'देश ने नाराज फूफाओं को...', SRCC से PM मोदी का विपक्ष पर निशाना
SRCC के शताब्दी समारोह में PM नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर 'नाराज फूफा' वाला तंज कसा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग हर नए काम पर पूछते हैं- इसकी क्या जरूरत है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (5 सितंबर 2026) को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया. अपने संबोधन में उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए उन्हें नाराज फूफा करार दे दिया. उन्होंने कहा, ''देश में दूसरी प्रजाति उनलोगों की है जो कोई भी काम शुरू होने पर नाराज फूफा बन जाते हैं. उनका फेवरेट काम होता है हर काम का विरोध करना. इनका एक ही डायलॉग होता है. इसकी क्या जरूरत है. ये हर फूफा का परमानेंट डायलॉग होता है. पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू बना रहे थे तो फूफा जी ने कमर कस ली कहा इसकी जरूरत ही क्या है. ''
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि हमने हाईस्पीड ट्रेन पर काम शुरू किया तो फूफा जी फिर बोला इसकी जरूरत ही क्या है. हम यूपीआई लेकर आए तो यही फूफा लोगों कहते थे इसकी जरूरत ही क्या है. हमने चिप बनाने की बात की तो कहा गया जरूरत ही क्या है. हमने नई पर्लियामेंट बिल्डिंग बनाई तो फिर कहने लगे इसकी जरूरत ही क्या है.
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— ABP News (@ABPNews) September 5, 2026
अरुण जेटली और संजीव सान्याल का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को भी याद किया. उन्होंने बताया कि जेटली SRCC के पूर्व छात्र थे और मुलाकातों के दौरान अक्सर अपने कॉलेज के दिनों की बातें साझा किया करते थे. PM मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जेटली कई बार एक ही किस्सा उन्हें बार-बार सुनाते थे. उन्होंने अपनी टीम के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल का भी उल्लेख किया और बताया कि वह भी SRCC से पढ़े हैं. SRCC की उपलब्धियों पर प्रधानमंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा, “धुरंधर न हों, लेकिन धूम तो मचाई है.”
2013 के पुराने भाषण की चर्चा का भी जिक्र
PM मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनके 2013 के SRCC भाषण की चर्चा फिर से हो रही है. उन्होंने कहा कि लोगों ने उस पुराने भाषण को दोबारा सुना और पढ़ा है और नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसमें कही गई बातों पर ध्यान दिया है. प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उस समय दिए गए भाषण का असर आज भी महसूस किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि करीब 13-14 साल बाद भी उस भाषण को याद किया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण है.

















