देश के 10 राज्यों में खुले स्कूल, अभिभावकों ने सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा
देश के कुछ राज्यों में स्कूल खोल दिए गए है, लेकिन बच्चे कोरोना के डर के चलते स्कूल बहुत कम संख्या में पहुंचे है. अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के साथ-साथ परिवार भी खतरे में है. सरकार एक बार और सोच विचार करें.

श्रीनगर: देश के दस राज्यों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर में भी आज से स्कूल खोले गए. जिस के चलते एक बार फिर से स्कूलू के दरवाजे खुल गए. लेकिन स्कूल सिर्फ 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए खोले गए है और अटेंडेंस अनिवार्य नहीं है. आज पहले दिन बहुत कम संख्या में बच्चे स्कूल आये और जो पहुंचे वह काफी डर के साथ आये.
स्कूल खोलने के लिए प्रदेश शिक्षा विभाग की तरफ से काफी जायदा दिशा निर्देश जारी किये गए है. प्रतेक दिन केवल 50% शिक्षक स्कूल आएंगे और स्कूल में कोई भी क्लास नहीं लगेगी. केवल शिक्षकों से मिल कर पढ़ाई के बारे में शंकाए दूर करने की सुविधा होगी. इस बात से बच्चे परेशान है - उनका कहना है कि अगर स्कूल खोल कर भी शिक्षा नहीं मिलेगी तो ऑनलाइन क्लास तो चल ही रहीं थी.
लेकिन कश्मीर में जारी हाई स्पीड इंटरनेट पर प्रतिबंध से ऑनलाइन क्लास में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. और बच्चे कोरोना संक्रमण के बड़ते आंकड़ो में स्कूल खोलने के फैसले पर सवाल उठा रहे है. श्रीनगर के राजबाग़ के सरकार उच्चतर माध्यमिक स्कूल की छात्र अलिया के अनुसार अगर स्कूल खोले गए है तो क्लास भी होनी चाहिए थी लेकिन सरकार कुछ और ही कर रही है. और हम को ऐसे में स्कूल आने से डर लग रहा है.
11वीं की छात्र इकरा जावेद के अनुसार वह ऑनलाइन क्लास से ही खुश है और कोरोना के बीच हर दिन स्कूल आना, क्लास देना और फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आना जाना खतरे से खाली नहीं. लेकिन 2G के चलते वह ऑनलाइन क्लास भी अच्छे से नहीं दे पाती इसलिए स्कूल आना चाहती थी.
लेकिन शिक्षा विभाग की तरफ से कल देर शाम जारी आदेश में कोरोना संक्रमण होने की सूरत में स्कूलों को किसी भी ज़िम्मेदारी से आज़ाद किया गया. एक फॉर्म के ज़रिये अभिभावकों से बच्चो के स्कूल आने की रजामंदी, उन के लिए सेनीटाइजर और एसी सुविधाएं देने और बच्चों के संक्रमण के शिकार होने पर जिमेदारी अभिभावकों की होगी यह लिखा गया है.
इकरा के पिता जावेद अहमद के अनुसार सरकार के स्कूल खोलने के फैसला पर फिर से पुनर्विचार होना चाहिए. क्योकि इस हाल में बच्चो के साथ-साथ पूरे परिवारों को भी खतरा है. इस बात से अभिभावक खास नाराज़ है और सरकार को इन फैसले पर एक बार और विचार करने की मांग कर रहे है.
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