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जानिए- आक्रांता ग़ज़नवी को, जिसके नाम पर पाकिस्तान ने किया है बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण

गजनी का नाम भारत पर आक्रमण करने वाले उन तमाम आक्रांताओं में से है जिसने धन के लोभ में आक्रमण किए. खुद गजनी ने ही 1000 और 1027 ईस्वी के बीच 17 बार भारत पर आक्रमण किए.

नई दिल्लीः जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद से ही पाकिस्तान युद्ध की गीदड़भभकी दे रहा है. अब उसने एक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. जिसका नाम पाकिस्तान ने 'गजनवी' रखा है. 'गजनवी' नाम के सहारे पाकिस्तान भारत के सैन्य मनोबल पर चोट करना चाह रहा है, क्योंकि गजनवी उन आक्रांताओं में से एक है जिसने भारत पर आक्रमण किया था.

कौन था गजनवी?

तुर्की फतह करने वाले गजनी के महमूद, जिसे महमूद गजनी या गजनवी भी कहते हैं, वह 998 ईस्वी में अपने पिता का उत्तराधिकारी बना और मध्य एशिया में एक विशाल साम्राज्य स्थापित करने में कामयाब रहा. गजनी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के दक्षिण में पड़ने वाला एक मौजूदा शहर भी है. वह 27 साल की आयु में 'सुल्तान' की उपाधि पाने वाले पहला शासक था. गजनी का नाम भारत पर आक्रमण करने वाले उन तमाम आक्रांताओं में से है जिसने धन के लोभ में आक्रमण किए. खुद गजनी ने ही 1000 और 1027 ईस्वी के बीच 17 बार भारत में आक्रमण किए थे.

इन आक्रमणों के पीछे क्या था कारण

  • गजनी के महमूद ने उस वक्त भारत पर आक्रमण करना शुरू किया था जब राजपूत सत्ता अपने बुरे दौर से गुजर रही थी. महमूद गजनी की तरफ से किए गए भारत के अभियानों के पीछे दो मुख्य कारण थे. पहला- भारत में मौजूद विशाल धन को हासिल करना और दूसरा- इस्लाम धर्म का प्रसार करना. एक और कारण यह था कि वह अपनी राजधानी गजनी को पूरे मध्य एशिया के राजनीतिक माहौल में स्थापित करना चाहता था.
  • उसने 1000 ईस्वी में पहली बार भारत पर आक्रमण किया. उसके बाद कहा जाता है कि अपनी मृत्यु तक गजनी ने 17 बार भारत पर हमला किया. भारत में आक्रमण करने के दौरान गजनी का सामना राजा जयपाल और उसके पुत्र आनंदपाल जैसे साहसी योद्धाओं से हुआ, लेकिन वे दोनों भी उसके सामने हार गए. 1009 ई. और 1026 ई. के बीच गजनी ने जिन स्थानों पर आक्रमण किए उनमें काबुल, दिल्ली, कन्नौज, मथुरा, कांगड़ा, थानेश्वर, कश्मीर, ग्वालियर, मालवा, बुंदेलखंड, त्रिपुरी, बंगाल और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल थे. उसकी तरफ से किए गए आक्रमणों में गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर किया गया सबसे बड़ा आक्रमण माना गया, क्योंकि उसने मंदिर से बेशकीमती हीरे जवाहरात और कीमती सामान लूट लिए थे.

गजनी के आक्रमण से भारत पर क्या पड़ा प्रभाव

  • ग़ज़नवी के आक्रमणों को नि:संदेह निर्दयी कत्लेआम और धन की लूट के एवज में की गई कार्रवाई मानी जाती है. भारतीय राजवंश के प्रत्येक आक्रमण में लूटी गई संपत्ति सीधे गजनी शहर रवाना कर दी जाती थी. गजनी की कार्वाइयों में मथुरा, कन्नौज, थानेश्वर जैसी जगहें खंडहर में तब्दील हो गईं. सोमनाथ में शिव मंदिर के विध्वंस ने उसे हिंदुओं के बीच सबसे ज्यादा अप्रिय बना दिया. अलग-अलग मंदिरों के धन को लूटने के बाद उसने ज्वालामुखी, महेश्वर, नारुनकोट और द्वारका जैसे कई जगहों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया.
  • गजनी ने आक्रमणों के जरिए उपमहाद्वीप को जीतने के लिए कोई व्यवस्थित प्रयास नहीं दिखाए, लेकिन उसने कहीं न कहीं भारत में तुर्की शासन की नींव रखी. गजनी से प्रोत्साहित हो कर बाद में गोरी ने भी भारत में लूट और राज्य की लालसा के आक्रमण किए.
  • महमूद गजनी ने उत्तर में समरकंद, दक्षिण में गुजरात, पूर्व में पंजाब और पश्चिम में कैस्पियन सागर तक एक बड़े भू-भाग पर अपना आधिकार कर लिया था. उसके साम्राज्य में फारस (ईरान), अफगानिस्तान और पंजाब भी शामिल थे.
  • गजनी की तरफ से किए गए भारत के 17 आक्रमणों में एक के बाद एक भारतीय शासकों की सैन्य कमजोरी का पता चलता गया. इन आक्रमणों ने इस बात की तरफ इशारा किया कि मौजूदा राजपूत शासकों की आपस में कोई राजनीतिक एकता नहीं थी. इन विजय ने यह भी साबित कर दिया कि मुसलमान युद्ध, अनुशासन और कर्तव्य के क्षेत्र में हिंदुओं से श्रेष्ठ थे.
  • गजनी के आक्रमणों से भारत की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई क्योंकि देश से बड़ी संपत्ति लूट ली गई. इन आक्रमणों से देश के भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य पर भी बाहरी आक्रांताओं पर एक प्रतिकूल प्रभाव डाला. मूर्तियों और मंदिरों के विध्वंस के कारण भारतीय कला, वास्तुकला और मूर्तिकला को बहुत बड़ा झटका लगा.
  • हमलों के बाद इस्लाम ने भारत में भी एक बड़ा मुकाम हासिल किया, गजनी के इन विजयों के कारण हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नफरत और भय भी बढ़ गया.
  • गजनी की जीत, विशेष रूप से पंजाब और अफगानिस्तान को अपने राज्य में शामिल करने से, भारतीय सीमाएं कमजोर हो गईं. इससे किसी भी समय अन्य अफगान और तुर्की शासकों के लिए भारत में गंगा की घाटी में प्रवेश करना आसान हो गया था.
  • गजनी के इन विजयों ने हिंदू मुस्लमानों को जोड़ने के लिए पुल तैयार किया. यही कारण है हिंदू-मुस्लिम संपर्क के कारण ही मुस्लिम-सूफियों और संतों का आगमन संभव हो सका. तुर्की कला से कुछ हद तक भारत का मेलजोल बढ़ा. जिसकी बदौलत आज भारत में उन स्थापत्य कलाकृतियों की भरमार हैं जो भारतीय, फारस और अरबी शैलियों के समागम से तैयार की गई हैं.
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