X पर क्यों दिख रहा है आपकी सोच के खिलाफ कंटेंट? समझिए एल्गोरिदम का पूरा गणित
अमेरिका के 715 X-यूज़र्स के फ़ीड और उनके ऑनलाइन व्यवहार का अध्ययन करके शोधकर्ताओं ने बताया है कि X (ट्विटर) का एल्गोरिदम जानबूझकर और सिस्टमैटिक तरीके से यूज़र्स को ऐसा कंटेंट परोसता है.

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर लगातार ऐसी पोस्ट्स क्यों आती हैं, जो आपकी मुख्य मान्यताओं, सिद्धांतों और राजनीतिक सोच के बिल्कुल विपरीत होती हैं? अगर आप किसी मुद्दे पर एक खास राय रखते हैं, तो आपका फ़ीड अचानक उसके विरोधी विचारों और तीखी बहसों से क्यों भर जाता है?
'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज' (PNAS) में प्रकाशित एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने इस राज़ से पर्दा उठाया है. अमेरिका के 715 X-यूज़र्स के फ़ीड और उनके ऑनलाइन व्यवहार का अध्ययन करके शोधकर्ताओं ने बताया है कि X (ट्विटर) का एल्गोरिदम जानबूझकर और सिस्टमैटिक तरीके से यूज़र्स को ऐसा कंटेंट परोसता है, जिसे देखकर वे असहमत या परेशान महसूस करते हैं.
1. एल्गोरिदम का ढांचा और 'For You' पेज का गणित
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स बेहद शक्तिशाली AI एल्गोरिदम का इस्तेमाल करते हैं. इनका मुख्य काम लाखों-करोड़ों पोस्ट्स में से चुनिंदा कंटेंट को छांटकर आपके 'For You' पेज पर दिखाना होता है.
पैटर्न का अनुमान: एल्गोरिदम लगातार यह ट्रैक करता है कि आप किस तरह की पोस्ट पर रुकते हैं, किसे 'लाइक' करते हैं या किस पर कमेंट करते हैं.
वैल्यू प्राथमिकता: रिसर्च में इंसानी मूल्यों के मानक मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण टूल का इस्तेमाल किया गया. इससे पता चला कि X का एल्गोरिदम उन पोस्ट्स को ज़्यादा बढ़ावा देता है जो परंपराओं को बनाए रखने, नियमों का पालन करने या सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी होती हैं.
दबाए जाने वाले मुद्दे: इसके विपरीत, जो पोस्ट्स प्रकृति की रक्षा, दूसरों की देखभाल, आपसी भरोसे या सहिष्णुता से जुड़ी होती हैं, एल्गोरिदम उन्हें फ़ीड में कम जगह देता है.
2. यूज़र का व्यवहार: 'लाइक्स' और 'रिप्लाई' के बीच का खेल
यह ट्रेंड सिर्फ एल्गोरिदम की वजह से नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार और एल्गोरिदम के सीखने के तरीके के मेल से पैदा होता है.
लोग किस पर क्या करते हैं?: आमतौर पर जब लोग किसी पोस्ट से सहमत होते हैं, तो वे सरसरी तौर पर 'लाइक' (हार्ट आइकन) दबाकर आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन जब लोग किसी पोस्ट से सख्त असहमत होते हैं, तो वे कमेंट सेक्शन में जाकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हैं या बहस करते हैं.
एल्गोरिदम किसे अहमियत देता है?: X का एल्गोरिदम सैकड़ों साधारण 'लाइक्स' की तुलना में गिने-चुने 'रिप्लाई' को कहीं ज़्यादा वज़न देता है. सिस्टम यह मान लेता है कि जिस पोस्ट पर यूज़र ने समय देकर रिप्लाई लिखा है, वह उसके लिए 'हाई एंगेजमेंट' वाला विषय है.
उल्टा नतीजा: नतीजा यह होता है कि एल्गोरिदम आपको उसी विचारधारा और बहसबाज़ी से जुड़ी और पोस्ट्स दिखाना शुरू कर देता है, जिससे आप नफरत करते हैं.
3. डेमोक्रेट्स बनाम रिपब्लिकन: किसे दिखता है ज़्यादा बेमेल कंटेंट?
अध्ययन में एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला राजनीतिक पहलू भी सामने आया है. एल्गोरिदम का यह विरोधाभासी असर सभी राजनीतिक विचारधाराओं पर एक समान नहीं पड़ता.
डेमोक्रेट्स पर 4 गुना असर: रिसर्च के अनुसार, X का एल्गोरिदम डेमोक्रेटिक (उदारवादी) सोच रखने वाले यूज़र्स को रिपब्लिकन (रूढ़िवादी) यूज़र्स की तुलना में 4 गुना ज़्यादा बेमेल और विरोधी कंटेंट दिखाता है.
आपत्ति जताने की आदत: आंकड़ों से पता चलता है कि डेमोक्रेटिक यूज़र्स विरोधी विचारों वाली पोस्ट्स पर रिपब्लिकन यूज़र्स की तुलना में ज़्यादा तीखी प्रतिक्रिया और कमेंट्स दर्ज कराते हैं.
विनाशकारी फ़ीडबैक लूप: इस व्यवहार के कारण एक मज़बूत 'फ़ीडबैक लूप' बन जाता है. यूज़र जितनी ज़्यादा आपत्ति जताता है, एल्गोरिदम उसे उतना ही ज़्यादा विरोधी कंटेंट परोसने लगता है.
4. एंगेजमेंट-आधारित एल्गोरिदम और सामाजिक ध्रुवीकरण
लंबे समय से टेक कंपनियों का तर्क रहा है कि यूज़र्स को विरोधी विचार दिखाने से उनके दृष्टिकोण में व्यापकता आती है और 'इको चैंबर' टूटता है. हालांकि, इस रिसर्च ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
असंतोष और गुस्सा: एंगेजमेंट बढ़ाने के चक्कर में विरोधी विचार थोपने से स्वस्थ बातचीत नहीं होती, बल्कि यूज़र्स में गुस्सा, तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ता है.
फ़ॉलोइंग का बेअसर होना: यूज़र्स भले ही अपनी पसंद और विचार से मेल खाने वाले अकाउंट्स को फ़ॉलो करते हों, लेकिन एल्गोरिदम का एल्गोरिद्मिक 'For You' पेज उनकी व्यक्तिगत पसंद को ओवरराइड (Override) कर देता है.
5. समाधान और भविष्य की राह
शोधकर्ताओं की टीम ने इस समस्या से निपटने और सोशल मीडिया फ़ीड को यूज़र्स के वास्तविक मूल्यों (Values) से जोड़ने के लिए एक नया मॉडल भी पेश किया है.
वैल्यू-अलाइंड फ़ीड (Value-Aligned Feed): प्लेटफ़ॉर्म्स को ऐसे टूल्स बनाने चाहिए जो यूज़र्स से सीधे पूछें कि वे किन मुद्दों (जैसे- पर्यावरण, विज्ञान, कला, शांति) को प्राथमिकता देते हैं और उसी के अनुसार फ़ीड को फ़िल्टर करें.
यूज़र कंट्रोल: एंगेजमेंट और विवादों पर आधारित फ़ीड के बजाय यूज़र को अपनी स्क्रीन पर दिखने वाली जानकारी को कंट्रोल करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए.
X पर आपको दिखने वाला अवांछित कंटेंट किसी इत्तेफ़ाक का नतीजा नहीं है, बल्कि यह प्लेटफ़ॉर्म के बिजनेस मॉडल का हिस्सा है. जब तक सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'कमेंट और बहस' के बजाय 'यूज़र की पसंद और मानसिक शांति' को प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक आपकी फ़ीड आपकी सोच के खिलाफ ही काम करती रहेगी.





















