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Bullet Train: महाराष्ट्र की नई सरकार क्या बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को दे पाएगी रफ्तार ?

Bullet Train Vs Maharashtra Government: महाराष्ट्र में सत्ता बदलने के बाद यहां बुलेट ट्रेन के दिन भी बहुर सकते हैं. इस पर कयास लगाए जा रहे हैं क्योंकि अब दोनों जगह बीजेपी की सरकार सत्तासीन है.

Bullet Train Vs Maharashtra Government: : महाराष्ट्र में सत्ता बदलने के बाद यहां बुलेट ट्रेन (Bullet Train) के दिन भी बहुरने के कयास लगाए जा रहे हैं क्योंकि केंद्र और यहां दोनों जगह बीजेपी (BJP) की सरकार सत्ता में आ गई है. कहते हैं न कि दिल-दिमाग एक सी सोच रखें तो काम आसान हो जाते हैं और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के मामले में अब केंद्र, गुजरात और महाराष्ट्र में भी बीजेपी की सरकार हो गई है. इससे देश सहित दो राज्य सरकारों की विचारधारा भी एक ही हो गई है. सरकार बदलते ही महाराष्ट्र में भी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की रफ्तार को भी पंख लग सकते हैं.

ये पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसकी रफ्तार पर महाराष्ट्र (Maharashtra) में अब -तक ब्रेक लगे हुए हैं. इसके पीछे यहां की पूर्व शिवसेना सरकार की सोच को बताया जा रहा है. गौरतलब है कि  केंद्र में बीजेपी की सरकार है और महाराष्ट्र में भी अब बीजेपी की सरकार आ गई और गुजरात में तो पहले से ही बीजेपी की सरकार है, तो महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन के काम लेकर उम्मीद की जा सकती है. यहां बस कुछ ऐसी ही बातों पर नजर डालते हैं जो अहमदाबाद से मुंबई तक कुल 508 किलोमीटर बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट को रफ्तार दे सकती हैं. 

महाराष्ट्र में सरकार बदलने से बदल जाएगी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की किस्मत भी

हम उम्मीद ही कर सकते हैं कि महाराष्ट्र में सियासत का बदलना बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर लगे ब्रेक की किस्मत को भी पलट देगा. इस ट्रेन को इस साल 15 अगस्त से चलना था, लेकिन प्रोजेक्ट में मुंबई में ब्रेक लगने की वजह से इसे 15 अगस्त साल 2023 में चलाया जाएगा. हालांकि रेलवे को इसे 2028 तक चलाने की आस है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने घोषणा कि है कि 2026 में बुलेट ट्रेन (Bullet Train) का पहला ट्रायल किया जाएगा. महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार बनने से इस ट्रायल के तय समय पर शुरू होने के आसार बन रहे हैं और इसके नजारा दिखने भी लगा है.

मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में नए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने पिछली सरकार के फैसले को पलट दिया है. इन फैसलों में आरे में मेट्रो 3 कार शेड के निर्माण पर रोक लगाने और इसे 102 एकड़ के कांजुरमार्ग प्लॉट में स्थानांतरित करने के फैसले शामिल हैं. इससे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए उम्मीदें नजर आने लगी हैं. 

राजनीति का शिकार हुआ बुलेट ट्रेन का एलिवेटेड कॉरिडोर

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए अहमदाबाद से मुंबई के 508 किमी के लिए लगभग 1 लाख 8 हज़ार करोड़ का अनुमानित बजट बनाया गया है, लेकिन मुंबई में इस प्रोजेक्ट पर लगे ब्रेक से इसकी लागत में इजाफा होता जा रहा है. बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए अभी तक पूरी तरह से भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाया है. मुंबई में ये एलिवेटेड कॉरिडोर का हिस्सा राजनीति के शिकार होकर सच में एलिवेटेड हो गया है. 

अधिकारियों ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद परियोजना के लिए महाराष्ट्र में 432 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, लेकिन इसका क्रियान्वयन कर रही कंपनी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने अब तक 312 हेक्टेयर भूमि का ही अधिग्रहण किया है और राज्य सरकार की अटकाने वाली नीति के कारण बाकी जमीन पाने में जूझ रही है.

अधिकारियों ने बताया कि एनएचएसआरसीएल को बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में भूमिगत टर्मिनस के निर्माण के लिए नवंबर 2019 में मंगाए गए टेंडर्स को को रद्द करना पड़ा क्योंकि राज्य सरकार कथित तौर पर बीकेसी में किए गए वादे के अनुरूप 4.88 हेक्टेयर भूमि देने में असफल रही थी.

सूत्रों ने कहा कि राज्य ने ‘‘मुख्य जमीन’’ के लिए 3,500 करोड़ रुपये मांगे और इस धन को प्रोजेक्ट के राज्य के हिस्से के 5000 करोड़ रुपये के इक्विटी योगदान के तहत समायोजित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि एनएचएसआरसीएल ने निविदा जारी होने के बाद इस उम्मीद के साथ 11 बार इसको बढ़ाया कि राज्य सरकार जमीन मुहैया कराएगी. एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता है क्योंकि अगर हम भुगतान करने पर सहमत होते तो परियोजना की लागत बेहद बढ़ जाती.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रोजेक्ट का वित्तपोषण कर रही जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) इसके दिन-प्रतिदिन के खर्च के लिए नहीं बल्कि सभी निर्माण, रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग के लिए पे कर रही है.’’ अधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा, बीकेसी स्थल पर भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के एक पेट्रोल पंप को वैकल्पिक स्थल दिए जाने के बावजूद स्थानांतरित नहीं किया गया है. एक अन्य बाधा विखरोली में ठाणे और विरार के बीच 21 किलोमीटर की सुरंग के लिए लगभग 3.92 हेक्टेयर जमीन का छोटा हिस्सा है. जो बेहद जरूरी है. सूत्रों ने बताया कि जमीन न मिलने की वजह से सुरंग निर्माण का टेंडर भी रद्द कर दिया गया.

गौरतलब है कि इन मुद्दों के न सुलझने की वजह से  रेलवे ने महाराष्ट्र सेक्शन पर काम करने की उम्मीद छोड़ दी थी और 2026 तक गुजरात में सूरत और बिलिमोरा के बीच 48 किलोमीटर के हिस्से को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया. एक अधिकारी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में जरूरी हासिल करना लगभग असंभव होता जा रहा था जबकि 100 फीसदी निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया है, अन्य भूमि खंड अहस हैं. उनके बगैर हम प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकते. इस बदलाव (सरकार ) के साथ, चीजें बेहतर होने की उम्मीद है. 

आखिर क्यों थमी है महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की रफ्तार

गौरतलब है कि साल 2014 में सदानंद गौड़ा ने मोदी सरकार का पहला रेल बजट पेश करते हुए बुलेट ट्रेन की घोषणा की थी और देश में बुलेट ट्रेन साल 2023 में बुलेट रफ्तार से दौड़नी थी, लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए अभी पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के इस अवधि में पूरा होना संभव नहीं दिख रहा है. महाराष्ट्र में इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम मुक्कमल नहीं हो पाया और इसकी रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है.

रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने भी महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण का काम पूरा न होने से साल 2026 तक केवल 48 किलोमीटर में ही बुलेट ट्रेन का ट्रायल होने की बात कही थी. रेलवे की सूत्रों की माने तो महाराष्ट्र में बुलेट प्रोजेक्ट के अधर में लटकने की एक वजह यहां के नेताओं की सोच रही है, इसलिए यहां इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई खास संजीदगी नहीं दिखाई दी.

यहां के नेताओं को लगता रहा कि इस प्रोजेक्ट से सूबे को कोई फायदा नहीं होगा बल्कि उल्टा परिवहन में सुविधा होने से महाराष्ट्र का व्यापार गुजरात के अहमादाबाद और सूरत शिफ्ट होते वक्त नहीं लगेगा. यहां बीजेपी उस वक्त महाविकास अघाड़ी (Maha Vikas Aghadi) की सरकार थी तो सूबे के बीजेपी नेताओं ने भी इस मुद्दे से दूरी बनाने और इस पर कुछ भी कहने से कन्नी काटने में ही भलाई समझी, लेकिन अब यहां बीजेपी सरकार आ गई हैं ऐसे में उम्मीद कर सकते हैं कि अब अपने शीर्ष नेतृत्व को प्रसन्न करने के लिए बीजेपी के ये नेता इस प्रोजेक्ट के लिए आवाज उठाएंगे, क्योंकि ये पीएम मोदी के सपनों की प्रोजेक्ट जो हैं. 

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train) की रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है. जापान के सहयोग से भारत सरकार मुंबई-अहमदाबाद 508 किलोमीटर लंबे हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट पर तेजी से काम रही है, लेकिन एक तरह से मुंबई में इस तेजी पर ब्रेक लगे हुए हैं. महाराष्ट्र के पालघर  इलाके में सबसे अधिक भूमि अधिग्रहण किया जाना है, लेकिन यहां यह काम लटका पड़ा है, इसलिए रेलवे ने अब-तक अहमदाबाद से नवसारी तक ही बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में काम करने का मन बनाया है.

मुंबई -अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन के लिए अलग से हाई स्पीड ट्रैक बिछ रहा है. इसका 91 फीसदी ट्रैक एलिवेटेड है जिसमें से  कुछ हिस्सा बन कर तैयार हो गया है. बाक़ी का ट्रैक समुद्र के नीचे  सात किलोमीटर और जमीन के नीचे 4 किलोमीटर तक का है. समुद्र में नीचे जाने वाली टनल की लंबाई 21 किलोमीटर है. इस ड्रीम प्रोजेक्ट के ट्रायल के तय वक्त 2023 में दो साल और तीन साल और जुड़ गए हैं. अब इस ट्रेन का सूरत से नवसारी तक का ट्रायल 2026 में होगा. इस प्रोजेक्ट के तहत 12 स्टेशन हैं, जिसमें आठ गुजरात में तो चार स्टेशन महाराष्ट्र में होंगे.

कितना हुआ गुजरात में बुलेट ट्रेन का काम

जहां तक गुजरात की बात है तो वहां बीजेपी की सरकार होने से इस प्रोजेक्ट का काम धड़ल्ले से हुआ है. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए गुजरात में भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो चुका है लेकिन बड़ी चुनौती अब भी महाराष्ट्र में ही है. साबरमती से वापी तक कुल 352 किलोमीटर की बुलेट ट्रेन गुजरात में चलनी है और यहां भी बीजेपी के विजय रुपाणी सरकार चला रहे हैं. यहां अब तक साबरमती से वापी तक के सेक्शन में 61 किलोमीटर में बुलेट ट्रेन के पिलर लगाए जा चुके हैं और 170 किलोमीटर पर कार्य तेजी से प्रगति पर है.

सूरत  NHSRCL के हाई स्पीड रेल साइट पर तो इस प्रोजेक्ट के काम में तेजी इस बात का सबूत है कि बीजेपी शासित प्रदेश पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को कितनी संजीदगी से लेते हैं. इस प्रोजेक्ट के हालिया काम की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो साल 2024 में इस प्रोजेक्ट का पहला सूरत स्टेशन बनकर तैयार हो जाएगा. बुलेट ट्रेन का एलिवेटेड पाथ ब्रिज दो तरह के छोटे और बड़े स्पैन गर्डर से बन रहा है.

सूरत की एक साइट पर छोटे स्पैन का एक बड़ा भाग बनकर तैयार हो चुका है और रोज यहां इस पर काम हो रहा है. इन्हें बुलेट ट्रेन के एलिवेटेड ब्रिज में इस्तेमाल किया जा रहा है. 40-40 मीटर के गर्डर से बन रहे हैं और एलिवेटेड ब्रिज का 320 मीटर का एक बड़ा हिस्सा बन कर तैयार है. इसमें हर दिन 40 मीटर काम आगे बढ़ रहा है. बीते हफ्ते तक  ब्रिज 500 मीटर तक तैयार हो चुका है. इसकी 25 साइट में आठ पर तेजी से काम हो रहा है. समुद्र के 45 फीट नीचे ये ट्रेन मुंबई के विक्रोली से सिलपाटा तक जाएगी. 

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