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Maulana Arshad Madani: 'देश गलत दिशा में, मुसलमानों को लगातार...', मौलाना अरशद मदनी का बड़ा बयान, जानें क्या कहा?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश की मौजूदा स्थिति, सांप्रदायिकता, मुसलमानों और आज़ादी की लड़ाई को लेकर बड़ा बयान दिया है.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा है कि आज भारत फिरकापरस्त और सांप्रदायिक ताकतों के प्रभाव में बर्बादी की ओर बढ़ रहा है और मुसलमानों को लगातार अन्याय और जुल्म का सामना करना पड़ रहा है. मदनी के मुताबिक जिस देश के लिए उनके पूर्वजों ने कुर्बानियां दी थीं, वही देश आज अपने मूल रास्ते से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है.

मौलाना मदनी ने कहा कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि जिस मुल्क के लिए उनके बाप-दादाओं ने जान और माल की कुर्बानी दी, आज वही मुल्क नफरत और भेदभाव की राजनीति में फंसता जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सांप्रदायिक ताकतें खुलेआम सक्रिय हैं और इंसाफ की जगह समाज में नफरत ने ले ली है. उनके अनुसार यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है.

राहुल गांधी से मुलाकात और जेल में बंद मुसलमानों का मुद्दा

मौलाना मदनी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हुई एक पुरानी मुलाकात का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान वे राहुल गांधी से मिलने गए थे और उन्हें बताया था कि जो समुदाय आज़ादी की लड़ाई में सबसे आगे रहा, उसी समुदाय के लोग आज वर्षों से जेलों में बंद हैं. मदनी के अनुसार जब राहुल गांधी ने इसका समाधान पूछा तो उन्होंने दो सुझाव दिए और बाद में ऐसे कैदियों की एक सूची भी तैयार कर उन्हें सौंपी. मदनी ने बताया कि इसके बाद राजस्थान के तत्कालीन डिप्टी होम मिनिस्टर ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन सांप्रदायिक दबाव के चलते यह मामला आगे नहीं बढ़ सका.

कांग्रेस की स्थापना पर मदनी का दावा

मौलाना मदनी ने कांग्रेस के इतिहास को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थापना का उद्देश्य शुरू में भारत को आज़ाद कराना नहीं था. उनके मुताबिक कांग्रेस खुद यह स्वीकार करती रही है कि उसकी स्थापना अंग्रेजों और भारतीयों के बीच 1832 और 1857 के बाद पैदा हुई गलतफहमियों को दूर करने के लिए की गई थी.  मदनी ने कहा कि बाद में मुसलमानों और उलेमाओं ने कांग्रेस के उद्देश्य को बदला और उसे आज़ादी की लड़ाई का मंच बनाया. उनका दावा है कि उलेमाओं की भूमिका के बिना स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा अलग हो सकती थी.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की भूमिका पर जोर

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद की स्थापना ही देश को आज़ाद कराने के उद्देश्य से हुई थी. उन्होंने कहा कि उलेमाओं ने कांग्रेस को संरक्षण दिया और उसे स्वतंत्रता आंदोलन में मजबूती से खड़ा किया. उनके अनुसार उलेमाओं के समर्थन से ही आज़ादी की लड़ाई को व्यापक जनसमर्थन मिला.

महात्मा गांधी को लेकर मदनी का बयान

मौलाना मदनी ने यह भी दावा किया कि महात्मा गांधी को महात्मा की उपाधि देने में उलेमाओं की रणनीतिक सोच शामिल थी. उन्होंने कहा कि उस दौर में समाज धार्मिक था और आज़ादी के आंदोलन को मजबूत करने के लिए ऐसे व्यक्ति को आगे लाने की जरूरत थी, जिसे जनता आध्यात्मिक रूप से स्वीकार कर सके. उनके अनुसार इसी सोच के तहत गांधी को आंदोलन का चेहरा बनाया गया.

मौजूदा हालात पर चेतावनी

मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि आज देश में जो माहौल बन रहा है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरे की घंटी है. उन्होंने चेतावनी दी कि नफरत की राजनीति, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना देश की जड़ों को कमजोर कर रहा है. उनका कहना है कि अगर हालात नहीं बदले तो इसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा.

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