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Lok Sabha Election Survey: इलेक्‍शन तो छोड़िए सर्वे में भी 200 का आंकड़ा पार नहीं कर पाती थी बीजेपी, मोदी की घोषणा के बाद कैसे बदली तस्‍वीर, पढ़ें 2014 का एक सर्वे

Lok Sabha Election Survey: 2014 और 2019 में बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली बीजेपी के लिए एक समय ऐसा भी था जब सर्वे में भी इसे 200 सीटें नहीं मिलती थीं. फिर कैसे हुआ ये, जानिए.

Lok Sabha Election Survey: बीजेपी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 2014 से लगातार दूसरी बार सत्ता में है और 2024 में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है. 2014 हो या फिर 2019, दोनों बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इतनी सीटें (272 से ज्यादा) मिलीं कि वह अकेले दम पर सरकार का गठन कर सके, लेकिन 2014 के पहले एक दौर ऐसा भी था जब चुनाव तो छोड़ दीजिए बीजेपी को सर्वे में भी 200 से ज्यादा का आंकड़ा पार नहीं कर पाती थी. उसी दौर का विश्लेषण करते हैं कि कैसे एक घोषणा ने बीजेपी के लिए पूरे समीकरण ही बदल दिए.

पहले एक नजर 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों पर डालते हैं. इससे बीजेपी की बढ़ती ताकत को समझने में आसानी होगी. 2014 के आम चुनाव में एनडीए को 336 सीट मिली. बीजेपी ने 282 सीट जीतकर बहुमत (272) के जादुए आंकड़े को पार कर लिया. तीन दशक बाद ऐसा हुआ था. इसके पहले 1984 में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला था. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी सहानुभूति में कांग्रेस के पक्ष में लहर चली थी और पार्टी ने 404 सीटें जीती थीं. तब से देश में जोड़-तोड़ की सरकारें ही बनती आ रही थीं.

पहली बार एनडीए 200 के पार
पिछले चुनाव में 200 से नीचे रहने वाली पार्टी ने ये करिश्मा कैसे किया. 2014 के एक सर्वे में इसकी वजह साफ दिखाई देती है. जनवरी 2014 में मूड ऑफ द नेशन नाम के सर्वे सामने आया था. पिछले पांच साल (2009-2014) में ये पहली बार था जब इस सर्वे ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 200 के पार पहुंचते दिखाया था. 

इसके महज छह महीने पहले इसी एजेंसी ने सर्वे किया था. इस सर्वे में एनडीए को 155 सीटें मिलती दिखाई गई थीं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 137 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया था. बाकी सीटें अन्य दलों के खाते में दी गई थी.

आखिर 6 महीनों में क्या हुआ?
अगस्त 2013 और जनवरी 2023 के इन दो सर्वे के बीच देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम घटा जब 2013 के सितम्बर में एनडीए के सबसे बड़े घटक दल के रूप में बीजेपी ने प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना था.

नरेंद्र मोदी के एनडीए का प्रधानमंत्री का चेहरा बनने के बाद गठबंधन के पक्ष में सारे समीकरण बनने लगे. जनवरी 2014 को सी वोटर के सर्वे में एनडीए गठबंधन की सीटें 200 के पार दिखाई दे रही थीं.

लगातार बढ़ा पीएम मोदी का ग्राफ
लोकप्रियता के मामले में नरेंद्र मोदी पहले से ही अपने दूसरे प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे थे. इसकी गवाही सर्वे दे रहा है. जनवरी 2014 के सर्वे में बेस्ट पीएम कैंडिडेट के सवाल पर 47 प्रतिशत लोगों ने नरेंद्र मोदी का समर्थन किया था. वहीं, उनके सामने राहुल गांधी को 15 फीसदी और अरविंद केजरीवाल को सिर्फ 9 प्रतिशत लोगों ने उम्मीदवार माना था.

इसके छह महीने पहले अगस्त 2013 के सर्वे में पीएम पद पर नरेंद्र मोदी 42 फीसदी लोगों की पसंद थे, जबकि 20 प्रतिशत लोग राहुल गांधी और 1 फीसदी केजरीवाल के पक्ष में थे. जनवरी 2013 के सर्वे में 36 प्रतिशत लोगों ने पीएम मोदी के पक्ष में थे जबकि 22 प्रतिशत का समर्थन राहुल गांधी को था. 

आज भी टॉप पर पीएम मोदी
सी वोटर का हालिया सर्वे जनवरी 2023 में आया है. ताजा सर्वे के मुताबिक पीएम मोदी 52 फीसदी लोगों की पसंद के साथ आज भी टॉप पर हैं. ये आंकड़े ये दिखा रहे हैं कि किस तरह से लगातार पीएम मोदी का ग्राफ लगातार ऊपर बढ़ता रहा और ये भी बताता है कि उनके नाम के एलान ने किया तरह बीजेपी और एनडीए दोनों को फायदा पहुंचाया.

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