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मजदूरों का पलायन जारी, केंद्र ने राज्यों से प्रवासी श्रमिकों के लिए और अधिक विशेष ट्रेनें चलाने को कहा

केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वह प्रवासी मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए रेलवे के साथ करीबी समन्वय कर और विशेष रेलगाड़ियां चलाए.

नई दिल्ली: लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों का पैदल ही पलायन जारी है. इस बीच केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रवासी मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए रेलवे के साथ करीबी समन्वय कर और विशेष रेलगाड़ियां चलाने को कहा है. साथ ही कहा है कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखा जाए. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ट्रेन से प्रवासी मजदूरों की आवाजाही के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी मंगलवार को जारी की.

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रशासनों को भेजे पत्र में कहा, ‘‘प्रवासी मजदूरों की चिंताओं को दूर करने के क्रम में, अगर निम्न कदमों को लागू किया जाता है तो मैं आभारी रहूंगा.” गृह सचिव ने सुझाव दिया कि राज्यों एवं रेल मंत्रालय के बीच सक्रिय समन्वय के माध्यम से और विशेष रेलगाड़ियों का प्रबंध किया जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि साफ-सफाई, भोजन एवं स्वास्थ्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ठहरने की जगहों की भी व्यवस्था की जानी चाहिए. भल्ला ने कहा कि बसों एवं ट्रेनों के प्रस्थान के बारे में और अधिक स्पष्टता होनी चाहिए क्योंकि स्पष्टता के अभाव में और अफवाहों के चलते श्रमिकों में बेचैनी देखी गई है. प्रवासी श्रमिकों के बीच महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की खास जरूरतों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी पैदल चल रहे मजदूरों को ठहरने के निर्धारित स्थानों पर या परिवहन के माध्यम उपलब्ध कराकर पास के बस अड्डे या रेलवे स्टेशन तक भेज सकते हैं, प्रवासियों के पते एवं फोन नंबर लिखें जो कि आगे संपर्कों का पता लगाने में मददगार साबित हो सकते हैं तथा ठहरने के स्थानों पर एनजीओ के प्रतिनिधियों को काम पर लगाया जा सकता है.

भल्ला ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों या एनजीओ कर्मियों द्वारा ठहरने के स्थान पर लंबे समय तक पृथक-वास के लिए रोके जाने संबंधी धारणा को खत्म करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. प्रवासियों के परिवहन के लिए बसों की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया.

गृह सचिव ने कहा कि इसके अलावा अंतरराज्यीय सीमा पर प्रवासी मजदूरों को ले जा रही बसों को जाने की अनुमति दी जाए, श्रमिक जहां हैं उन्हें वहीं रोकने के लिए खाने, स्वास्थ्य सुविधाओं एवं काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए. उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रशासनिक अधिकारियों को जहां जरूरत हो, वहां रेलवे से और ट्रेनें चलाने का अनुरोध करने का निर्देश देने को कहा और यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी प्रवासी मजदूर को अपने गंतव्य तक पहुचंने के लिए सड़कों या रेल की पटरियों पर पैदल न चलना पड़े.

रेलवे का बयान रेलवे ने कहा कि श्रमिक विशेष ट्रेनों के परिचालन के लिए गंतव्य राज्यों की सहमति की जरूरत नहीं है. रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेई ने कहा, ‘‘श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए उन राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है जहां यात्रा समाप्त होनी है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘नई एसओपी के बाद उस राज्य की सहमति लेना अब आवश्यक नहीं है जहां ट्रेन का समापन होना है.’’ रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ इन ट्रेनों को मंजूरी देने के मामले में पीछे हैं.

गौरतलब है कि गत एक मई से रेलवे ने 1,565 प्रवासी श्रमिक ट्रेनों का परिचालन किया है और 20 लाख से अधिक प्रवासियों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाया है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट में कहा कि उत्तर प्रदेश ने 837, बिहार ने 428 और मध्य प्रदेश ने सौ से अधिक ट्रेनों को अनुमति दी. सोमवार रात तक 162 ट्रेन रास्ते में थीं और 1,252 अपने गंतव्य पर पहुंच चुकी थीं. रेलवे ने कहा कि लगभग 116 और ट्रेन चलाए जाने की प्रक्रिया में हैं.

मंत्री ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे द्वारा 20 लाख से अधिक कामगारों को 1,565 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर उनके घर भेजा जा चुका है.” सोमवार रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार गुजरात से 496 से अधिक ट्रेन चलाई गईं तथा 17 और चलाए जाने की प्रक्रिया में हैं.

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