Covid-19: कैंसर है...कोरोना नहीं तो क्या इलाज नहीं होगा?
अगर किसी मरीज को कोरोना नहीं बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी है तो क्या उनका इलाज नहीं होगा.

नई दिल्ली: देश में इस वक्त कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच ही डॉक्टर्स की प्राथमिकता है. ऐसें में कई मरीज जो दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं उनकी अनदेखी हो रही है. अब सवाल उठता है कि क्या अगर किसी को कोरोना नहीं है बल्कि कैंसर जैसी घातक बीमारी है तो उसका इलाज नहीं हो पाएगा. फिलहाल तो देश के कई इलाकों में ऐसा ही देखने को मिल रहा है.
दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के बाहर 14 साल के कैंसर पीड़ित रंजीत ऐसा ही मरीज है. वह पूछता है कि उसे कैंसर है, कोरोना नहीं तो क्या इलाज नहीं होगा. दरअसल 15 मार्च को रंजीत के पिता विजय सिंह यूपी के बस्ती से बेटे को लेकर दिल्ली के एम्स में इलाज कराने आए थे. 14 साल की उम्र में बेटे को ब्लड कैंसर है. बदन कमजोर होता जा रहा है. होंठ सूख रहे हैं, आंखें धंसी नजर आती हैं. ब्लड कैंसर के मरीज को जहां साफ सुथरे माहौल में, सुरक्षित और नियंत्रित खाना मिलना चाहिए. वहां एम्स के बाहर ब्लड कैंसर पीड़ित बेटे के साथ विजय सिंह तंबू के नीचे लाचार होकर रहते हैं.
अब दूसरी दर्दनाक कहानी सुनिए, इंदौर में एक मां की गोद में 10 साल की प्रिया है. उसके गले में छेद है. प्रिया की मां कहती है कि उनकी बेटी को तुरंत इंफेक्शन होता है, टेंस्ट हो जाए तो खत्म हो जाएगा.
देश जब पूरी ताकत से कोरोना के मरीजों को बचाने और कोरोना से देशवासियों की रक्षा में जुटा है तब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन मरीजों का इलाज नहीं होगा जिन्हें कोरोना तो नहीं है, लेकिन कोरोना से कम खतरनाक बीमारी भी नहीं है.
ऐसी स्थिति में कई गंभीर सवाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर उठते हैं जैसे कोरोना का इलाज जरूरी है तो क्या दूसरी गंभीर बीमारियों का नहीं?. कोरोना नहीं है तो क्या दूसरे गंभीर बीमारी से पीड़ित इलाज को भटकेंगे ?. कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के मरीजों को ठहराने का सुरक्षित इंतजाम क्यों नहीं कर पाईं सरकारें ?
स्वास्थ्य मंत्रालय की सफाई
इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि छोटी बीमारी हो तो अस्पताल ना जाएं, ऑनलाइन टेलीमेडिसिन के जरिए सपोर्ट ले सकते हैं. कोई प्लान की हुई सर्जरी है तो नजरअंदाज कर सकते हैं तो करें. जरूरी सर्जरी के लिए अस्पतालों के इमरजेंसी में सुविधा मिल सकती है. अभी ध्यान इस बात पर है कि कैसे कम से कम वायरस फैले.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का बयान
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जिन्हें कोरोना नहीं उन्हें भी समय पर इलाज मिलना जरूरी है. जो अस्पताल इलाज में कोताही बरतते हैं, उन पर कार्रवाई करेंगे.
























