मनी लांड्रिंग का आरोपी जिग्नेश भजियावाला कुछ ऐसे करता था काले को सफेद!

नई दिल्ली: अगर आप अपना बैंक खाता खुलवाने के दौरान अपनी आईडी बैंक में जमा कराने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि आपकी आईडी का दुरूपयोग भी हो सकता है. सूरत मे मनी लांड्रिंग के आरोप में पकड़े गए जिग्नेश भजियावाला और उसके सहयोगियों ने बैंक में जमा कराए गए 1000 आईडी कार्ड्स की मदद से नोटबंदी के दौरान करोड़ों रुपए का काला धन सफेद करा लिया था. जिग्नेश भजियावाला को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया है. अब ईडी जानना चाहता है कि उसके इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल थे और किस-किस बैंक या आर्थिक संस्थान से उसने ये पहचान पत्र इकट्टे किए थे. सूरत का मशहूर व्यवसायी जिग्नेश किशोरभाई भजियावाला नोटबंदी के दौरान काले को सफेद करने को लेकर सुर्खियों में आया था. नोटबंदी के दौरान जांच एजेंसियों को भजियावाले के यहां से छापे के दौरान एक करोड़ दो लाख रुपये से ज्यादा के नए नोटो में मिले थे. आरंभिक जांच के दौरान यह भी पता चला था कि उसके यहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने वाली लाइनों में खडे थे. सूरत के इस भजियावाले के खिलाफ दिसबंर 2016 में पहले सीबीआई ने और फिर ईडी ने मुकदमा दर्ज किया था और इस मामले की जांच के दौरान कई बड़े खुलासे हुए थे. जांच एजेंसिया परेशान थी कि एक तरफ लोगों को दो हजार और चार हजार रुपये नही मिल रहे है और ऐसे में भजिया वाले के पास करोड़ों रुपये के नए नोट कहां से आए जांच के दौरान पता चला कि इस मामले मे अनेक ऐसे लोगों की आईडी नए नोटो को निकालने में प्रयोग की गई है जिन्होने बैंक खाता खुलवाने के लिए अपने पहचान पत्र बैंको या अन्य जगहों पर दिए थे.
सूत्रो के मुताबिक यह भी पता चला था कि सूरत पीपुल्स कोआपरेटिव बैंक के मैनेजर पंकज भट्ट भी भजियावाले के गोरखधंधे में शामिल था. जांच एजेंसियों को पता चला कि सूरत पीपुल्स कोआपेरेटिव बैंक में काफी लोगों ने बैंक खाता खुलवाने के दौरान अपने पहचान पत्र जमा कराए थे वो पूरी फाइल पंकज भट्ट ने भजियावाले को दे दी थी और भजियावाले ने ये पूरी फाइल बैंक से बाहर ले जा कर फोटो कापी करा ली थी और उन पहचान पत्रों के आधार पर बैको से नए नोट निकाले जा रहे थे. ईडी सूत्रो के मुताबिक अब तक की जांच के दौरान ऐसे दो सौ पहचान पत्रो का पता चल चुका है जबकि भजियावाले ने लगभग एक हजार पहचान पत्र जमा किए थे जांच की जा रही है कि इन पहचान पत्रों को कहां कहां से इक्ट्ठा किया गया है और कहां-कहां इन का इस्तेमाल किया गया है. ईडी को शक है कि ये पहचानपत्र कई जगहों से जमा किए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक ईडी जानना चाहता है कि ये पैसा केवल भजियावाले का ही था या इसमें कुछ और लोगो का भी पैसा शामिल था. इस मामले की आंरभिक जांच के दौरान पता चला था कि भजियावाले के पास लगभग चार सौ करोड रुपये की संपत्ति है. भजियावाले के पास बेनामी लॉकर भी पाए गए है जिसमें उसने अपना पैसा छुपा कर रखा हुआ था. भजियावाले की काली कमाई कितनी थी ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन अभी तक की जांच के दौरान पता चला है कि भजियावाला काली कमाई के दलदल में गले तक डूबा हुआ था इस मामले में जल्द ही कुछ और लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है.
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