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गंगा किनारे दबी इन लाशों के लिए आखिर कौन है जिम्मेदार?

कोरोना से जारी कहर के बीच गंगा किनारे बालू रेत में दफन किये गए शवों की तस्वीरें सामने आई है. इसको लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

नई दिल्लीः कोरोना से हुई मौतों के बाद जिस तरह से लोग नदियों में ही बड़ी संख्या में शव को प्रवाहित कर रहे हैं, वे सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए भी एक तमाचा है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में गंगा किनारे बालू रेत में दफन किये गए शवों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे तो और भी दिल दहलाने वाली हैं. कोई सोच भी नहीं सकता था कि पावन गंगा का तट एक दिन कब्रिस्तान में इस तरह से तब्दील हो जायेगा. दरअसल, ये हिंदुस्तान के हक़ीक़त की वो तस्वीर है, जो इंसान की उस मजबूरी को बयां करती है कि मरने के बाद उसे अपने धर्म के मुताबिक अंतिम संस्कार तक भी नसीब नहीं होगा.

सवाल उठता है कि इन लाशों की ऐसी दुर्दशा करने की ऐसी नौबत ही क्यों आई और इसके लिए क्या सरकार के साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं व संगठनों के ठेकेदार भी जिम्मेदार नहीं है? अधिकांश शव ऐसे गरीब परिवारों के परिजनों के हैं जिनके पास इस माहौल में दो वक्त के खाने का जुगाड़ तक नहीं है, तो वे शव के अंतिम संस्कार के लिए 12-15 हजार रुपये भला कहां से लाते. सो,उन्हें हिन्दू परंपरा को छोड़कर शव को रेती में दफनाने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस घटना से उन लोगों को सबक लेना चाहिए जो हिंदू संस्कृति की रक्षा करने और असहाय, गरीबों की मदद करने का दम भरते हैं.

माना कि ऐसे मौकों पर प्रशासन तो कुम्भकर्णी नींद से तभी जागता है, जब ऐसी घटना मीडिया की सुर्खी बनती है लेकिन इतनी सारी स्वयंसेवी संस्थाओं व तमाम हिंदू संगठनों के होते हुए किसी एक ने भी इन शवों का सम्मानपूर्वक व रीति- रिवाज से अंतिम संस्कार करने की पहल आख़िर क्यों नहीं की?

प्रयागराज जिले में गंगा किनारे जब हवा चलने से रेत हटी तो बालू में दफन किए गए शव दिखने लगे. पता लगा कि वहां सैकड़ों की संख्या में शव दफनाए गए थे. शुरुआती छानबीन में पता लगा है कि लकड़ी और धन की कमी के कारण इन शवों को यहां दफन किया गया था. जरा सोचिये, अगर और दो-चार दिन तेज हवा न चलती, तो शायद यह अभी भी रहस्य ही बना रहता.

बताते हैं कि पिछले दिनों गंगा, यमुना और रामगंगा नदी में बड़ी संख्या में शवों को उतराते हुए स्थानीय लोगों ने देखा भी था. हालांकि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने नदियों में शव बहाने पर पाबंदी लगा रखी है, इसलिये ये हैरानी का विषय है कि इतनी बड़ी संख्या में नदी के किनारे शव लाये गए और प्रशासन के किसी एक कारिंदे को इसकी कानोकान भनक तक नहीं लगी.

बताते हैं कि स्थानीय मीडिया के कुछ लोगों ने प्रशासन का ध्यान भी दिलाया कि लोग प्रयागराज में संगम के किनारे रेत में शव को दफना रहे हैं. पहले तो प्रशासन ने इस मामले को नकार दिया लेकिन जब फाफामऊ के पास बड़ी संख्या में रेत के नीचे दफनाए गए शवों का खुलासा हुआ,तब वह हरकत में आया. अब यूपी सरकार के निर्देश के बाद प्रयागराज पुलिस ने भी नदियों के किनारे गोताखोरों की टीम लगा दी है.

साथ ही जल पुलिस ने भी नदियों में लगातार अपनी निगरानी बढ़ा दी है. नाविकों को भी तमाम जगहों पर तैनात किया गया है ताकि कोई शव प्रवाहित न कर सके. अब नदी किनारे कई जगह पर NDRF की टीमें भी तैनात होने लगी हैं.लेकिन तमाम पापों को धोने वाली गंगा के पास भी रेत में दबी उन लाशों के इस सवाल का जवाब शायद ही होगा कि "कोरोना से मारहमारा कसूर क्या था जो हमें सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार भी नसीब न हो पाया?"

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