एक्सप्लोरर

Explained: TMC के 20 और DMK के 22 सांसदों की मंजिल NDA! क्या नए समीकरण के बाद परिसीमन बिल पास करा सकेंगे PM मोदी?

Delimitation Bill: अगर सरकार को 20 TMC और 22 DMK सांसदों का पूरा समर्थन मिल जाए, तो भी उसे 360 तक पहुंचने के लिए 12-19 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत होगी. ये वोट कुछ निर्दलीय सांसदों से मिल सकते हैं.

परिसीमन बिल अब सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं रह गया है. यह भारतीय राजनीति के सबसे गर्म मुद्दों में से एक बन चुका है. अप्रैल 2026 में यह बिल 54 वोटों से हार गया था, लेकिन अब नए सियासी समीकरण बन रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत हो चुकी है, DMK INDIA गठबंधन से अलग हो चुका है और राज्यसभा में NDA की ताकत बढ़ने की उम्मीद है. सवाल उठता है कि क्या ये बदलाव नंबर गेम को इतना बदल पाएंगे कि मोदी सरकार 360 का जादुई आंकड़ा पार कर सके? आइए, नंबरों की दुनिया में उतरकर समझते हैं पूरा खेल...

परिसीमन बिल क्या है और इसमें क्या-क्या है?  

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 का मकसद लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक करना है और 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करना है. इसका एक बड़ा उद्देश्य   नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करना है. अप्रैल 2026 में यह बिल इसलिए हारा था क्योंकि विपक्ष के अलावा TMC और DMK समेत कई क्षेत्रीय दलों ने भी इसका पुरजोर विरोध किया था.

पास करने के लिए कितने नंबर चाहिए?

यह बिल एक संवैधानिक संशोधन है, इसलिए इसे पास कराने के लिए 'विशेष बहुमत' की जरूरत होती है. अनुच्छेद 368 के तहत इसके लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  • पहली शर्त: सदन के कुल सदस्यों का बहुमत.
  • दूसरी शर्त: वोटिंग करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत.

वर्तमान में लोकसभा में तीन सीटें खाली हैं, इसलिए सदन की प्रभावी संख्या 540 है. इस स्थिति में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए. राज्यसभा में कुल सदस्य संख्या 245 है, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोट चाहिए.

लोकसभा में मौजूदा संख्या का पूरा गणित क्या है?

बिल हारने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा बदलाव TMC में आया है. आइए, नंबरों के जरिए समझते हैं कि NDA कहां खड़ा है और उसे कितना सफर तय करना है:

  • NDA का मूल आधार: फिलहाल NDA के पास 293 सांसद हैं. इसमें बीजेपी के 240, TDP के 16, जदयू के 12 और अन्य सहयोगी दलों के सांसद शामिल हैं.
  • TMC बगावत: तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि पार्टी के 29 सांसदों में से करीब 20 उनके साथ हैं और इन सभी ने मिलकर लोकसभा स्पीकर को अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है. अगर ये 20 TMC सांसद NDA का समर्थन करते हैं, तो NDA का आंकड़ा 293 से बढ़कर 313 हो जाएगा.
  • DMK की स्थिति: DMK ने INDIA गठबंधन छोड़ दिया है, लेकिन 22 सांसद परिसीमन बिल का समर्थन करने को तैयार नहीं हैं. पार्टी का कहना है कि वह मौजूदा स्वरूप में बिल का 'सिद्धांत रूप में' विरोध करती है और राज्यों के अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी.
  • शिवसेना (UBT) का समर्थन नहीं: कुछ मीडिया रिपोर्टों में अटकलें लगाई जा रही थीं कि शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से 6 सांसद टूट सकते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि शिवसेना (UBT) का समर्थन दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है.
  • सिर्फ 12 वोटों की कमी: अगर हम TMC के बागी सांसदों (313) में वो अतिरिक्त 5 सांसद भी जोड़ दें, जिन्होंने अप्रैल में NDA का साथ दिया था, तो आंकड़ा 318 तक पहुंचता है. इस तरह सरकार लगभग 348 सांसदों   तक पहुंच सकती है. यानी NDA अभी भी 360 के आंकड़े से करीब 12 वोट दूर है.

क्या राज्यसभा में नंबर पूरे हो रहे हैं?

राज्यसभा में NDA के पास फिलहाल 149 सांसद हैं. यहां दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 है. 18 जून 2026 को 10 राज्यों में राज्यसभा की 25 सीटों पर चुनाव होने हैं. चुनाव परिणामों के बाद NDA के सांसदों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. हालांकि, राज्यसभा में भी NDA को पूर्ण बहुमत पाने के लिए लगभग 15 से ज्यादा सीटों की जरूरत होगी.

क्या मोदी सरकार बिल पास करा पाएगी?

यह सबसे बड़ा सवाल है. इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार को TMC के कितने सांसद समर्थन करते हैं. DMK मुद्दे-आधारित समर्थन देता है या नहीं और राज्यसभा के चुनावों में NDA को कितनी सीटें मिलती हैं.

अगर सरकार को 20 TMC और 22 DMK सांसदों का पूरा समर्थन मिल जाए, तो भी उसे 360 तक पहुंचने के लिए 12-19 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत होगी. ये वोट कुछ निर्दलीय सांसदों से मिल सकते हैं. हालांकि, यह सब पूरी तरह से तय नहीं है और इन सांसदों पर 'हॉर्स ट्रेडिंग' के आरोप भी लग सकते हैं.

ये रास्ता इतना आसान क्यों नहीं?

NDA की यह राह कांटों भरी है और आगे कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है...

पहली चुनौती- TMC के बागी सांसदों का अभी तक कोई आधिकारिक समर्थन नहीं

फिलहाल TMC के बागी सांसदों ने सिर्फ अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है. हालांकि अटकलें हैं कि ये सांसद 'बिना शर्त समर्थन' दे सकते हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक औपचारिक रूप से सरकार को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है.

दूसरी चुनौती- DMK और दक्षिण राज्यों का कड़ा विरोध

DMK ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा स्वरूप में परिसीमन बिल का 'सिद्धांत रूप में' विरोध करती है. पार्टी का कहना है कि दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा के लिए वह किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी. सरकार को उम्मीद है कि शायद बिल में कुछ बदलाव कर DMK को मनाया जा सकता है. हालांकि, केरल, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्य इस बिल का खुलकर विरोध कर रहे हैं. उनकी चिंता यह है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से उनकी सीटें घट जाएंगी, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है.

तीसरी चुनौती- शिवसेना (UBT) का कोई मोर्चा न खोलना

कुछ मीडिया रिपोर्टों के अलावा शिवसेना (UBT) के टूटने या NDA को समर्थन देने के कोई संकेत नहीं हैं. अटकलों के बावजूद, पार्टी सरकार से दूरी बनाए हुए है और उसका समर्थन मिलना अभी मुश्किल नजर आ रहा है.

चौथी चुनौती- 'ONOE' और क्षेत्रीय दलों की अलग राह

'एक देश, एक चुनाव' और 'परिसीमन' जैसे मुद्दों पर कई क्षेत्रीय दलों की सरकार से अलग राय है. DMK के अलावा अन्य पार्टियां भी बिल के खिलाफ हैं. राज्यसभा चुनावों के बाद भी NDA को पूर्ण बहुमत पाने के लिए लगभग 15 और सीटों की जरूरत होगी. इन सीटों को पाने की राह आसान नहीं है.

अभी खत्म नहीं हुआ नंबरों का खेल

नए सियासी समीकरणों ने NDA के लिए उम्मीदें तो बढ़ा दी हैं, लेकिन हकीकत यह है कि समर्थन मिलने के बावजूद बीजेपी अभी भी अपने लक्ष्य से लगभग 12 वोट दूर रहेगी. TMC में बगावत से NDA को बड़ा फायदा मिल सकता है, फिर भी बिल पास होना बहुत मुश्किल है. हालांकि, DMK और अन्य दलों के विरोध ने सरकार के लिए यह मुश्किल बना दिया है. आने वाले दिनों में TMC के बागी सांसदों के रुख और DMK के अड़ियल रवैये में बदलाव सबसे अहम भूमिका निभाएंगे. तब ही पता चलेगा कि मोदी सरकार इस नंबर गेम में बाजी मार पाती है या नहीं.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही NDA के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जरूरी बहुमत पूरा होने के आसार दिखेंगे, सरकार मानसून सत्र से पहले ही एक विशेष सत्र बुला सकती है. मानसून सत्र जुलाई के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है, लेकिन अगर नंबर पूरे होते हैं, तो सरकार इसके लिए अलग से सत्र बुलाने से पीछे नहीं हटेगी.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

दिल्ली में मुस्लिम बुद्धिजीवियों का राष्ट्रीय मंथन... पुलिस कार्रवाई, जौहर यूनिवर्सिटी और UCC पर प्रस्ताव पारित
दिल्ली में मुस्लिम बुद्धिजीवियों का राष्ट्रीय मंथन... पुलिस कार्रवाई, जौहर यूनिवर्सिटी और UCC पर प्रस्ताव पारित
पेपर लीक पर देशभर में उबाल, राजस्थान से यूपी तक जोरदार प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
पेपर लीक पर देशभर में उबाल, राजस्थान से यूपी तक प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
Explained: NTA की ओवरहॉलिंग से लेकर नए सख्त कानून! क्या मोदी सरकार बचा लेगी धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी?
NTA की ओवरहॉलिंग से लेकर नए सख्त कानून! क्या मोदी सरकार बचा लेगी धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी?
'निर्दयी न बनें, बच्चों तक खाना पहुंचने दें', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर कपिल सिब्बल की केंद्र सरकार से अपील
'निर्दयी न बनें, बच्चों तक खाना पहुंचने दें', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर कपिल सिब्बल की केंद्र सरकार से अपील
Advertisement

वीडियोज

Ishqnama Review: Shehnaaz Gill और Jai Randhhawa की दिल छू लेने वाली लव स्टोरी
The India Story Review: खाने और सेहत पर बड़ा सवाल उठाती Shreyas Talpade की फिल्म
Bollywood News: युवा सड़कों पर, स्टार्स अपने स्वैग में, ट्रोल्स बोले—
Udne ki Asha: Renuka को चौखट पर देख हक्के-बक्के रहे Sachin-Sailee, बीते दुखों की यादें ताजा
Badshah-Isha Rikhi के Viral Post ने बढ़ाई हलचल, क्या शादी में सब कुछ ठीक नहीं?
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
पेपर लीक पर देशभर में उबाल, राजस्थान से यूपी तक जोरदार प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
पेपर लीक पर देशभर में उबाल, राजस्थान से यूपी तक प्रदर्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
CJP प्रदर्शन के बीच धर्मेद्र प्रधान के बचाव में उतरीं मायावती! सपा-कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
CJP प्रदर्शन के बीच धर्मेद्र प्रधान के बचाव में उतरीं मायावती! सपा-कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
विराट कोहली से विवाद की खबरों पर ट्रेविस हेड ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर भी जताया दर्द
विराट कोहली से विवाद की खबरों पर ट्रेविस हेड ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर भी जताया दर्द
'जो डर गया सो मर गया…', सलमान खान ने सुबह-सुबह लिख दी ऐसी बात, फैंस बोले- 'भाई से पंगा नहीं'
'सलमान खान डर गया...', एक्टर ने सुबह-सुबह तस्वीरें शेयर कर लिख दी ऐसी बात
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट: 18 मेट्रो स्टेशन बंद, सरकार संग आज फिर बैठक; जानें CJP का नया प्लान?
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट: 18 मेट्रो स्टेशन बंद, सरकार संग आज फिर बैठक; जानें CJP का नया प्लान?
'पूरे देश में होगा...', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, मीटिंग से ठीक पहले केंद्र सरकार को दिया अल्टीमेटम
'पूरे देश में होगा...', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, मीटिंग से ठीक पहले केंद्र सरकार को दिया अल्टीमेटम
Cab Driver Viral Video : मैं पूरा किराया लूंगा'... कैब ड्राइवर की इस बात पर भड़की महिला, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
मैं पूरा किराया लूंगा'... कैब ड्राइवर की इस बात पर भड़की महिला, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
IRCTC Goa Tour Package: मात्र ₹18,680 में गोवा की फ्लाइट, 4-स्टार होटल और खाना! IRCTC का 'गोवा डिलाइट' पैकेज
मात्र ₹18,680 में गोवा की फ्लाइट, 4-स्टार होटल और खाना! IRCTC का 'गोवा डिलाइट' पैकेज
Embed widget