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Explained: 145 करोड़ आबादी पर सिर्फ 13,500 ट्रेनें! बिहार में हालत सबसे खराब, क्या फटाफट कैंसिलेशन से मिलने लगेंगे टिकट?

Train Ticket Crisis: रेलवे ने बजट 2026 में बिहार के लिए 10,379 करोड़ रुपए का आवंटन किया है और 17,000 नॉन-एसी कोच बनाने का काम चल रहा है. बिहार में बुलेट ट्रेन और 14 वंदे भारत  ट्रेनों की भी योजना है.

IRCTC की वेबसाइट पर पैसे कटने के बाद टिकट न मिलने की समस्या एक तकलीफ तो है, लेकिन यह समस्या की जड़ नहीं है. रेलवे अगस्त 2026 में नया रिजर्वेशन सिस्टम ला रहा है और 15 जुलाई तक नई IRCTC वेबसाइट आने वाली है. इससे बुकिंग का अनुभव बेहतर होगा, सर्वर क्रैश कम होंगे, लेकिन टिकट मिलेंगे या नहीं, यह तभी तय होगा जब ट्रेनें ही हों. आसान शब्दों में कहें तो अगर किसी दुकान में सामान ही नहीं है, तो दुकान भले दिनभर खुली रहे, सामान तो मिलेगा ही नहीं. IRCTC की वेबसाइट सिर्फ दुकान है. असली समस्या यह है कि आबादी के हिसाब से ट्रेनें ही कम हैं...

बिना ट्रेनों के बिहार वालों को टिकट कैसे मिलेगा?

बिहार के यात्रियों की हालात बहुत खराब है. यहां सफर से 1-2 महीने पहले भी टिकट बुक करेंगे तो वेटिंग हाथ आएगी. आइए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं:

  • होली 2026 के दौरान बिहार जाने वाली ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट 200 से ज्यादा थी. राजेंद्र नगर तेजस एक्सप्रेस और पूर्वा एक्सप्रेस में वेटिंग 200 के पार थी.
  • समर सीजन 2026 में सिवान जंक्शन से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट 150 के पार पहुंच गई. वैशाली सुपरफास्ट, अम्रपाली एक्सप्रेस, बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस और अवध असम एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें पूरी तरह भरी हुई थीं.
  • नई दिल्ली-प्रयागराज वंदे भारत में वेटिंग लिस्ट 260 से ज्यादा पहुंच गई थी.
  • शादी के सीजन में झारखंड-बिहार रूट पर भी वेटिंग 100 के पार थी.

कितने यात्री बिना टिकट के रह जाते हैं?

यह सिर्फ बिहार की नहीं, पूरे देश की समस्या है. IRCTC के मुताबिक, देश की 145 करोड़ आबादी पर 13,500 यात्री ट्रेनें हैं. यानी औसतन हर 1 लाख लोगों पर 0.93 ट्रेन या लगभग 1 ट्रेन प्रति 1.07 लाख लोगों पर हैं.

वित्त वर्ष 2025-26 में 3.39 करोड़ यात्री वेटिंग टिकट कंफर्म न होने की वजह से सफर नहीं कर पाए. यानी हर दिन करीब 92,877 यात्री अपनी ट्रेन नहीं पकड़ पाए. हर घंटे 3,870, हर मिनट 64 और हर सेकंड एक से ज्यादा यात्रियों को टिकट नहीं मिलता है. पिछले पांच सालों में यह आंकड़ा 1.65 करोड़ से बढ़कर 3.39 करोड़ हो गया है.

स्लीपर क्लास के यात्री सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं. बीते साल करीब 1.68 करोड़ यात्रियों के टिकट कैंसल हुए. ये वही लोग हैं जो ट्रेन पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, जैसे प्रवासी मजदूर, छात्र और गरीब परिवार.

बिहार को कितनी ट्रेन की जरूरत है और कितनी मिली हैं?

IRCTC के मुताबिक, बिहार को उसकी कैपिसिटी के मुकाबले बहुत कम ट्रेन आंवटित हैं:

  • बिहार की जनसंख्या लगभग 13 करोड़ है. इतनी बड़ी आबादी को देखते हुए ट्रेनों की संख्या बहुत कम है.
  • हर साल 4 करोड़ से ज्यादा लोग बिहार से दूसरे राज्यों में काम के लिए पलायन करते हैं. लेकिन इतने बड़े पैमाने पर पलायन के बावजूद पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं.
  • दिल्ली-पटना रूट पर पिछले 20 सालों में सिर्फ 10 नई ट्रेनें मिली हैं. यानी दो दशकों में दो सरकारें आईं-गईं, लेकिन इस बेहद व्यस्त रूट पर बस 10 ट्रेनें ही बढ़ीं.

बिहार को कितनी ट्रेनें मिली हैं?

रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक:

  • वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 (अक्टूबर 2024 तक) में बिहार से शुरू या खत्म होने वाली 30 जोड़ी ट्रेनें शुरू की गईं. इनमें 9 जोड़ी वंदे भारत और 1 जोड़ी अमृत भारत शामिल हैं.
  • 15 जोड़ी ट्रेनों का विस्तार किया गया और 2 जोड़ी ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई गई.
  • 2024 में 13,523 स्पेशल ट्रेन ट्रिप होली और गर्मी की छुट्टियों के दौरान चलाई गईं.
  • दुर्गा पूजा, दिवाली, छठ के दौरान 7,990 स्पेशल ट्रेन ट्रिप चलाई गईं, जिनमें करीब 1.8 करोड़ यात्रियों ने सफर किया.
  • पिछले 5 सालों (2021-22 से 2025-26) में 75 जोड़ी ट्रेनें बिहार के स्टेशनों के लिए शुरू की गईं.
  • अमृत भारत एक्सप्रेस की देशभर में 30 सेवाएं हैं, जिनमें से 26 बिहार में चलती हैं.
  • बिहार में पहले से ही 14 वंदे भारत और 21 अमृत भारत ट्रेनें चल रही हैं.

लेकिन क्या यह काफी है?

बिल्कुल नहीं. इतनी बड़ी आबादी और इतने बड़े पलायन के सामने यह ट्रेनें बूंद के बराबर हैं:

  • होली 2026 के दौरान स्पेशल ट्रेनों पर भी वेटिंग लिस्ट 100 से ज्यादा थी.
  • छठ पूजा के दौरान राजनीतिक नेताओं ने भी ट्रेनों की कमी का मुद्दा उठाया.
  • बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान ट्रेनों की कमी की वजह से पाटलिपुत्र स्टेशन पर हिंसा भी हुई. अभ्यर्थियों ने पत्थरबाजी की और ट्रैक जाम किए.

देश में सबसे कम सफर करने के हिसाब से बड़े राज्यों में कम ट्रेनें

यह सिर्फ बिहार की समस्या नहीं है. भारत में रेलवे की डेनसिटी बहुत असंतुलित है:

  • गुजरात में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 42.45 किमी रेलवे लाइन है.
  • कर्नाटक में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर सिर्फ 8.22 किमी रेलवे लाइन है.
  • बिहार जैसे घनी आबादी वाले राज्यों में यह आंकड़ा और भी कम हो सकता है.

भारतीय रेलवे रोजाना करीब 25,000 ट्रेनें चलाता है, जिसमें 13,000 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं. 2025-26 में रेलवे ने 741 करोड़ यात्रियों को ढोया. लेकिन इतनी बड़ी संख्या के बावजूद 3.39 करोड़ लोग बिना टिकट के रह गए. यानी रेलवे ने कितनी भी ट्रेनें चला ली हों, डिमांड उससे कहीं ज्यादा है.

क्या टिकट की कमी की समस्या खत्म हो जाएगी?

एक्सपर्ट्स का मानना है- नहीं. कम से कम अगले कुछ सालों में तो बिल्कुल नहीं. इसकी 4 बड़ी वजहें हैं:

  • जनसंख्या और पलायन: बिहार की 13 करोड़ आबादी में से 4 करोड़ लोग हर साल पलायन करते हैं. यानी हर साल इतनी बड़ी आबादी को ट्रेनों में ढोना पड़ता है. अकेले बिहार की आबादी कई देशों से ज्यादा है, लेकिन ट्रेनें उस हिसाब से नहीं हैं.
  • वेटिंग लिस्ट का बढ़ना: 2021-22 में 1.65 करोड़ लोग वेटिंग की वजह से सफर नहीं कर पाए. 2025-26 में यह आंकड़ा 3.39 करोड़ हो गया. यानी हर साल यह संख्या बढ़ रही है, घट नहीं रही.
  • IRCTC के बदलाव से फर्क नहीं: IRCTC की नई वेबसाइट और टिकट कैंसिलेशन के नए नियम बुकिंग के अनुभव को बेहतर बनाएंगे, लेकिन ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाएंगे . टिकट कैंसिलेशन के नए नियमों के तहत अब   डिपार्चर के 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा. इससे लोग सोच-समझकर बुकिंग करेंगे, लेकिन टिकट की कमी नहीं घटेगी.
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की लिमिट: नई ट्रेनें, नई लाइनें और नए कोच बनने में वक्त लगता है. भले ही पिछले 5 सालों में 1,024 नई ट्रेनें शुरू हुई हों, लेकिन डिमांड इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यह काफी नहीं है.

यह टेक्निकल समस्या नहीं, कैपिसिटी की समस्या

IRCTC की वेबसाइट चाहे कितनी भी तेज हो जाए, कैप्चा चाहे कितना भी आसान हो जाए, सर्वर चाहे कितने भी मजबूत हो जाएं, लेकिन जब तक ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ेगी, टिकट नहीं मिलेंगे. बिहार को चाहिए:

  • ज्यादा लंबी दूरी की ट्रेनें
  • मौजूदा ट्रेनों में ज्यादा कोच
  • त्योहारों और सीजन के हिसाब से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें
  • नई रेल लाइनें और बेहतर कनेक्टिविटी

रेलवे ने 2026 के बजट में बिहार के लिए 10,379 करोड़ रुपए का आवंटन किया है और 17,000 नॉन-एसी कोच बनाने का काम चल रहा है. बिहार में बुलेट ट्रेन और 14 वंदे भारत  ट्रेनों की भी योजना है. लेकिन ये सब चीजें आज नहीं, कल बनेगी.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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