केंद्रीय सचिवालय क्लब की मान्यता रद्द-बेदखली नोटिस मामला, HC ने केंद्र को भेजा नोटिस
क्लब ने हाईकोर्ट में 14 जुलाई के डी-रिकग्निशन यानी मान्यता रद्द करने के आदेश और 17 जुलाई के बेदखली नोटिस को चुनौती दी है. क्लब का कहना है कि केंद्र ने उसके खिलाफ कार्रवाई की है.

केंद्रीय सचिवालय क्लब की मुश्किलें बढ़ाने वाले केंद्र सरकार के दो आदेशों को क्लब ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. क्लब की याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल क्लब को राहत देते हुए केंद्र के आदेशों पर रोक लगाने या यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देने से इनकार कर दिया.
24 अगस्त को हाई कोर्ट करेगा अगली सुनवाई
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने कहा कि उसे नहीं लगता कि अगली सुनवाई तक अधिकारी क्लब के खिलाफ कोई ऐसी कार्रवाई करेंगे, जिससे स्थिति बदल जाए. मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी.
क्लब ने मान्यता रद्द करने के आदेश को दी चुनौती
क्लब ने हाईकोर्ट में 14 जुलाई के डी-रिकग्निशन यानी मान्यता रद्द करने के आदेश और 17 जुलाई के बेदखली नोटिस को चुनौती दी है. क्लब का कहना है कि केंद्र ने उसके खिलाफ कार्रवाई की है. जबकि उसने इन आदेशों पर रोक लगाने की मांग की थी.
मार्च में ही जमीन का आवंटन रद्द हो चुका था
मामले की शुरुआत मार्च में ही हो गई थी. केंद्र सरकार के डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स ने 3 मार्च को क्लब को आवंटित जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था.. इसके बाद जुलाई में क्लब की मान्यता भी खत्म कर दी गई.
याचिका में लगातार नियम तोड़ने का आरोप
केंद्र सरकार ने 14 जुलाई को क्लब की मान्यता रद्द करते हुए उस पर लगातार नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था. आदेश में कहा गया था कि क्लब में कथित तौर पर अवांछित गैरकानूनी और अनुचित गतिविधियों के प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं.
सरकारी कर्मचारियों की सदस्यता भी सवालों के घेरे में
केंद्र के आदेश में यह भी कहा गया कि क्लब लंबे समय से केंद्र सरकार के सेवारत कर्मचारियों की पर्याप्त और प्रतिनिधित्व वाली सदस्यता बनाए रखने में नाकाम रहा. यानी जिस उद्देश्य के लिए क्लब को चलाया जाना था, वह व्यवस्था भी ठीक से कायम नहीं रही.
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का भी आरोप
सरकार ने क्लब की कार्यकारिणी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों को कथित तौर पर पनाह दे रही है जिनका सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा है. आदेश में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण का भी जिक्र किया गया है.
क्लब चलाने वाली वैध कमेटी पर भी सवाल
केंद्र के मुताबिक क्लब के कामकाज को संचालित करने के लिए कोई विधिवत गठित प्रबंधन समिति भी मौजूद नहीं है. सरकार ने इसे भी क्लब के खिलाफ कार्रवाई का एक आधार बनाया है.
17 जुलाई को तत्काल खाली करने का नोटिस
मान्यता रद्द होने के तीन दिन बाद17 जुलाई को डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स ने क्लब को बेदखली नोटिस जारी कर दिया. इसमें क्लब को सरकारी संपत्ति से तत्काल बाहर निकलने का निर्देश दिया गया था.
हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से किया इनकार
क्लब ने कोर्ट से केंद्र के दोनों आदेशों पर रोक लगाने और यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल ऐसा आदेश देने से इनकार कर दिया.. हालांकि, केंद्र से जवाब मांगते हुए मामले को 24 अगस्त के लिए लिस्ट कर दिया है.






















