Xप्लेन: 5 दिन बाद भी शोर! CJP आंदोलन खत्म होकर भी क्यों नहीं थम रहा?
Protest Still Raise: CJP ने सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा नहीं करवाया, बल्कि एक नया 'टेम्पलेट' दिया है. अब हर आंदोलन उसी टेम्पलेट को अपनाएगा. यही वह राजनीति है जो CJP के खत्म होने के बाद भी बची हुई है.

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 25 जुलाई 2026 को 36 दिनों के लंबे आंदोलन को खत्म कर दिया. मोदी सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, FIR वापसी का वादा और परीक्षा सुधारों पर चर्चा की मांगें मान लीं. जंतर-मंतर का मंच हट गया, टेंट समेट लिए गए, प्रदर्शनकारी अपने घर लौटे और आंदोलन खत्म हो गया. लेकिन पांच दिन बाद भी सड़कों पर वही नारे क्यों गूंज रहे हैं. आखिर खत्म होकर भी क्यों खत्म नहीं हो पा रहा CJP आंदोलन...
एक्सपर्ट्स की राय और मौजूदा हाल देखें, तो 5 वजहें पता चलती हैं...
1. अधर में लटका FIR वापसी का वादा
सबसे बड़ा मुद्दा FIR वापसी का है. CJP ने आंदोलन खत्म करने से पहले सरकार से तीन मांगें रखीं थीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस. सरकार ने तीनों मांगें मान लीं, लेकिन सरकार से लिखित गारंटी नहीं मिली.
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने साफ कहा, 'तीसरे दौर की बातचीत में हम इस बात पर सहमत हुए थे कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी और भविष्य में कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी.' CJP ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक ड्राफ्ट समझौता सौंपा. फिलहाल खबरें हैं कि FIR वापस ले ली गई हैं, लेकिन ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुआ है.
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा था, '28 जुलाई तक FIR वापसी की लिखित गारंटी का समय सीमा खत्म हो गई है. CJP के पास फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं.'
2. मुंबई पुलिस का नोटिस भेजना जारी रखना
CJP को सबसे बड़ा झटका मुंबई पुलिस से लगा. आंदोलन खत्म होने के बाद भी मुंबई पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजना और उनके बयान दर्ज करना जारी रखा. पुलिस का कहना है, 'जांच को बीच में नहीं रोका जा सकता. FIR तभी वापस ली जा सकती है जब चार्जशीट दाखिल हो जाए.' यानी पुलिस पहले चार्जशीट दाखिल करेगी, फिर केस वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी. ज्यादातर मामलों में 31 जुलाई तक चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाएगी, क्योंकि जांच अभी जारी है.
एक छात्रा ने मीडिया को बताया, 'मुझे नोटिस मिला कि मुझे पुलिस स्टेशन रिपोर्ट करना है. मैं तो प्रदर्शन स्थल तक पहुंची भी नहीं थी.' वहीं, आशुतोष रांका ने मांग करते हुए कहा, 'सरकार तुरंत अपने वादे का सम्मान करे, सभी FIR वापस ले और कानूनी मामलों पर लिखित समझौता साझा करे.'
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने FIR वापसी के आदेश दे दिए हैं, लेकिन प्रक्रिया में हो रही देरी ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है.
3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने मामला और उलझा दिया
सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को एक अंतरिम आदेश में कहा कि पुलिस की ज्यादतियों और प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर भी हमले हुए. दोनों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने डायरेक्शन नंबर 4 में सरकारों को मौजूदा FIR के साथ आगे बढ़ने और जांच करने की इजाजत दे दी.
सौरव दास ने कहा, 'यह आदेश 25 जुलाई को सरकार की ओर से दी गई गारंटी के सीधे विरोध में है कि FIR वापस ली जाएंगी और किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा.'
CJP को डर है कि बीजेपी सरकार इस आदेश का इस्तेमाल छात्रों के खिलाफ हथियार के रूप में करेगी. सौरव दास ने आगे कहा, 'अदालत ने FIR जारी रखने का आदेश नहीं दिया है. सरकार के पास अभी भी FIR वापस लेने की शक्ति है. कोर्ट के आदेश का हवाला देकर सरकार अपने वादों से मुकर नहीं सकती.'
CJP ने मांग की कि सरकार 25 जुलाई के आश्वासन की शर्तों को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे ताकि पूरी पारदर्शिता हो. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों पर सख्त कार्रवाई न करने के आदेश दिए हैं.
4. CJP की लड़ाई खत्म नहीं हुई यानी 'आंदोलन खत्म, लड़ाई नहीं'
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कह दिया, 'आंदोलन खत्म हुआ है, लेकिन लड़ाई अभी जारी रहेगी.' उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजिल नहीं है, बल्कि एक लंबे संघर्ष की शुरुआत है. CJP का अब फोकस शिक्षा सुधार, युवाओं के मुद्दों और आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने पर होगा.
अभिजीत दीपके ने 29 जुलाई को एक और चेतावनी देते हुए कहा, 'अगर पुलिस की ओर से छात्रों का उत्पीड़न जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही एक बड़े शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ जवाब देगी.' दीपके ने 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए. दीपके ने कहा, 'अगर सरकार ने अपना रुख नहीं बदला, तो हमें फिर से सड़कों पर उतरना पड़ेगा.'
5. राजनीति में जब विपक्ष का हथियार बन गई CJP
CJP आंदोलन सिर्फ छात्रों का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह राजनीति का मैदान बन गया है...
- केजरीवाल का समर्थन: आम आदमी पार्टी यानी आप ने CJP के फिर से आंदोलन करने की चेतावनी का खुलकर समर्थन किया. अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'उन्हें आगे बढ़ना चाहिए, हम उनका समर्थन करते हैं.' उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि FIR वापस ली जाएंगी. फिर वह झूठ क्यों बोला गया'?
- कपिल सिब्बल की मौजूदगी: CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल भी मौजूद थे. सिब्बल ने कहा, 'यह एक जैविक आंदोलन था. शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों को संरक्षण मिलना चाहिए. हम नहीं चाहते कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई हो.'
- 'आरक्षण हटाओ' आंदोलन: CJP आंदोलन की सबसे बड़ी राजनीतिक उपज 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के रूप में सामने आई है. NEET पेपर लीक के बाद जिन छात्रों ने आत्महत्या की, उनमें से ज्यादातर सामान्य वर्ग के थे. इससे यह तर्क मजबूत हुआ कि आरक्षण व्यवस्था सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कॉम्पिटीशन को बहुत मुश्किल बना देती है.
- बेहद नाजुक समय: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों दूर हैं. आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जो किसी भी चुनाव में नतीजे बदल सकता है. CJP ने खुद को कभी 'गैर-राजनीतिक' बताया, लेकिन आंदोलन की सफलता ने उसे राजनीति के केंद्र में ला दिया है.
तो क्या CJP आंदोलन ने खत्म होने की बजाय नया रूप लिया?
ए्सपर्ट्स कहते हैं कि CJP आंदोलन खत्म हो भी गया है और नहीं भी...
जंतर-मंतर पर मंच तो हट गया है, लेकिन सिर्फ इस वजह से आंदोलन खत्म नहीं होगा है. अभी तक FIR वापस नहीं हुईं, मुंबई पुलिस नोटिस भेज रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उलझन बढ़ा दी है. इस वजह से CJP ने फिर से आंदोलन की चेतावनी दे दी है. राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को अपना हथियार बना लिया है. संसद में हर रोज आंदोलन पर कोई न कोई बहस जरूर हो रही है, फिर चाहे पैलेट गन का इस्तेमाल हो या पत्थरबाजी का मुद्दा. इस लिहाज से आंदोलन खत्म नहीं हुआ, बल्कि एक नए रूप में बदल गया है. बची हुई राजनीति तीन सवालों के इर्द-गिर्द घूम रही है:
- FIR वापसी: क्या सरकार अपने वादे पर खरी उतरेगी या फिर छात्रों को निशाना बनाती रहेगी?
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: क्या सरकार इसे छात्रों के खिलाफ इस्तेमाल करेगी या फिर अपने वादे पूरे करेगी?
- 'आरक्षण हटाओ': क्या CJP की सफलता एक नए सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन को जन्म देगी?
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जो कहा, वह शायद इस पूरे मामले का सबसे सटीक सार है, 'आंदोलन खत्म हुआ है, लेकिन लड़ाई अभी जारी रहेगी.' CJP ने सिर्फ एक मंत्री का इस्तीफा नहीं करवाया, बल्कि उसने एक नया 'टेम्पलेट' दिया है. अब हर आंदोलन उसी टेम्पलेट को अपनाएगा. यही वह राजनीति है जो CJP के खत्म होने के बाद भी बची हुई है.
























