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गलवान में चीनी सैनिकों से झड़प के बंद हो गई थी मोबाइल सर्विस, अब फिर पहुंची 4G-5G कनेक्टिविटी, वीडियो कॉल कर पाएंगे जवान

गलवान घाटी और सियाचिन ग्लेशियर जैसी दुर्गम जगहों पर 5जी कनेक्टिविटी शुरू हो गई है. यह पहल भारतीय सेना ने की है. इससे सैनिकों और दूर दराज में रहने वाले ग्रामिणों को बड़ा फायदा पहुंचेगा.

5G Connectivity in galwan Valley: गलवान घाटी और सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुनिया के सबसे और ऊंचे और दुर्गम रणक्षेत्र में अब 5जी कनेक्टिविटी मिलनी शुरु हो गई है. भारतीय सेना ने दूरस्थ सीमा गांवों को सशक्त बनाने के लिए ये सुविधा प्रदान पूर्वी लद्दाख, पश्चिमी लद्दाख और सियाचिन ग्लेशियर के फॉरवर्ड लोकेशन में मुहैया कराई गई है.

भारतीय सेना के मुताबिक, पहली बार, दुनिया के कुछ सबसे दुर्गम इलाकों जैसे दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ), गलवान, डेमचोक, चुमार, बटालिक, द्रास और सियाचिन ग्लेशियर में तैनात सैनिकों के पास अब विश्वसनीय 4जी और 5जी मोबाइल कनेक्टिविटी तक पहुंच है. इस सुविधा को भारतीय सेना की लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी (14वीं) कोर ने करके दिखाया है.


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सैनिकों का बढ़ेगा मनोबल

यह पहल उन सैनिकों के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली साबित हुई है, जो 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित अलग-अलग शीतकालीन कट-ऑफ पोस्टों पर तैनात हैं, जिससे वे अपने परिवार और प्रियजनों के साथ जुड़े रह सकते हैं. खास बात ये है कि साल 2020 में चीन के साथ हुई गलवान घाटी की झड़प के दौरान पूर्वी लद्दाख में मोबाइल कनेक्टिविटी को पूरी तरह बंद कर दिया गया था. सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा किया गया था लेकिन पिछले साल अक्टूबर में चीन के साथ हुए डिसएंगेजमेंट समझौते के बाद से पूर्वी लद्दाख से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति स्थिर है. ऐसे में सेना ने एलएसी की फॉरवर्ड लोकेशन में 4जी और 5जी सुविधा शुरु कर दी है.


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इस पहल के क्या हैं फायदे?

  • डिजिटल विभाजन को पाटना: दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब डिजिटल सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो गई है.
  • स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना: मोबाइल कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा.
  • सीमा पर्यटन को बढ़ावा देना: मोबाइल कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.
  • चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाओं में सुधार: मोबाइल कनेक्टिविटी से चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाओं में सुधार होगा.
  • शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना: मोबाइल कनेक्टिविटी से शिक्षा तक पहुंच बढ़ेगी और छात्रों को ऑनलाइन संसाधनों का लाभ मिलेगा.
  • स्थानीय वाणिज्य को मजबूत करना: मोबाइल कनेक्टिविटी से स्थानीय वाणिज्य को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: मोबाइल कनेक्टिविटी से सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करने में मदद मिलेगी.
  • सीमा गांवों से पलायन रोकना: मोबाइल कनेक्टिविटी से सीमा गांवों से पलायन रोकने में मदद मिलेगी.


गलवान में चीनी सैनिकों से झड़प के बंद हो गई थी मोबाइल सर्विस, अब फिर पहुंची 4G-5G कनेक्टिविटी, वीडियो कॉल कर पाएंगे जवान

सियाचिन ग्लेशियर पर 5जी मोबाइल टावर की स्थापना एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. यह पहल भारत की तकनीकी क्षमता और संकल्प को प्रदर्शित करती है. स्थानीय आबादी ने इस पहल का स्वागत अत्यधिक आभार के साथ किया है. मोबाइल कनेक्टिविटी अब दूरस्थ समुदायों के लिए एक जीवन रेखा है, जो समावेश, अवसर और गरिमा को बढ़ावा देती है.


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 भारतीय सेना की दूरदर्शी पहल

यह पहल राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति भारतीय सेना की स्थायी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो विकसित भारत– भारत@2047 की भावना को प्रतिध्वनित करती है.

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नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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