अब 5वीं और 8वीं क्लास की परीक्षा पास करना हुई जरूरी
सरकार शिक्षा के अधिकार कानून 2009 में संशोधन करके नो डिटेंशन पॉलिसी में सुधार करने जा रही है. संशोधन बिल के प्रावधानों के मुताबिक अब 5वीं और 8वीं क्लॉस के बच्चों को अगली क्लास में जाने के लिए परीक्षा में पास करना जरूरी होगा.

नई दिल्ली: अब 5 वीं और 8 वीं क्लास के बच्चों को अगली क्लास में जाने के लिए परीक्षा देना अनिवार्य होगा. इसके लिए सरकार शिक्षा के अधिकार क़ानून में संशोधन करने जा रही है. संशोधन बिल को कल मोदी कैबिनेट की मंज़ूरी मिल सकती है. मंज़ूरी मिलने के बाद बिल को इसी संत्र में पेश किया जाएगा.
सरकार शिक्षा के अधिकार कानून 2009 में संशोधन करके नो डिटेंशन पॉलिसी में सुधार करने जा रही है. संशोधन बिल के प्रावधानों के मुताबिक अब 5वीं और 8वीं क्लॉस के बच्चों को अगली क्लास में जाने के लिए परीक्षा में पास करना जरूरी होगा. जहां तक 5वीं में परीक्षा का सवाल है, ये तय करने का अधिकार राज्यों पर छोड़ा जाएगा कि परीक्षा स्कूल, ब्लॉक, जिला या राज्य स्तर पर लेनी है.
प्रावधान के मुताबिक अगर कोई बच्चा 5वीं में पहली बार फेल होता है तो तीन महीने बाद उसे पास करने का एक और मौका मिलेगा, इसमें भी फेल होने पर बच्चे को अगली क्लास में प्रमोशन नहीं मिल सकेगा. वहीं 8वीं क्लास की परीक्षा राज्य बोर्ड के स्तर पर करवाए जाने की संभावना है. इसमें भी छात्रों को पास करने के दो मौके दिए जाएंगे. दोनों में फेल होने पर उन्हें 9वीं क्लास में जगह नहीं मिल पाएगी.
नो डिटेंशन पॉलिसी शिक्षा के अधिकार कानून 2009 का एक अहम हिस्सा है लेकिन इस कानून के अस्तित्व में आने के कुछ दिनों बाद ही इस पॉलिसी को लेकर सवाल उठने लगे थे. दिल्ली समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार को इस पॉलिसी को ख़त्म करने का सुझाव दिया था. 2009 में कानून लागू होने के बाद ही इस पर शिक्षाविदों ने सवाल खड़े कर दिए. नतीजे के तौर पर जून 2012 में हुई केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर इसकी समीक्षा करने को कहा गया. उसके बाद एक उपसमिति बनायी गई जिसने अपनी रिपोर्ट अगस्त 2014 में सौंप दी.
इसके बाद अगस्त 2015 में शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में इस रिपोर्ट पर विचार किया गया जिसके बाद सभी राज्यों से राय मांगी गई. जिन 28 राज्यों ने अपनी राय दी उनमें से 23 राज्यों ने नो डिटेंशन पॉलिसी में बदलाव का सुझाव दिया. नो डिटेंशन पॉलिसी लागू होने के बाद से ही सिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, अब इस पॉलिसी में सुधार करके इस शिकायत को दूर करने की कोशिश है.























