'आंकड़े चिंताजनक', SIR पर कर्नाटक CM ने उठाए सवाल, CEC से की ये मांग
कर्नाटक में एसआईआर के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखते हुए मांग की है. इसके अलावा उन्होंने इससे जुड़े आंकड़ों को चिंताजनक बताया है.

कर्नाटक में एसआईआर (SIR) के आंकड़ों पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सवाल उठाए हैं. राज्य में चुनाव आयोग की तरफ से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चल रहा है. इसी बीच जो आंकड़े सामने आए हैं, उसपर मुख्यमंत्री ने गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखा है.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'कर्नाटक में एसआईआर के आंकड़ों की स्थिति बेहद ही चिंताजनक सामने आई है. 1.08 करोड़ से ज्यादा वोटरों को ASDDO के तौर पर मार्क किया गया है. साथ ही लगभग 43 लाख वोटर्स को लॉजिकल गड़बड़ियों के लिए नोटिस भेजे जाने हैं. मैंने सीईसी ज्ञानेश कुमार से ये कदम उठाने का अनुरोध किया है.'
The SIR in Karnataka has thrown up alarming numbers. Over 1.08 crore voters are marked as ASDDO and about 43 lakh voters are set to receive notices for logical discrepancies. I have requested the CEC Shri Gyanesh Kumar to take the following actions:
— DK Shivakumar (@DKShivakumar) August 25, 2026
1. Extend the period for… pic.twitter.com/HoUeVWBWex
चुनाव आयुक्त से की कर्नाटक के सीएम ने पत्र में मांग
डीके शिवकुमार ने बिंदुवार सवाल उठाते हुए कई मांग करते हुए कहा कि दावे और आपत्तियों के लिए समय सीमा बढ़ाई जाए, ताकि ड्राफ्ट रोल से छूटे हुए असली वोटरों के दावे दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके. सीईओ को निर्देश दिया जाए कि वे तय प्रक्रिया को पूरी तरह से लागू करें, इसमें ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभाएं और शहरी इलाकों में वार्ड कमिटी की बैठकें शामिल हों. इनका पर्याप्त प्रचार प्रसार भी किया जाए.
उन्होंने कहा, 'लॉजिकल गड़बड़ियों और 2002 के रोल से लिंक न होने के कारण नोटिस पाने वाले वोटरों को दिया गया समय बढ़ाया जाए. हर वोटर को जवाब देने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए कम से कम 3-4 हफ्ते मिलने चाहिए.'
उन्होंने कहा, दावों, 'आपत्तियों और आवदेनों की ज्यादा से ज्याद संख्या को संभालने और गलतियों एवं अनुचित तरीके से नाम हटाने की घटनाओं को रोकने के लिए ERO और जरूरत पड़ने पर डीईओ की संख्या बढ़ाई जाए.'
इसके अलावा कर्नाटक सीएम ने कहा, 'आवाजाही, गरीबी, डॉक्यूमेंट्स की कमी या जानकारी का अभाव वोटिंग के अधिकार से वंचित होने का कारण नहीं बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि मकसद एक ऐसी वोटर लिस्ट तैयार करना होना चाहिए, जो सटीक और भरोसेमंद हो. इसके अलावा सबसे बढ़कर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी असली वोटर लिस्ट से बाहर न रहे.'






















