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नोटबंदी के बाद मोदी के डर से बीमारी के इलाज वाले डॉक्टरी पर्चे का सच!

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की खबरें, तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए. एबीपी न्यूज़ इन सभी वायरल मैसेज की पड़ताल कर इनका सच आपके सामने लाता रहा है. इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है. वायरल हो रही तस्वीर में डॉक्टर की लिखी दवाईयों वाली पर्ची है.

इस वर्ची के साथ दावा किया जा रहा है कि 8 नवंबर को मोदी के नोटबंदी के एलान के बाद से एक शख्स को मोदी से डर लगने लगा. उसे रात में अजीब-अजीब सपने आने लगे. डर हर दिन इस कदर बढ़ता गया कि वो अपने बिस्तर से उठकर इधर-उधर भागने लगा. पूरी-पूरी रात बिना पलक झपकाए गुजरने लगी. इस वायरल मैसेज की हकीकत जानने के लिए एबीपी न्यूज़ ने इसकी पड़ताल की.

नोटबंदी के बाद मोदी के डर से बीमारी के इलाज वाले डॉक्टरी पर्चे का सच!

वो शख्स इतना परेशान हुआ कि अपना इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास तक पहुंच गया. डॉक्टर ने भी ढेर सारी दवाईयां लिख दीं और आखिर में लिख दिया आप मनोवैज्ञानिक यानि दिमाग के डॉक्टर से संपर्क कीजिए.

असली कहानी यहीं से शुरू होती है. सोशल मडिया पर सबूत के तौर पर डॉक्टर की दवाई का पर्चा वायरल है जिसमें बीमारी के लक्षण के साथ-साथ दवाई भी लिखी गई है. इस पर्चे को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि ये बहुत पुराना नहीं है. इस पर 29 दिसंबर की तारीख लिखी हुई है. पर्चे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोलागंज इलाके के मां कमला हेल्थ केयर सेंटर का नाम लिखा है.

इन सबके बीच इस पर्चे पर लिखे बीमारी के लक्षण सबसे ज्यादा हैरान कराने वाले हैं. लक्षण वाले कॉलम में लिखा है- ''नोटबंदी के बाद से मोदी से डर लगने लगा, नींद नहीं आती, इधर-उधर भागते हैं, पुलिस पकड़कर ले जाएगी, भूख कम लगती है.''

इन लक्षणों के बाद नीचे दवाईयां लिखी गई हैं. पर्चे के मुताबिक डॉ शिव कुमार शर्मा ने मरीज को देखा और दवाईयां लिखी हैं. नीचे करीब पांच दवाईयों के नाम लिखे हुए हैं और पांच दिन तक दवाई खाने को कहा गया है सबसे आखिर में लिखा है कि दिमाग के डॉक्टर से संपर्क कीजिए. पर्चे पर मुहर भी लगी हुई है.

पहली नजर में देखकर पर्चे पर शक नहीं होता. देखने में तो सच लगता है लेकिन एक बात शक पैदा करती है वो ये कि बीमारी के लक्षण हिंदी में लिखे हैं और दवाईयां अंग्रेजी में. दोनों पेन की स्याही और राइटिंग में भी फर्क है.

इसलिए सवाल ये उठता है कि पर्चे के साथ किसी तरह की कोई छेड़छाड़ तो नहीं हुई है? कहीं ऐसा तो नहीं दवाईयां किसी दूसरी बीमारी की हैं और उस पर्चे पर जबरन ये लक्षण लिख दिए गए हों? क्योंकि सरकार के एलान के बाद किसी को प्रधानमंत्री से ही डर लगने लगे ये सुनने में थोड़ा अजीब लगता है और ये डर बीमारी में बदल जाए ये दावा और भी हैरान करता है.

इस पूरे वायरल मैसेज का सच जानने के लिए हमने इस कहानी की पड़ताल शुरू की. हमने लखनऊ के गोलागंज में सबसे पहले कमला हेल्थ केयर सेंटर को ढूंढने की कोशिश की और वहां डॉ शिव कुमार शर्मा को जिन्होंने ये दवाईयां लिखी थीं.

पड़ताल के लिए हमारी एक टीम लखनऊ में और दूसरी दिल्ली में थी. दिल्ली में इसलिए ताकि हम जान सकें कि पर्चे में जो लक्षण और दवाई लिखी हैं उनका कोई रिश्ता है क्या? इससे पूरे दावे की सच्चाई जानने में मदद मिलेगी.

इस वायरल पर्चे के पोस्टमार्टम के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम पहले राजधानी दिल्ली के प्राइमस अस्पताल पहुंची. हमने प्राइमस अस्पताल के डॉ अशोक दलाल से बात करके ये जानने की कोशिश की पर्चे में जो दवाईयां लिखी हैं वो किस बीमारी के इलाज के लिए दी जाती हैं?

डॉ अशोक दलाल ने बताया, "लक्षणों के हिसाब से दवाई ठीक लिखी हुई है. पहली दवा एंटी एंजायटी ड्रग है और प्लेट पर आएगा यानि तनाव कम करने वाली दवा, दूसरी दवा एंटी डिप्रेशन ड्रग है यानि अवसाद कम करने वाली दवा. तीसरी दवा एंटी साइकोटिक ड्रग है यानि दिमाग का इलाज करने वाली दवा, चौथी दवा साधारण गैस के लिए हैं और पांचवीं दवा मल्टी विटामिन है.'' मैं तीसरी दवा नहीं देता क्योंकि तीसरी दवा तब देता जब मरीज वास्तविकता से बिल्कुल परे हो जाए, ज्यादा उल्टा सीधा बोलने लगे.''

डॉ अशोक दलाल की बात के बाद कहानी में ट्विस्ट आ चुका था. जिस पर्चे पर राइटिंग को लेकर शक हो रहा था वो शक यहां पलट चुका था. डॉ दलाल साफ कर चुके थे कि बीमारी के लक्षण के हिसाब से दवा एकदम ठीक लिखी गई है

अब तक हमारी पड़ताल में लक्षण और दवाई की सच्चाई सच साबित हो चुकी थी लेकिन अभी पर्चे में लिखा डॉक्टर, मरीज की पुष्टि होना बाकी था. इसकी पुष्टि के बाद ही इस वायरल मैसेज का सच सामने आएगा.

लखनऊ में हमारी टीम ने पर्चे पर लिखे अस्पताल को खोज निकाला. इसके बाद की पड़ताल में पता चला कि कमला हेल्थ केयर सेंटर में डॉ शिव कुमार शर्मा हैं और उन्होंने ही ये दवाईयां लिखी थीं. डॉक्टर शिव कुमार शर्मा ने हमारे कैमरे पर बात करने से साफ इंकार कर दिया.

अब एक सवाल बाकी था कि अगर डॉक्टर ने ही ये दवाईयां लिखी थीं तो फिर राइटिंग अलग- अलग क्यों है? इस सवाल का जवाब ये है कि कमला हेल्थ केयर सेंटर में आने वाले मरीजों को पर्चे पर बीमारी के लक्षण पहले ही लिखने होते हैं उसके बाद वो डॉक्टर के पास जाते हैं.

यानि पर्चे के मुताबिक 38 साल का एक मरीज 29 दिसंबर के दिन लखनऊ के इस कमला हेल्थ केयर सेंटर आया था जिसे वाकई नोटबंदी के बाद से मोदी से डर लगने लगा था. उसने दवाईयां भी लिखवाई लेकिन कहानी इस पर्चे के जरिए सोशल मीडिया की दुनिया तक पहुंच गई. एबीपी न्यूज की पड़ताल में मोदी के डर से बीमारी के इलाज वाला डॉक्टर का पर्चा सच साबित हुआ है.

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