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सिया और सोनम, दो वारदात और तरीका एक…, क्या बच जाएगी केतन अग्रवाल की कातिल?

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि सोनम रघुवंशी को जमानत मिली है तो सिया को भी मिल जाएगी.

Ketan Pune Murder Case: क्या केतन हत्याकांड की मुख्य आरोपी सिया बच जाएगी? यह सवाल इन दिनों हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत से जमानत मिल चुकी है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित केतन अग्रवाल हत्याकांड में भी मुख्य आरोपी सिया को भविष्य में राहत मिल सकती है.

हालांकि कानूनी जानकारों का कहना है कि दोनों मामलों की परिस्थितियां और उपलब्ध साक्ष्य अलग-अलग हैं, इसलिए किसी एक मामले के आधार पर दूसरे का नतीजा तय नहीं किया जा सकता. पिछले साल इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने शिलॉन्ग गए थे, जहां दोनों रहस्यमय तरीके से लापता हो गए. बाद में राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ, जबकि सोनम रघुवंशी सामने आई.

एक जैसी दो वारदात

जांच में आरोप लगा कि सोनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से पति की हत्या की साजिश रची थी. अदालत में मामला पहुंचा और 27 अप्रैल को निचली अदालत ने सोनम को जमानत दे दी. इस जमानत को रद्द कराने के लिए शिलॉन्ग पुलिस हाईकोर्ट पहुंची, लेकिन हाईकोर्ट ने भी जमानत बरकरार रखते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया और आरोपी को गिरफ्तारी के आधार प्रभावी तरीके से नहीं बताए गए. अब इस फैसले को चुनौती देने के लिए पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है.

सोनम को मिली जमानत के बाद अब केतन अग्रवाल हत्याकांड की तुलना उससे की जा रही है. पुणे निवासी 26 वर्षीय केतन अग्रवाल और सिया की शादी नवंबर में होने वाली थी. 7 मई को दोनों का प्री-वेडिंग समारोह हुआ था, जिसकी तस्वीरों और वीडियो में दोनों परिवार बेहद खुश नजर आ रहे थे. केतन के पिता विशाल अग्रवाल बेटे की शादी की खुशी में डांस कर रहे थे, जबकि सिया के माता-पिता भी पूरे समारोह में शामिल थे. इन तस्वीरों में कहीं भी किसी प्रकार के तनाव या रिश्ते में दरार के संकेत दिखाई नहीं देते. ठीक इसी तरह सोनम रघुवंशी की शादी की तस्वीरों में भी वह खुश नजर आई थी, लेकिन बाद में उस पर पति की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा. इसी समानता के चलते दोनों मामलों की तुलना की जा रही है.

जांच के मुताबिक 18 जून को सिया अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को लोनावला स्थित करीब दो हजार साल पुराने लोहगढ़ किले पर घूमने के लिए लेकर गई थी. आरोप है कि पहले से वहां मौजूद उसके प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर सिया ने केतन को लगभग 350 फीट गहरी खाई में धक्का देकर उसकी हत्या कर दी. पुलिस का दावा है कि हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी और इसके लिए पहले से संकेत तय किए गए थे. जांच एजेंसियों के अनुसार सिया को किसी और से प्रेम था और उसी रिश्ते के चलते उसने अपने मंगेतर को रास्ते से हटाने की साजिश रची.

कई बार सीन रिक्रिएट

पुलिस ने मामले की जांच को मजबूत करने के लिए कई बार घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट किया है. सिया और चेतन दोनों को अलग-अलग लोहगढ़ किले पर ले जाकर घटनाक्रम दोहराने के लिए कहा गया. जांच के दौरान पुलिस ने केतन की लंबाई और वजन के अनुरूप एक डमी तैयार कर उसे उसी स्थान से नीचे गिराकर यह समझने की कोशिश की कि घटना किस प्रकार हुई होगी. इस परीक्षण के दौरान डमी के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने से पुलिस ने घटना की गंभीरता का आकलन किया. जांच की सबसे अहम कड़ी घटनास्थल के पास मिला सीसीटीवी फुटेज है. इस फुटेज में सीढ़ियों पर हुडी पहनकर और चेहरा ढके हुए एक व्यक्ति दिखाई देता है. पुलिस का दावा है कि यह व्यक्ति चेतन चौधरी है, जो सिया और केतन के पीछे-पीछे किले तक पहुंचा था.

हालांकि चेतन अपने साथ मोबाइल फोन लेकर नहीं गया था, जिससे उसकी लोकेशन या डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध नहीं हो सके. इसी वजह से पुलिस ने चेतन को दोबारा घटनास्थल पर ले जाकर उसकी चाल और बॉडी लैंग्वेज रिकॉर्ड की. अब इस रिकॉर्डिंग की तुलना सीसीटीवी फुटेज से की जा रही है. इस प्रक्रिया को 'गेट एनालिसिस' कहा जाता है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी संदिग्ध की पहचान स्पष्ट नहीं होती. पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना वाले दिन चेतन पहले से किले पर मौजूद था और एक मंदिर के पास लगभग 45 मिनट तक छिपकर बैठा रहा.

आरोप है कि सिया ने पहले से तय संकेत दिया, जिसके बाद चेतन बाहर निकला और दोनों ने मिलकर केतन को खाई में धक्का दिया. पुलिस का कहना है कि यह मंदिर घटनास्थल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित है. हालांकि अब तक पुलिस के पास हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और न ही किसी कैमरे में धक्का देने की घटना रिकॉर्ड हुई है. पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. बचाव पक्ष का दावा है कि पुलिस के पास ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि सिया और चेतन ने मिलकर हत्या की साजिश रची. उनका कहना है कि शुरुआत में इस मामले को दुर्घटना माना गया था और बाद में इसे हत्या में बदल दिया गया. बचाव पक्ष अदालत में इसी आधार पर पुलिस की जांच पर सवाल उठाने की तैयारी कर रहा है. पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान सिया और चेतन ने एक-दूसरे पर केतन को धक्का देने का आरोप लगाया है.

हालांकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार पुलिस हिरासत में दिया गया आरोपी का इकबालिया बयान अपने आप में अदालत में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जाता. इसलिए पुलिस अन्य स्वतंत्र साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है. जांच में सामने आया है कि घटना के बाद सिया ने शोर मचाकर लोगों को बुलाया था. किले का सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचा, लेकिन उसने अपने बयान में कहा कि सिया उस समय सामान्य दिख रही थी और बेहद घबराई हुई नहीं लग रही थी. पुलिस इस बयान को भी परिस्थितिजन्य साक्ष्य के रूप में देख रही है. पुलिस ने सिया और चेतन के रिश्ते से जुड़े कई अहम तथ्य भी जुटाए हैं. जांच में सामने आया कि दोनों की पहली मुलाकात क्रिकेट मैचों के दौरान हुई थी. सिया का भाई साहिल और चेतन एक ही क्रिकेट लीग में खेलते थे. पुलिस को मार्केट यार्ड फ्रेंड्स क्रिकेट लीग के पुराने वीडियो मिले हैं, जिनमें चेतन मैदान पर खेलते हुए और सिया स्टेडियम में मौजूद दिखाई देती है.

डिजिटल सबूत से बेनकाब

इसके अलावा हत्या से एक दिन पहले यानी 17 जून की कैफे की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें सिया और चेतन साथ नजर आए थे. सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों में कॉल रिकॉर्ड शामिल हैं. पुलिस के अनुसार 1 जनवरी से 18 जून के बीच सिया और चेतन के बीच कुल 2004 फोन कॉल हुए और दोनों ने लगभग 238 घंटे बातचीत की. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह लगातार संपर्क उनके रिश्ते और कथित साजिश की ओर इशारा करता है. जांच में यह भी सामने आया कि जून के पहले सप्ताह में सिया और केतन प्री-वेडिंग शूट के लिए बाली जाने वाले थे, लेकिन केतन का पासपोर्ट रहस्यमय तरीके से गायब हो गया. मुंबई एयरपोर्ट तक दोनों को ले जाने वाले कैब ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि सिया बाली जाने के पक्ष में नहीं थी.

रास्ते में उसका अपने भाई साहिल से विवाद भी हुआ था. ड्राइवर ने यह भी बताया कि रास्ते में एक फूड कोर्ट पर रुकने के दौरान सिया बहाने से कार तक आई और कुछ सामान लेकर वापस चली गई. पुलिस को संदेह है कि उसी दौरान केतन का पासपोर्ट गायब किया गया था. इस पहलू की भी जांच जारी है. मामले में पुलिस कैब ड्राइवर, सुरक्षा गार्ड, परिवार के सदस्यों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज कर रही है. साथ ही डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, गेट एनालिसिस, घटनास्थल का वैज्ञानिक परीक्षण और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर आरोपपत्र को मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है.

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि सोनम रघुवंशी को जमानत मिली है तो सिया को भी मिल जाएगी. वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि यदि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला अदालत में बिना किसी टूट के स्थापित हो जाती है, तो ऐसे मामलों में भी दोष सिद्ध किया जा सकता है. वहीं यदि जांच में गंभीर कानूनी खामियां या साक्ष्यों की कमी पाई जाती है तो आरोपी को जमानत मिलना संभव हो सकता है. इसलिए केतन अग्रवाल हत्याकांड में सिया का भविष्य पूरी तरह पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत में उनकी कानूनी स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा.

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राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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