एक्सप्लोरर
गुजरात के बाद झारखंड में भी लागू हुआ गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण कानून
गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने वाले कानून को सबसे पहले गुजरात ने लागू किया था. झारखंड इसे लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है.

रांची: झारखंड में गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने वाला कानून लागू हो गया है. झारखंड इस कानून को लागू करने वाला दूसरा राज्य है. इससे पहले कल गुजरात ने ये कानून लागू कर दिया था. 10% आरक्षण देने वाले कानून को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 13 जनवरी को अपनी मंजूरी दे दी थी. इससे पहले ये बिल 9 जनवरी को संसद से पास हुआ. 10% आरक्षण चाहिए तो पूरी करनी होंगी ये शर्ते
- परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम हो
- 1000 वर्म फीट से बड़ा घर ना हो
- म्यूनिसिपिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर ना हो
- 5 एकड़ से ज्यादा खेती लायक जमीन ना हो
- नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपल एरिया में 200 गज से बड़ा घर ना हो
देश में आरक्षण की व्यवस्था? ये आरक्षण मौजूदा 49.5 फीसदी आरक्षण की सीमा के ऊपर है. भारत में अभी तक 49.5 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था थी, लेकिन नए कानून के हिसाब से आरक्षण की सीमा अब 59.5 फीसदी तक पहुंच गई है. अब तक देश में अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण है. अब सामान्य श्रेणी के लिए भी 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है. जानें क्यों निजी क्षेत्र के कॉलेजों में गरीब सवर्णो के लिए आरक्षण लागू करना मुश्किल है नए कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती सामान्य वर्ग के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण के इस नए कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. यूथ फॉर इक्वेलिटी ने इस संविधान संशोधन बिल को देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी है. अर्जी में कहा गया है कि ये बिल अभूतपूर्व तरीके से दो दिन में ही संसद से पास कर दिया गया और इसपर बहुत कम चर्चा की गई. अर्जी में ये भी दावा किया गया है कि ये कानून संविधान के दो अनुच्छदों की अवहेलना करता है. आरक्षण के लिए सिर्फ और सिर्फ आर्थिक आधार आरक्षण का पैमाना नहीं हो सकता है. इसके साथ ही अर्जी में कहा गया है कि आर्थिक आधार को सिर्फ जनरल कैटेगरी तक सीमित नहीं किया जा सकता है. अर्जी में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. अर्जी में कहा गया है कि गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों पर रिजर्वेशन लागू करना स्पष्ट रूप से मनमाना रवैया है. मोदी का मास्टरस्ट्रोक इस कानून को मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है. राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस आरक्षण के बाद मोदी सरकार अगड़ी जातियों में अपनी पैठ मजबूत कर सकती है क्योंकि ये जातियां धीरे-धीरे उनसे दूर हो रही थी, जबकि 2014 में इन समूहों को मोदी को भरपूर समर्थन मिला था. यह भी पढ़ें- लोकसभा चुनाव: मायावती ने मांगा बर्थडे गिफ्ट, कहा- UP तय करेगा कि प्रधानमंत्री कौन होगा कर्नाटक में जारी है सियासी उठापटक, 2 निर्दलीय विधायकों ने वापस लिया कांग्रेस-JDS सरकार से समर्थन पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी, बीएसएएफ का एक अधिकारी शहीद Watch Live: इस लिंक को क्लिक करके आप लाइव देख सकते हैं 'बिहार शिखर सम्मेलन' वीडियो देखें-Jharkhand government approves 10% reservation given by Central Government in government jobs and education to economically weaker section in the general category pic.twitter.com/WEpoc8iUCH
— ANI (@ANI) January 15, 2019
और पढ़ें






















