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हंगामे की वजह से लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर नहीं शुरू हो सकी चर्चा

आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने, कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन, पीएनबी धोखाधड़ी समेत अलग अलग विषयों पर विभिन्न दलों के हंगामे के कारण पिछले 19 दिनों से निचले सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है.

नई दिल्ली: लोकसभा में हंगामे की वजह से भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक, चिट फंड संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आज भी चर्चा शुरू नहीं हो सकी.

आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने, कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन, पीएनबी धोखाधड़ी समेत अलग अलग विषयों पर विभिन्न दलों के हंगामे के कारण पिछले 19 दिनों से निचले सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है. ऐसे में लोकसभा की कार्यसूची में पिछले कुछ दिनों से भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक, चिट फंड (संशोधन) विधेयक चर्चा और पारित होने के लिये सूचिबद्ध किये जा रहे हैं लेकिन इन पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी.

भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक, 2018

लोकसभा में पेश भगोड़ा आर्थिक अपराध विधेयक, 2018 में आर्थिक अपराध से संबंधित दंडनीय कार्यवाही प्रारंभ होने की संभावना या इनसे जुड़ी कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान आरोपियों के देश छोड़कर चले जाने की समस्या का समाधान निकालने का खाका तैयार किया गया है.

विधेयक में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने पर विशेष अदालत द्वारा उस व्यक्ति की भारत में या भारत के बाहर कोई संपत्ति जब्त करने का आदेश देने का प्रावधान है. इसमें उसकी बेनामी संपत्ति भी शामिल है. इसमें प्रावधान है कि सौ करोड़ रुपये या उससे अधिक की रकम के ऐसे अपराध करने के बाद, जो व्यक्ति फरार है या भारत में दंडनीय अभियोजन से बचने या उसका सामना करने के लिए भारत वापस आने से इनकार करता है, उसकी संपत्ति और अपराध से अर्जित संसाधनों की कुर्की की जा सकती है. विधेयक में किसी भगोड़े आर्थिक अपराधी की कोई सिविल दावा करने या बचाव करने की हकदारी नहीं होने का भी प्रावधान है.

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है, 'ऐसे अनेक मामले सामने आये हैं जिसमें लोग आर्थिक अपराध की दंडनीय कार्यवाही शुरू होने की संभावना में या कभी कभी कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से पलायन कर गये हैं. भारतीय अदालतों से ऐसे अपराधियों की अनुपस्थिति के अनेक हानिकारक परिणाम हुए हैं और मामलों की जांच में बाधा उत्पन्न होती है.

गौरतलब है कि यह विधेयक विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे कारोबारियों द्वारा बैंकों का अरबों रुपये का कर्ज नहीं लौटाने और देश से बाहर चले जाने की पृष्ठभूमि में लाया गया है.

चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018

लोकसभा की कार्यसूची में चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018 भी चर्चा एवं पारित होने के लिये सूचिबद्ध था. इसके जरिए 1982 के चिट फंड अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव किया गया. इसमें चिट के लिए मैत्री फंड का भी उपयोग करने का प्रावधान है.

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि चिट कारोबार का विकास करने और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिहाज से संस्थागत और विधिक ढांचे में सुधार की सलाहकार समूह की सिफारिशों का कार्यान्वयन और पंजीकृत चिट फंड क्षेत्र को मजबूत बनाना है. चिट कारोबार को सरल और कारगर बनाने के लिए विधायी और प्रशासनिक प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए वित्त मामलों की संसदीय स्थाई समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए चिट फंड संशोधन विधेयक, 2018 पेश किया गया है.

विधेयक में नयी जोड़ी गयी धारा में कहा गया है, ‘कोई भी व्यक्ति चिट कारोबार तब तक नहीं करेगा, जब तक कि वह अपने नाम के भाग के रूप में चिट, चिट फंड, चिट्टी, कुरी या मैत्री फंड शब्दों में से किसी शब्द का प्रयोग नहीं करता है. चिट कारोबार करने वाले व्यक्ति से भिन्न कोई भी व्यक्ति अपने नाम के भाग के रूप में ऐसे किसी शब्द का प्रयोग नहीं करेगा.

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017

निचले सदन में आज की कार्यसूची में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017 भी विचार एवं पारित किये जाने के लिये सूचिबद्ध था. इस विधेयक में देश में चिकित्सा शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने और चिकित्सा सेवाओं के सभी पहलुओं में उच्च मानकों को बनाये रखने के उद्देश्य से भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) की जगह राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के गठन का प्रस्ताव किया गया है.

इसके अलावा इसमें मेडिकल संस्थाओं, अनुसंधानों और चिकित्सा पेशेवरों के नियमन के लिए नीतियां निर्धारित करने की बात कही गई है. इसके अलावा यह स्वास्थ्य और इससे जुड़े बुनियादी ढांचे समेत स्वास्थ्य संबंधी देखभाल की अपेक्षाओं और जरूरतों तक पहुंच बनाना सुनिश्चित करेगा और ऐसी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करेगा.

विधेयक में कहा गया है कि सभी मेडिकल संस्थाओं में स्नातक आयुर्विज्ञान शिक्षा के लिए प्रवेश के लिहाज से एक सामान्य राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा होगी. आयोग अंग्रेजी और ऐसी अन्य भाषाओं में परीक्षा का संचालन करेगा. आयोग सामान्य काउंसलिंग की नीतियां भी निर्धारित करेगा.

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद संशोधन विधेयक 2017

लोकसभा की कार्यसूची में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद संशोधन विधेयक 2017 भी चर्चा एवं पारित करने के लिये सूचिबद्ध था लेकिन हंगामे के कारण कार्यवाही स्थागित होने की वजह से इसे नहीं लिया जा सका. इसके माध्यम से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम 1993 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है.

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