रोमिला थापर सीवी विवाद पर शशि थरूर का तंज, कहा- JNU के नए प्रशासन को शिक्षा के बारे में समझ नहीं
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रशासन पर तंज करते हुए कहा कि जेएनयू के नए प्रबंधन को शिक्षा के बारे में कुछ पता नहीं है. उन्होंने ये बयान यूनिवर्सिटी द्वारा रोमिला थापर को बायोडेटा जमा करने के पत्र के विषय में दिया है.

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने गुरुवार को कहा कि जेएनयू के नए प्रबंधन को शिक्षा के बारे में कुछ पता नहीं है. जानीमानी इतिहासकार रोमिला थापर को अपना बायोडेटा जमा करने के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी द्वारा एक पत्र भेजे जाने के विषय में उन्होंने ये बयान दिया. उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी लोगों को प्रोफेसर एमिरट्स का दर्जा देते हैं ताकि खुद का सम्मान कर सकें.
थरूर ने कहा, "जब कोई प्रोफेसर रिटायर होता है या रिटायर होने की उम्र तक पहुंचता है तो यूनिवर्सिटी उस व्यक्ति के साथ अपना संबंध खत्म नहीं करना चाहता. ऐसे में ऐमिरट्स का दर्जा दिया जाता है." उन्होंने कहा, "यह मामला दोतरफा होता है. प्रोफेसर का संस्थान से संबंध होता है, लेकिन उसकी कोई बाध्यता नहीं होती. दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी की भी कोई बाध्यता नहीं होती, उसे वेतन नहीं देना होता लेकिन उसके साथ संबंधित व्यक्ति का नाम जुड़ा होता है. इससे यूनिवर्सिटी को एक तरह से विश्वसनीयता भी मिलती है."
कांग्रेस सांसद ने कहा, "स्पष्ट है कि जेएनयू के नए प्रबंधन को इस बारे में कुछ समझ नहीं है. इस संस्थान को फिलहाल चला रहे लोगों को शिक्षा के बारे में कोई समझ नहीं है." गौरतलब है कि हाल ही में प्रोफेसर एमिरेट्स रोमिला थापर को अपना बायोडेटा जमा करने के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी द्वारा एक पत्र भेजे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया.
यूनिवर्सिटी ने बुधवार को कहा कि एक प्रोफेसर एमेरिट्स के नाम का इस्तेमाल कर प्रशासनिक सुधारों और नियमों के प्रयोग को बदनाम करने के लिए दुर्भावनापूर्ण अभियान शुरू किया गया है. साथ ही, यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा कि इसके जरिए किसी प्राध्यापक को निशाना नहीं बनाया गया है.
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