट्यम पर आधारित नृत्य नाटिकाओं का आनंद लेंगे. करीब 30 मिनट के इस कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक झांकी चीनी नेता के आगे होगी.
आयोजन की तैयारियों से जुड़े सूत्रों 11 अक्टूबर की शाम होने वाली कलाकारों की प्रस्तुतियों को पांच भागों में बांटा गया है. अलारिप्पू के साथ कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए, भगवान और गुरु को सम्मान देने के लिए मंगलाचरण, शांति सूत्र (कबीर दास भजन) प्रस्तुत किए जाएंगे.
रामायण के कुछ प्रसंगों का चित्रण सेतु भंडारम के रूप में पट्टाभिषेकम का तीसरा प्रदर्शन होगा, कथकली का अगला प्रदर्शन होगा. लगभग 30 मिनट की प्रस्तुति तिलाना के साथ समाप्त हो जाएगी जो कर्नाटक लयबद्ध संगीत कार्यक्रम है.
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Source: IOCL



























