एक्सप्लोरर

Explained: क्या सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने से CJP आंदोलन कमजोर होगा? एक्सपर्ट्स ने बताए ये तीन बड़े सिनेरियो

Sonam Wangchuk Breaks Fast: अगर CJP सिर्फ वांगचुक पर निर्भर होता, तो यह आंदोलन कमजोर था. लेकिन CJP ने एक 'मूवमेंट' बना लिया है, जो किसी एक व्यक्ति से परे है. अब CJP के युवा नेतृत्व पर निर्भर है.

24 जुलाई 2026 की आधई रात को सोनम वांगचुक ने 26 दिनों की भूख हड़ताल खत्म कर दी. मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अनशन तोड़ा. 28 जून 2026 को शुरू हुआ यह अनशन CJP के समर्थन में था, जिसकी सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी. लेकिन सवाल यह है कि क्या वांगचुक के अनशन तोड़ने से यह आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा...

CJP का साफ संदेश: 'अनशन खत्म, आंदोलन नहीं'

सबसे अहम बात यह है कि CJP ने खुद साफ कर दिया है कि वांगचुक के अनशन तोड़ने से आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने X पर पोस्ट करके कहा, 'CJP का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते.'

दीपके ने वांगचुक की सराहना करते हुए कहा, 'आपने अपनी जान की बाजी लगाकर पूरे देश की अंतरात्मा को जगाया.' लेकिन साथ ही यह भी कहा, 'हम सोनम सर के बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे.'

यानी CJP का रुख साफ है कि वांगचुक का अनशन एक प्रतीकात्मक हथियार था, लेकिन आंदोलन की जड़ें उससे कहीं गहरी हैं.

वांगचुक ने खुद क्यों तोड़ा अनशन?  

सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने की वजहें खुद बताईं. वांगचुक ने X पर लिखा, 'लंबी बातचीत और संभावित हिंसा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.' सोनम ने यह भी कहा कि 65 सांसदों ने उनसे अनशन तोड़ने की अपील की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वांगचुक को सेहत का ख्याल रखने की सलाह दी है. सरकार ने एंटी-पेपर लीक बिल संसद में पेश करने का ऐलान किया और शिक्षा सचिव को बर्खास्त कर दिया है.

हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि वांगचुक ने अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र नहीं किया है. वहीं CJP ने साफ कहा कि यह मांग नॉन-नेगोशिएबल है. यह फर्क बताता है कि वांगचुक और CJP की रणनीति में थोड़ा फर्क आया है, लेकिन मूल मांग वही है.

तो क्या पूरे मामले से आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा?

राजनीति के जानकारों का मानना है कि वांगचुक का अनशन इस आंदोलन की 'जान' था. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 59 साल के वांगचुक ने आंदोलन को ऊंचाई दी थी. वांगचुक के अनशन तोड़ने से आंदोलन का नैतिक पहलू कमजोर हो सकता है. हालांकि, अनशन के 26 दिनों में वांगचुक ने 8.5 किलो वजन गंवा दिया था. ऐसे में उनका स्वास्थ्य बचाना भी जरूरी था.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि वांगचुक का अनशन तोड़ना आंदोलन के लिए फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि अब आंदोलन का नेतृत्व पूरी तरह युवाओं के हाथों में आ गया है. CJP के 30 साल के संस्थापक अभिजीत दीपके और लाखों युवा अनुयायी अब खुद आंदोलन चला रहे हैं.

वहीं, एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि वांगचुक का अनशन एक 'एंट्री प्वाइंट' था. वांगचुक ने आंदोलन को राष्ट्रीय सुर्खियां दिलाईं. अब आंदोलन इतना बड़ा हो चुका है कि उसे किसी एक व्यक्ति की जरूरत नहीं है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि वांगचुक के अनशन तोड़ने से सरकार को राहत मिली है. PM मोदी ने खुद वांगचुक को स्वास्थ्य सलाह दी. सरकार ने एंटी-पेपर लीक बिल और शिक्षा सचिव की बर्खास्तगी जैसे कदम उठाकर आंदोलन को शांत करने की कोशिश की है.

आंदोलन की असली ताकत क्या है?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि CJP की असली ताकत वांगचुक नहीं, बल्कि युवाओं का गुस्सा और संगठनात्मक क्षमता है.

  • डिजिटल ताकत: CJP ने इंस्टाग्राम पर कुछ ही दिनों में 22 मिलियन फॉलोअर्स हासिल किए.
  • जमीनी ताकत: 20 जुलाई की 'संसद चलो' मार्च में हजारों युवा शामिल हुए.
  • देशव्यापी फैलाव: कोलकाता, रांची, पुणे और तिरुवनंतपुरम समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए.

रशीद किदवई के मुताबिक, इस आंदोलन की तीन बड़ी तस्वीरें सामने आ सकती हैं...

  • आंदोलन और तेज होगा: अगर 24 जुलाई के देशव्यापी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा उतरे, तो वांगचुक का अनशन तोड़ना आंदोलन को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत करेगा.
  • सरकार के साथ बातचीत: सरकार ने बिना शर्त चर्चा का ऑफर दिया है. वांगचुक के अनशन तोड़ने से बातचीत का रास्ता खुल सकता है.
  • आंदोलन का धीरे-धीरे कमजोर पड़ना: एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि वांगचुक के अनशन तोड़ने से आंदोलन को 'नैतिक झटका' लगा है. अगर सरकार कुछ और रियायतें देती है, तो युवाओं का गुस्सा शांत हो सकता है.

अगर CJP सिर्फ वांगचुक पर निर्भर होता, तो यह आंदोलन कमजोर था. लेकिन CJP ने एक 'मूवमेंट' बना लिया है, जो किसी एक व्यक्ति से परे है. हालांकि, वांगचुक के अनशन तोड़ने से आंदोलन का 'चेहरा' बदल गया है. अब CJP के युवा नेतृत्व पर निर्भर है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

'गरीबों को सम्मान देना असल मकसद', PM मोदी ने RBI के डेटा सेंटर का किया उद्घाटन
'गरीबों को सम्मान देना असल मकसद', PM मोदी ने RBI के डेटा सेंटर का किया उद्घाटन
'सारी मर्यादाएं...', खरगे के PM मोदी पर विवादित बयान पर अमित शाह का पलटवार
'सारी मर्यादाएं...', खरगे के PM मोदी पर विवादित बयान पर अमित शाह का पलटवार
बेंगलुरु ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: आतंकी साजिश नहीं ये थी वजह; 3 आरोपी गिरफ्तार
बेंगलुरु ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: आतंकी साजिश नहीं ये थी वजह; 3 आरोपी गिरफ्तार
डीके शिवकुमार की प्राइवेट कंपनियों को चेतावनी, बोले- 'कर्नाटक में कन्नड़ लोग ही...'
डीके शिवकुमार की प्राइवेट कंपनियों को चेतावनी, बोले- 'कर्नाटक में कन्नड़ लोग ही...'

वीडियोज

Sandeep Chaudhary: रामलीला मैदान रैली पर बवाल..लोकतंत्र का है सवाल? | Congress Rally | INDIA Bloc
PM Modi Varanasi Air Show: बनारस के नमो घाट से 'पावर शो' | Indian Air Force | UP
Congress Ramlila Maidan Rally: देश में त्योहार रैली पर तकरार! | Delhi News | Rahul Gandhi
Big Breaking | Anant Singh Expelled from JDU: पार्टी से बाहर होते ही क्या बोले अनंत सिंह? | ABP
Bareily Ke Bachchan: Sangam फंसी धर्मसंकट में! मस्ती के बीच Satluj-Nirgun में छिड़ी तगड़ी जंग!

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
इजरायल में चुनाव से पहले नेतन्याहू की ईरान को लेकर चेतावनी- 'परमाणु खतरा...'
इजरायल में चुनाव से पहले नेतन्याहू की ईरान को लेकर चेतावनी- 'परमाणु खतरा...'
'सम्मान में कमी न आए...' रामगोपाल यादव के अल्टीमेटम पर राजकुमार भाटी
'सम्मान में कमी न आए...' रामगोपाल यादव के अल्टीमेटम पर राजकुमार भाटी
दीप्ति शर्मा ने शतक लगाकर रचा इतिहास, ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी!
दीप्ति शर्मा ने शतक लगाकर रचा इतिहास, ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी!
जलसा के बाहर हैवी सिक्योरिटी का इंतजाम, धमकी के बीच फैंस से यूं मिले अमिताभ बच्चन
जलसा के बाहर हैवी सिक्योरिटी का इंतजाम, धमकी के बीच फैंस से यूं मिले अमिताभ बच्चन
'मोदी का बाप भी जाएगा', प्रधानमंत्री पर खरगे का विवादित बयान, कार्यक्रम में हंगामा
'मोदी का बाप भी जाएगा', प्रधानमंत्री पर खरगे का विवादित बयान, कार्यक्रम में हंगामा
डीके शिवकुमार की प्राइवेट कंपनियों को चेतावनी, बोले- 'कर्नाटक में कन्नड़ लोग ही...'
डीके शिवकुमार की प्राइवेट कंपनियों को चेतावनी, बोले- 'कर्नाटक में कन्नड़ लोग ही...'
हाईवे पर इमरजेंसी में नहीं लग रहा 1033, तुरंत करें ये काम
हाईवे पर इमरजेंसी में नहीं लग रहा 1033, तुरंत करें ये काम
घर में नहीं है किचन गार्डन की जगह, जानें कैसे किराए पर उगाएं ताजी सब्जियां?
घर में नहीं है किचन गार्डन की जगह, जानें कैसे किराए पर उगाएं ताजी सब्जियां?
Embed widget