नासा: 2018 रहा चौथा सबसे गरम साल, सौ साल में बढ़ा धरती का एक डिग्री तापमान
एनओएए के आकलन में पाया गया कि 2018 में धरती का तापमान 20वीं सदी के औसत से 0.79 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. 1880 के बाद से धरती की सतह का औसत तापमान करीब एक डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है.

न्यूयॉर्क: साल 2018 में धरती का वैश्विक सतह तापमान 1880 के बाद से चौथा सबसे गर्म रहा है. नासा और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के स्वतंत्र विश्लेषणों में यह पाया गया है. नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस स्टडीज (जीआईएसएस) के मुताबिक 2018 में वैश्विक तापमान 1951 से 1980 के औसत तापमान से 0.83 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा.
पिछले पांच साल, सामूहिक रूप से, आधुनिक रिकॉर्ड के हिसाब से सबसे गर्म साल रहे. एनओएए के आकलन में पाया गया कि 2018 में धरती का तापमान 20वीं सदी के औसत तापमान से 0.79 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था.
जीआईएसएस के निदेशक गेविन स्किम्ड ने कहा, “लंबे समय से बढ़ रहे वैश्विक तापमान पर तमाम चिंताओं के बावजूद 2018 एक बार फिर बेहद गर्म साल रहा.” स्किम्ड के मुताबिक 1880 के बाद से धरती की सतह का औसत तापमान करीब एक डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है.
राहुल गांधी की कार्यकर्ताओं को सलाह, मोदी हताश, न लगाएं मोदी 'मुर्दाबाद' के नारेउन्होंने बताया कि यह गर्माहट कॉर्बन डाइऑक्साइड के वातावरण में बढ़े हुए उत्सर्जन और मानवीय गतिविधियों के कारण निकलने वाली अन्य ग्रीनहाउस गैसों के चलते हुई है.
इस बढ़ते तापमान के चलते ग्रीनलैंड एवं अंटार्कटिक की बर्फ की विशाल परतें तो पिघल ही रही हैं साथ ही इससे आग लगने के जोखिम वाले मौसम की अवधि भी खिंच जाती है और कुछ प्रतिकूल मौसमी घटनाएं होती हैं.
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