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चीन सीमा पर तनाव के बीच लद्दाख में बनी दुनिया की सबसे ऊंची सड़क, सेना को PP 17 तक पहुंचने में होगी आसानी

हॉट-स्प्रिंग का पीपी नंबर 17 वही जगह है जहां पिछले दो महीने से भारत और चीन के सैनिकों के बीच फेसऑप चल रहा था. हालांकि, 30 जून को दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की बैठक के बाद पीपी-17 से दोनों देशों के सैनिक 2-2 किलोमीटर पीछे हट गए थे,

लेह: चीन सीमा पर चल रहे तनाव के बीच खबर है कि बीआरओ ने पूर्वी लद्दाख में दुनिया की सबसे ऊंची सड़क का काम लगभग पूरा कर लिया है. ये रोड दुनिया के सबसे उंचे दर्रे, मरसिमक-ला से गुजरती है और पेंगोंग-त्सो झील से सटे लुकुंग और फोबरांग को एलएसी के हॉट-स्प्रिंग से जोड़ती है. हॉट-स्प्रिंग एलएसी का वही विवादित इलाका है जहां इनदिनों भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव चल रहा है. एबीपी न्यूज के पास इस‌‌ सड़क की एक्सक्लुजिव तस्वीरें हैं.

सूत्रों के मुताबिक, मरसिमक-ला रोड की कुल लंबाई 75 किलोमीटर है और ये करीब 18,953 फीट की ऊंचाई तक जाती है.‌ सरकार ने वर्ष 2017 में डोकलम विवाद के तुरंत बाद बीआरओ यानि बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन कए इस सड़क को बनाने की मंजूरी दी थी. जानकारी के मुताबिक, कुछ जगह पर ब्लैक-टॉपिंग को छोड़कर पूरी सड़क लगभग बनकर तैयार है. ऐसे में ये दुनिया की सबसे ऊंची 'मोटरेबल-रोड' बन गई है.

चीन सीमा पर तनाव के बीच लद्दाख में बनी दुनिया की सबसे ऊंची सड़क, सेना को PP 17 तक पहुंचने में होगी आसानी

इसके बनने से सैनिकों की मूवमेंट, पैंगोंग त्सो लेक से हॉट-स्प्रिंग तक बहुत तेजी से हो सकती है. पहले सैनिकों को यहां ट्रैकिंग करके जाना पड़ता था, जिससे एलएसी के पैट्रोलिंग पॉइंट (पीपी) नंबर 17 तक पहुंचने में काफी वक्त लगता था. लेकिन इस सड़क के बनने से सैनिक चंग-चेनमो नदी तक सड़क के जरिए पहुंच सकते हैं, और वहां से ट्रैकिंग करके जल्द ही हॉट-स्प्रिंग पहुंच सकते है, जो नजदीक ही है.

हॉट-स्प्रिंग का पीपी नंबर 17 वही जगह है जहां पिछले दो महीने से भारत और चीन के सैनिकों के बीच फेसऑप चल रहा था. हालांकि, 30 जून को दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर की बैठक के बाद पीपी-17 से दोनों देशों के सैनिक 2-2 किलोमीटर पीछे हट गए थे, लेकिन अभी भी पूरी पूर्वी लद्दाख से सटी लाइन ऑफ एक्चुयल कंट्रोल (यानि) एलएसी पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.‌

आपको बता दें कि अभी तक दुनिया की सबसे ऊंची रोड, खरदुंगला पास (दर्रे) से होकर गुजरती की, जो करीब 18,380 फीट की ऊंचाई पर है. ये सड़क भी लद्दाख में है और नुब्रा वैली के जरिए लेह को सियाचिन बेस कैंप से जोड़ती है. दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची सड़क भी पूर्वी लद्दाख में है. ये लेह को चांगला पास यानि दर्रे (ऊंचाई करीब 17,586 फीट) से दुरबुक के जरिए गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो लेक से जोड़ता है.

चीन सीमा पर तनाव के बीच लद्दाख में बनी दुनिया की सबसे ऊंची सड़क, सेना को PP 17 तक पहुंचने में होगी आसानी

आपको बता दें कि एलएसी के बेहद करीब वाले इलाकों में भारत द्वारा सड़क और दूसरा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने से ही चीन भन्नाया हुआ है. हालांकि, चीन अपने क्षेत्र में काफी पहले ही सड़क और हाईवे का जाल बिछाए हुए है, जिससे चलते उसके सैनिक एलएसी तक सैन्य-गाड़ियों तक आते हैं,लेकिन अब उसे भारत के निर्माण-कार्यों से मुश्किल आ रही है.

कुछ दिनों पहले एबीपी न्यूज से बात करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य, लेफ्टिनेंट जनरल एस एल नरसिम्हन ने भी कहा था कि भारत द्वारा अपने क्षेत्र में सड़क बनाने से ही चीन सेना से टकराव की स्थिति ज्यादा पैदा हो रही है. क्योंकि अब दोनों देशों के सैनिक तेजी से एलएसी पर पैट्रोलिंग के लिए पहुंच जाते हैं. आमना सामना ज्यादा होने से ही टकराव की नौबत ज्यादा आ रही है. जबकि पहले चीन के सैनिक ही ऐसा कर पाते थे.

भारत-चीन के बीच चौथे दौर की बैठक पूरे 14 घंटे चली इस‌ बीच सीमा पर डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के दूसरे चरण के लिए भारत और चीन के कोर कमांडर स्तर की चौथे दौर की बैठक पूरे 14 घंटे चली. सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक देर रात 2 बजे तक चली. सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में एलएसी पर सभी जगह पर डिसइंगेजमेंट पर बात हुई. एलएसी पर दोनों देशों की सेनाओं के हेवी बिल्ट-अप को कम करने के साथ साथ फिंगर एरिया और डेपसांग प्लेन्स पर चर्चा हुई.

भारत ने चीनी सेना के फिंगर एरिया नंबर 4 की रिज-लाइन पर मौजूद चीनी सैनिकों का मुद्दा भी मीटिंग में उठाया. इसके अलावा फिंगर 8 से फिंगर 5 तक भी चीनी सेना बड़ी तादाद में मौजूद है.‌ दोनों देशों की सेनाओं के बीच टकराव करने के लिए बेहद जरूरी है कि चीनी सैनिक यहां अपना जमावड़ा कम करे. ये भी भारतीय पक्ष ने कहा.

दौलत बेग ओल्डी यानि डीबीओ के करीब डेपसांग प्लेन्स में भी भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है.‌ डेपसांग प्लेन्स का मुद्दा भी इस मीटिंग का हिस्सा था. इसके अलावा एलएसी पर दोनों देशों के सैनिकों की संख्या को कम करने का मुद्दा भी इस मीटिंग के एजेंडे में है.‌ माना जा रहा है भारतीय सेना कोई आधिकारिक बयान जारी करे मीटिंग को लेकर.

नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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