वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने जाते-जाते मोदी सरकार को दी थी सलाह- नॉर्थ-ईस्ट में ‘हिंदुत्व’ न थोपें
पूर्वोत्तर के सात में से छह राज्यों में भाजपा की अच्छी पैठ हो गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी पार्टी अच्छी तरह जानती है कि इस क्षेत्र में राजनीतिक वफादारी बहुत तेजी से बदल सकती है.

मुंबई: अपने निधन से कुछ ही घंटों पहले वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने एक आर्टिकल लिखा था, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार से कहा था कि वह पूर्वोत्तर में अपने ‘‘हिंदुत्व के दर्शन’’ थोपने की बजाय उस क्षेत्र के विकास और सुशासन पर ध्यान दे. ‘लोकमत टाइम्स’ के नागपुर संस्करण में ‘‘इमिग्रेंट्स ऑर वोट बैंक्स (प्रवासी या वोट बैंक)’’ के नाम से लिखे लेख में नैयर ने लिखा कि यदि अवैध प्रवासियों पर लगाम लगाने और उन्हें भारत से वापस भेजने सहित पर्याप्त उपाय नहीं किए गए तो अवैध तरीके से लोगों का भारत में आना देश के लिए सुरक्षा चुनौती बना रहेगा.
नैयर (95) का निधन बीती रात करीब 12:30 बजे दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ
नैयर ने लिखा कि केंद्र सरकार को पूर्वोत्तर में लंबित अंतर-राज्यीय मुद्दे, खासकर नगालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के साथ असम का सीमा विवाद, सुलझाने के लिए कदम उठाने चाहिए. जानेमाने पत्रकार, स्तंभकार और लेखक नैयर ने लिखा कि मिजोरम और नगालैंड के साथ मणिपुर का भी सीमा विवाद है. फिर भी देश के कुछ हिस्सों में पूर्वोत्तर के लोगों, खासकर छात्र समुदाय, को प्रताड़ित करने जैसे कई अहम मुद्दों पर पूरा क्षेत्र एकजुट रहता है.
उन्होंने कहा है कि पूर्वोत्तर के सात में से छह राज्यों में भाजपा की अच्छी पैठ हो गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी पार्टी अच्छी तरह जानती है कि इस क्षेत्र में राजनीतिक वफादारी बहुत तेजी से बदल सकती है. नैयर ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए कई उपाय किए हैं और क्षेत्र के लोगों को भावनात्मक तौर पर जोड़ने के प्रयास किए हैं.
भाजपा याद रखे पूर्वोत्तर एक बहुलवादी समाज है: कुलदीप नैयर
आलेख में उन्होंने आगे लिखा है कि, ‘‘सत्ताधारी भाजपा को याद रखना चाहिए कि पूर्वोत्तर एक बहुलवादी समाज है जहां हिंदी पट्टी की तरह ज्यादा सांप्रदायिक हिंसा नहीं होती. सबसे पहले केंद्र को अपने हिंदुत्व के दर्शन थोपने की बजाय विकास एवं सुशासन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.’’ नैयर कहा कि अगले साल होने जा रहे आम चुनावों के मद्देनजर भाजपा पूर्वोत्तर की समस्याओं की अनदेखी नहीं कर सकती. नैयर ने लिखा कि क्षेत्र की 25 लोकसभा सीटों में असम से सबसे ज्यादा 14 सदस्य होते हैं और मोदी के लिए हर सीट जीतना जरूरी है.
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Source: IOCL

























