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'मंदिर वहीं बनाएंगे' पुराना हो गया है, अब नारा है 'मंदिर तो हम ही बनाएंगे!'

रामालय न्यास का दावा है कि कानूनी रूप से उनका ट्रस्ट ही पूरी तरह वैध है सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार है.

नई दिल्ली: 9 नवंबर को अयोध्या मामले में फैसला आने के बाद "मंदिर वहीं बनाएंगे" अब पुराना हो गया है अब नारा है "मंदिर तो हम ही बनाएंगे!" ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट के दावे शुरू हो गए हैं. सरकार अभी कोई ट्रस्ट के बारे में काम शुरु करती कि उससे पहले ही मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट आगे आना शुरू हो गए. हाल ही में रामालय न्यास ने मंदिर निर्माण करने के लिए उनके ट्रस्ट को ही ट्रस्ट माना जाए ये दावा किया है. वहीं मंदिर निर्माण के लिए पहले से एक ट्रस्ट है रामजन्म भूमि न्यास जोकि कानूनी लड़ाई में भी शामिल थी.

रामालय न्यास ने दावा किया है की उनका ट्रस्ट कानूनी रूप से वैध है और साधु संतो ने बनाया है लिहाजा उन्हें ही मंदिर निर्माण के ट्रस्ट माना जाए या बनाया जाए. इसको लेकर रामालय न्यास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री को चिट्ठी भी लिखी है. वहीं मंदिर निर्माण से पहले जुड़े और कोर्ट में केस लड़ रही रामजन्म भूमि न्यास भी है. रामजन्म भूमि न्यास को भी साधु संतो ने बनाया है और इसे विश्व हिन्दू परिषद का समर्थन भी है.

रामालय न्यास का दावा है कि कानूनी रूप से उनका ट्रस्ट ही पूरी तरह वैध है सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार है. रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का दावा है कि उनका ट्रस्ट अयोध्या एक्विजिशन एक्ट 1993 के बाद बना है जबकि राम जन्मभूमि न्यास उससे पहले बना हुआ है. इसके अलावा रामालय न्यास हिंदू समाज के बड़े साधु संतों और शंकराचार्य ने बनाया है लिहाजा उनकी दावेदारी प्रबल है. वहीं इस मामले में वीएचपी के उपाध्यक्ष चंपत राय का कहना है कि वह कौन सा ट्रस्ट मंदिर बनाए इसके बारे में नहीं सोच रहे उनका कहना है कि यह काम सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने सौंपा है और सरकार ही इसको देखेगी. वहीं रामालय ट्रस्ट को लेकर चंपत राय ने कहा "सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट में उनका उल्लेख नहीं है 40 दिन की कार्रवाई में किसी वकील ने उनके ट्रस्ट का नाम तक नहीं लिया हिंदुस्तान की जनता जानती नहीं कि रामालय ट्रस्ट पंजीकृत है भी या नहीं उनका कोई अकाउंट है उसमें कोई लेन-देन होता है या नहीं या उन्होंने कभी अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया है. वही राम जन्मभूमि न्यास 1985 में दिल्ली में रजिस्टर किया गया था और उसके तमाम हिसाब किताब मौजूद है".

वहीं विश्व हिंदू परिषद कि कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि विश्व हिंदू परिषद मंदिर नहीं बनाएगा, मंदिर ट्रस्ट बनाएगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार को दी गई है. अब यह सरकार को देखना है कि कौन सा ट्रस्ट बनाना है या किसे ट्रस्ट में शामिल करना है. लेकिन एबीपी न्यूज़ से बातचीत ने आलोक कुमार ने साफ कहा कि "हमारा सरकार से बस दो ही आग्रह है पहला कि जो सोमपुरा जी ने मंदिर का नक्शा बनाया है जो नक्शा देश भर के लोगों ने देखा है जिस मॉडल को लोगों ने प्रणाम किया है वह बहुत अच्छा है और राम जन्मभूमि न्यास ने अपनी कार्यशाला में इस मंदिर में लगने वाले 60 फ़ीसदी खंबे नक्काशी कर तैयार कर दिए हैं जोकि इस मंदिर के निर्माण में उपयोग किए जाएं इसके अलावा हमारा सरकार से और कोई आग्रह नहीं है"

वहीं वीएचपी राममंदिर निर्माण ट्रस्ट के लिए सीधे तौर पर नहीं पर रामजन्म भूमि न्यास का समर्थन कर रही है. वहीं रामालय न्यास के दावे पर भी कुछ नहीं बोल रही है. वहीं रामालय न्यास खुल कर रामजन्म भूमि न्यास का विरोध कर रही है. इन दोनों न्यास ने मंदिर का नक्शा भी तैयार कर लिया है अंतर बस इतना है की रामजन्म भूमि न्यास का नक्शा और मॉडल 1989 में बनकर तैयार है. इस मॉडल और नक्शे को दुनिया ने देखा है. वहीं इसके निर्माण के लिए 1989 में आंदोलन कर सवा रुपए प्रति व्यक्ति और शिला दान लिया था. इस दान से मंदिर के मॉडल के 60 % निर्माण काम का पत्थर तैयार है.

रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को न्यास की तरफ से लिखी गई चिट्ठी में साफ किया है कि जो ट्रस्ट बनाया जा रहा है उसमें रामालय न्यास को दिया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है तो वह कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने को तैयार हैं. इस पर वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि सिर्फ कमजोर लोग ही ऐसी बातें करते हैं. और ऐसा करने से कुछ नहीं होगा. वहीं जो ऐसा करेगा वो हिन्दुओं का कोई हित नहीं करेगा.

फिलहाल सरकार ट्रस्ट बनाएं उससे पहले ट्रस्ट में आने के लिए या ट्रस्ट उनका ही हो जो जताने वाले सामने आने लग गए हैं. वही विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि आप सब कुछ सरकार के हाथ में है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अब सरकार ही अपने अनुसार सही ट्रस्ट बनाएं.

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