चीन सीमा पर सेना को रात पर जगना नहीं पड़ेगा, -42°C में भी नहीं जमेगा तेल
Indian Army: लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में भारतीय सेना के टैंक, बख्तरबंद वाहन और अन्य सैन्य गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला सामान्य डीजल अत्यधिक कम तापमान में जमने लगता है.

भारतीय सेना दुनिया के सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाकों में तैनात रहती है. माइनस 50 डिग्री से लेकर प्लस 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में सेना अपने भारी हथियारों और सैन्य साजो-सामान के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करती है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में सैन्य वाहनों का ऑपरेशन होता है. चीन सीमा से सटे हाई-आल्टिट्यूड एरिया में अब सेना को रात भर जागकर टैंक चालू नहीं करना होगा.
-42°C में भी नहीं जमेगा तेल
लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में भारतीय सेना के टैंक, बख्तरबंद वाहन और अन्य सैन्य गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला सामान्य डीजल अत्यधिक कम तापमान में जमने लगता है. इसकी वजह से हर समय जंग के लिए तैयार रखने के मकसद से टैंकों और बीएमपी को रात-रातभर समय-समय पर स्टार्ट करना पड़ता था, ताकि इंजन और पूरा सिस्टम एक्टिव बनी रहे. अब इस समस्या का समाधान निकाल लिया गया है. भारतीय सेना और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने मिलकर ऐसा एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (एक्सडब्ल्यूजी) डीजल विकसित किया है, जो -42 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी नहीं जमेगा.
थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को आधिकारिक तौर पर इस एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल का फ्लैग-ऑफ किया. इस मौके पर जनरल धीरज सेठ ने कहा, 'मैं आर्मर्ड कोर से हूं, इसलिए मूल रूप से एक टैंकमैन रहा हूं. अपने सैन्य जीवन के शुरुआती लगभग 20 सालों तक, जब तक मैं कमांडिंग ऑफिसर नहीं बना, मेरा पूरा कार्यक्षेत्र ईंधन, तेल और लुब्रिकेंट्स, खासतौर पर डीजल के इर्द-गिर्द ही रहा. हमारी जिंदगी सचमुच डीजल पर निर्भर थी.'
अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में मिलेगा लाभ
उन्होंने कहा, 'टैंक में कितना डीजल बचा है, बैरल में कितना ईंधन है और गाड़ी की आखिरी क्रूजिंग रेंज कितनी है, हर बात का केंद्र डीजल ही होता था. हमने अपने पूरे सैन्य जीवन में डीजल के बैरल गिनते हुए और उन्हें अपने टैंकों तक पहुंचाते हुए ही काम किया है.' सेना प्रमुख ने कहा कि वह पूरी तरह समझ सकते हैं कि यह विशेष एक्सडब्ल्यूजी डीजल सेना के 'ए' कैटेगरी के वाहनों, जैसे टैंक और अन्य भारी बख्तरबंद वाहन के साथ-साथ 'बी' कैटेगरी के वाहनों जैसे ट्रक और हल्के सैन्य वाहनों के लिए अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में कितना लाभदायक साबित होगा.
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना का बड़ा हिस्सा उत्तरी सीमाओं और ऊंचाई वाले चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनात रहता है. हालांकि, अपनी रेजिमेंट के साथ वहां सर्व करने का मौका नहीं मिला, लेकिन जिन दोनों रेजिमेंटों में उन्होंने कमांड किया, वे शुरुआती दौर में न्योमा क्षेत्र में पायनियर रेजिमेंट थीं. उनके मुताबिक, यह नया डीजल सिर्फ सेना की ऑपरेशनल क्षमता ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि सैनिकों का मनोबल भी ऊंचा करेगा और अत्यधिक ठंड में होने वाली शारीरिक और मानसिक थकान को भी काफी हद तक कम करेगा.
जनरल धीरज सेठ ने एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल को 'गेम चेंजर' बताते हुए कहा कि भारतीय सेना ने अपनी जरूरत और समस्या को बीपीसीएल के सामने साफ तौर से रखा और दोनों संस्थानों ने मिलकर सिर्फ एक साल के अंदर इसका समाधान विकसित कर लिया. उन्होंने कहा, 'यह वास्तव में एक शानदार उपलब्धि है. मेरी जानकारी के मुताबिक, इस डीजल का पोर पॉइंट माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक है, जबकि इसका फ्लैश पॉइंट लगभग 50 डिग्री सेल्सियस है. यानी यह अत्यधिक ठंड और गर्मी, दोनों परिस्थितियों में प्रभावी रहेगा.'
एक्सट्रीम वेदर ग्रेड ईंधन क्या है?
एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (एक्सडब्ल्यूजी) डीजल एक विशेष प्रकार का ईंधन है, जिसे हाई-एल्टीट्यूड और अत्यधिक ठंडे इलाकों में सैन्य वाहनों के संचालन के लिए विकसित किया गया है. इन क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सामान्य डीजल जमने लगता है, जिससे वाहनों की ऑपरेशनल क्षमता प्रभावित होती है.सामान्य डीजल में पैराफिन वैक्स मौजूद होता है, जो ईंधन को जरूरी चिकनाई और गाढ़ापन देता है. लेकिन तापमान शून्य से काफी नीचे जाने पर यही वैक्स जमने लगता है और डीजल के फ्लो में बाधा पैदा करता है. इससे ऑयल फिल्टर चॉक हो सकते हैं और गाड़ी स्टार्ट होने में दिक्कत आती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए बीपीसीएल ने खास तकनीक की मदद से एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल विकसित किया है.
























