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Xप्लेन: 'कश्मीर भारत का हिस्सा', US एम्बेसडर सर्जियो का बयान इंडिया के लिए क्या मायने?

Sergio Gor on Kashmir: यह कश्मीर पर भारत को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है, अनुच्छेद 370 हटाने की मंजूरी है, पर्यटन और निवेश के रास्ते खुलने का संकेत है. पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने का हथियार भी है.

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 19 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे साउथ एशिया की राजनीति को हिलाकर रख दिया. श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा, 'यह भारत का एक अहम हिस्सा है.' यह बयान ऐसे समय आया है जब  पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सेना के खिलाफ अभियान तेज हैं. यह संयोग नहीं, बल्कि एक नई अमेरिकी नीति का संकेत है. तो आखिर इस बयान का भारत और दुनिया के स्तर पर क्या महत्व है और पाकिस्तान पर क्या फर्क पड़ेगा...

15 साल बाद अमेरिकी राजदूत का कश्मीर दौरा

सर्जियो गोर सिर्फ भारत में अमेरिकी राजदूत नहीं हैं. वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत भी हैं. जनवरी 2026 में पद संभालने के बाद कश्मीर का यह उनका पहला दौरा है. पिछले 15 सालों में कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर नहीं गया था.

यह दौरा अपने आप में एक बड़ा राजनयिक बदलाव है. खास बात यह है कि गोर ने सिर्फ श्रीनगर ही नहीं, बल्कि लद्दाख का भी दौरा किया. यह भारत का केंद्र शासित प्रदेश है और चीन-भारत सीमा विवाद का अहम हिस्सा है.

सर्जियो गोर के बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं?

गोर का बयान, 'यह भारत का एक अहम हिस्सा है' शब्दों में छोटा है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं.

पिछले कुछ दशकों में अमेरिका ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा एक 'मध्यस्थ' या 'तटस्थ' रुख अपनाया था. 1990 के दशक में अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा तो किया, लेकिन उन्होंने कभी इतने स्पष्ट शब्दों में कश्मीर को   'भारत का हिस्सा' नहीं कहा था.

विदेश मामलों के जानकार और JNU के प्रोफेसर डॉ. राजन कुमार कहते हैं, 'गोर का यह बयान वाशिंगटन के जुड़ाव के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है. यानी अमेरिका अब कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है.'

यह बयान ऐसे समय आया है जब अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो चुका है. वहां विकास और आतंकवाद पर कंट्रोल बढ़ा है.

अमेरिकी यात्रा चेतावनी में ढील

गोर ने एक और बड़ा संकेत दिया, 'अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी यात्रा चेतावनी (Travel Advisory) की समीक्षा करेगा.'

अभी अमेरिकी विदेश विभाग जम्मू-कश्मीर (पूर्वी लद्दाख और लेह को छोड़कर) के लिए लेवल 4 'Do not travel' चेतावनी जारी करता है, जो सबसे गंभीर कैटेगरी है. यह चेतावनी आतंकवाद और नागरिक अशांति का हवाला देती है. श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों को भी इसके दायरे में रखती है.

गोर ने कहा, 'हम यह देखेंगे कि जो यात्रा चेतावनी लागू है, क्या उसे नीचे किया जाना चाहिए.' उन्होंने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार की सुरक्षा सुधारों की सराहना करते हुए कहा, 'नई दिल्ली, यहां के मुख्यमंत्री, यहां की सरकार ने इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए अविश्वसनीय कदम उठाए हैं.'

दरअसल, अमेरिकी यात्रा चेतावनी का सीधा असर पर्यटन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सोच पर पड़ता है. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी गोर से इस चेतावनी को वापस लेने की अपील की थी. इसे 'कश्मीर और दुनिया के बीच दीवार' बताते हुए.

गोर ने कहा कि अगर चेतावनी में ढील आती है, तो 'बहुत से अमेरिकी यहां आने और यहां की सुंदरता को देखने का आनंद लेंगे.'

PoK में पाकिस्तानी नरसंहार के बीच बयान कितना अहम?

गोर का यह दौरा और बयान ऐसे वक्त आया है, जब PoK में हालात बेहद खराब हैं. जून 2026 से PoK में स्थानीय लोग बिजली, महंगाई, बेरोजगारी और अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं. पाकिस्तानी सेना ने इस विरोध को गोलियों से कुचलने की कोशिश की.

भारत के विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को कहा कि कम से कम 90 नागरिक पाकिस्तानी बलों की बर्बरता में मारे गए हैं. MEA के प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन अत्याचारों के लिए जिम्मेदार ठहराने की अपील की. PoK में 50 से ज्यादा लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. ज्यादातर पीड़ित 15-16 से 32-35 साल के युवा हैं.

लंदन में हजारों लोगों ने 'PoK में नरसंहार बंद करो' के नारे लगाए. भारत ने PoK में हुए चुनावों को 'पूरी तरह से दिखावा' करार दिया.

राजन कुमार का मानना है कि ऐसे हालात में जब अमेरिकी राजदूत खुद कश्मीर आकर उसे 'भारत का अहम हिस्सा' कहते हैं, तो अमेरिका भारत के कश्मीर दावे को मान्यता दे रहा है. पाकिस्तान के PoK पर कब्जे को नजरअंदाज कर रहा है.

भारत में राष्ट्रीय स्तर पर बयान कितना अहम है?

डॉ. राजन कुमार के मुताबिक,

1. पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा

जब अमेरिकी राजदूत कश्मीर को 'भारत का अहम हिस्सा' कहता है, तो PoK पर पाकिस्तान के दावे की वैधता कमजोर पड़ जाती है. खासकर जब PoK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और नरसंहार की खबरें दुनिया भर में फैल रही हैं. यह बयान पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में मददगार साबित होगा.

2. कश्मीर पर भारत की स्थिति को मान्यता

यह बयान कश्मीर को लेकर अमेरिकी रुख में एक स्पष्ट और ऐतिहासिक बदलाव है. पिछले तीन दशकों में अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा तो किया, लेकिन कभी इतने स्पष्ट शब्दों में कश्मीर को 'भारत का हिस्सा' नहीं कहा. जब दुनिया का सबसे ताकतवर देश खुले तौर पर कश्मीर को भारत का हिस्सा मान रहा है, तो यह भारत की कूटनीति के लिए कोई आम जीत नहीं है. यह अंतरराष्ट्रीय कानून और जनमत के स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करता है.

3. अनुच्छेद 370 फैसले को अमेरिका की चुप्पी नहीं

2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अमेरिका ने इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया था. लेकिन गोर का यह दौरा और बयान संकेत देता है कि वाशिंगटन ने इस फैसले को मान लिया है. अब कश्मीर को भारत के आंतरिक मामले के रूप में देखता है. बीजेपी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इसे 'बहुत सकारात्मक' कदम बताया.

4. कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा

महबूबा मुफ्ती ने इस चेतावनी को 'कश्मीर और दुनिया के बीच दीवार' बताया था. अगर यह चेतावनी हटती या कम होती है, तो इसका सीधा असर कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा. यहां हजारों परिवार पर्यटन पर निर्भर हैं. यह कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत होगी.

5. अमेरिकी निवेश और आर्थिक सहयोग के रास्ते

अमेरिका किसी क्षेत्र को सुरक्षित और स्थिर मानता है, तो अमेरिकी कंपनियां वहां निवेश करने को तैयार होती हैं. यह कश्मीर में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा.

दुनिया के स्तर पर इस बयान का महत्व

विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर ए के पाशा के मुताबिक,

  • अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव: पिछले 30 सालों में कश्मीर को लेकर अमेरिकी रुख में जो बदलाव आया है, वह किसी से छिपा नहीं है. 1990 के दशक में अमेरिका कश्मीर को 'विवादित क्षेत्र' मानता था. अब वह इसे भारत का अहम हिस्सा कह रहा है. यह कोई इत्तिफाक नहीं है कि गोर दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत भी हैं. यानी यह बयान एक राजदूत का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासन की नीति का प्रतिबिंब है.
  • चीन-पाकिस्तान को करारा संदेश: गोर का कश्मीर और लद्दाख दौरा चीन को एक साफ संकेत देता है कि अमेरिका इस क्षेत्र में भारत के साथ खड़ा है. जब चीन और पाकिस्तान के बीच CPEC जैसी परियोजनाओं के माध्यम से गहरे संबंध हैं, तो अमेरिका का यह कदम चीन-पाकिस्तान अक्ष को कमजोर करने की कोशिश माना जा रहा है.
  • भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत: जब अमेरिका जैसा देश भारत के कश्मीर दावे को मान्यता देता है, तो यह भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का संकेत है. भारत आज दुनिया के पावर सेंटर्स में से एक है. अमेरिका इसे मान रहा है. यह बयान भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है.
  • PoK पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा: गोर का कश्मीर दौरा ऐसे समय हुआ है जब PoK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ स्थानीय लोग सड़कों पर हैं. जब अमेरिकी राजदूत खुद कश्मीर आकर वहां की सुरक्षा स्थिति की तारीफ करता है, तो PoK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और भी उजागर हो जाते हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान PoK की ओर गया है.
  • अमेरिका-भारत की साझेदारी का नया अध्याय: यह बयान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की नई रणनीति का हिस्सा है. जहां एक तरफ चीन अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, वहीं अमेरिका भारत को अपना प्रमुख साझेदार बना रहा है. गोर ने जून 2026 में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसमें आतंकवाद-रोधी, नारकोटिक्स नियंत्रण, सीमा सुरक्षा और कानून प्रवर्तन सहयोग पर चर्चा हुई थी. यह कश्मीर दौरा उसी साझेदारी का हिस्सा है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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