व्यापम घोटाले के व्हिसलब्लोअर आनंद राय को राहत, SC-ST एक्ट के तहत आरोप तय करने का आदेश SC ने किया रद्द
आनंद राय पर आरोप था कि उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के दौरान एक सांसद, एक विधायक, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के वाहनों को रोक लिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 फरवरी, 2026) को मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले का भंडाफोड़ करने वाले आनंद राय के खिलाफ जाति आधारित हिंसा से जुड़े आरोपों को खारिज कर दिया. आनंद राय ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2022 में एक रैली के दौरान एक सांसद, विधायक और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और अपशब्द कहने से जुड़े मामले में उनके खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप तय किए जाने को बरकरार रखा गया था.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. के. सिंह की बेंच ने आनंद राय की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा, 'हमने एससी/एसटी अधिनियम के दायरे पर विचार किया है और यह कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं है. अपील स्वीकार की जाती है.'
मध्यप्रदेश के नेत्र रोग विशेषज्ञ और व्यापम परीक्षा घोटाले का भंडाफोड़ करने वालों में शामिल आनंद राय की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और सुमीर सोढ़ी ने पक्ष रखा. यह घटना 15 नवंबर 2022 को मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के धारड़ गांव में हुई थी, जहां भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा के अनावरण के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
आरोप था कि आनंद राय ने एक सांसद, एक विधायक, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के वाहनों को रोक लिया था. विकास पारगी नाम के व्यक्ति की ओर से दर्ज प्राथमिकी में कहा गया था कि एक समूह ने करीब एक घंटे तक सड़क जाम कर दी, जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्रता की और रास्ता साफ कराने पहुंचे पुलिसकर्मियों से हाथापाई की.
प्राथमिकी में आनंद राय समेत लगभग 40 से 45 लोगों के नाम दर्ज थे. रतलाम के विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम) ने 18 मार्च, 2025 को राय के खिलाफ अभियोग तय किए थे. इससे पहले, 13 जनवरी, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आनंद राय को जमानत दे दी थी और बाद में एससी/एसटी अधिनियम के तहत जारी सुनवाई पर रोक लगा दी थी.
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