'सहमति से संबंध बनाने की उम्र कम करने से पहले...', VHP ने दी ये चेतावनी
हाल में नीट पेपर लीक के विरोध में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि किशोर ऐसे बैनर लेकर चल रहे थे, जिन पर यौन रूप से स्पष्ट अभिव्यक्तियां लिखी थीं.

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि सहमति से संबंध बनाने की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में यौन संबंधों को लेकर सही और समझदारी वाले निर्णय लेने के लिए आवश्यक शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक परिपक्वता का अभाव होता है.
सांस्कृतिक गौरव संस्थान की ओर से यहां कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘किशोरों के सहमति वाले संबंध-चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में कुमार ने कहा कि इस मुद्दे को केवल कानूनी बहस के रूप में नहीं, बल्कि आम परिवारों के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए.
अपने परिवार की लड़की के बारे में सोचिए: आलोक कुमार
उन्होंने कहा, 'मैं आप सभी से कहूंगा कि अपने-अपने परिवार की किसी लड़की के बारे में सोचिए. क्या यह उसके लिए शारीरिक संबंध बनाने की सही उम्र है. क्या वह इस तरह के संबंध के लिए शारीरिक रूप से विकसित और तैयार है? क्या वह इसके लिए भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार है? मेरा मानना है कि इसका उत्तर ‘नहीं’ है. ऐसा नहीं होना चाहिए.'
सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर क्या कहा?
हाल में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कुमार ने आरोप लगाया कि किशोर ऐसे बैनर लेकर चल रहे थे, जिन पर यौन रूप से स्पष्ट अभिव्यक्तियां लिखी थीं. उन्होंने कहा कि यह समाज में ऐसी भाषा और व्यवहार को सामान्य बनाने के प्रयासों को दर्शाता है.
कुमार ने कहा, 'हाल में कॉजपा के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शन के दौरान किशोर किस तरह के बैनर लेकर चल रहे थे? उनमें स्पष्ट रूप से यौन अभिव्यक्तियां लिखी हुई थीं. बात सिर्फ इतनी ही नहीं है. यह सार्वजनिक जीवन में ऐसी शब्दावली को सामान्य बनाने और उसे रोजमर्रा की भाषा का हिस्सा बनाने का प्रयास है.'
सहमति की उम्र कम करने से विवाह-परिवार होंगे कमजोर: VHP
कुमार ने चेतावनी दी कि सहमति की उम्र कम करने से विवाह और परिवार जैसी संस्थाएं कमजोर हो जाएंगी. उन्होंने सवाल किया, 'इस तरह विवाह संस्था, परिवार संस्था और उनसे जुड़े मूल्य-ये सभी निशाने पर आ रहे हैं. यदि सहमति की उम्र 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष या उससे भी कम कर दी जाती है, तो हम वास्तव में इन प्रवृत्तियों को स्वीकार कर रहे होंगे. क्या हम सचमुच इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं?'
VHP के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि सहमति की उम्र कम करने के किसी भी प्रस्ताव पर समाज और संसद में बहस होनी चाहिए, न कि इसे न्यायिक टिप्पणियों के माध्यम से तय किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मैं पूछना चाहता हूं : प्रयोग किस चीज में? यह उम्र विज्ञान की प्रयोगशालाओं में प्रयोग करने की है. यह शैक्षणिक संस्थानों में ज्ञान प्राप्त करने की उम्र है. क्या हम चाहते हैं कि यही उम्र यौन संबंधों में प्रयोग करने की उम्र बन जाए?'
अदालत की टिप्पणियों पर क्या बोली वीएचपी?
जैन ने कहा कि यह मुद्दा केवल संगोष्ठियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उन्होंने कहा, 'यह मुद्दा केवल कॉन्स्टिट्यूशन क्लब तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इसकी गूंज देश की हर गली तक पहुंचनी चाहिए. यदि समाज की राय सुनने के बाद भी न्यायपालिका उस दिशा में आगे बढ़ने पर विचार करती है, तो हमारे पास उसे समझाने की क्षमता होनी चाहिए.'
जैन ने कहा कि भारतीय कानून लगातार 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय लेने के लिए पर्याप्त परिपक्वता न रखने वाला मानता है. उन्होंने कहा, 'मतदान की उम्र को ही ले लीजिए. इसे 18 वर्ष निर्धारित किया गया है. भारतीय संविदा अधिनियम पर विचार कीजिए. कोई नाबालिग व्यक्ति वैध अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता. ऐसे कई उदाहरण हैं, जो दिखाते हैं कि इस उम्र को गहराई से विचार करके और संतुलित निर्णय लेने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है. युवाओं को संरक्षण की आवश्यकता होती है.'
ये भी पढ़ें- लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी एंटी पेपर लीक बिल पास, अमित शाह ने क्या कहा?
























