खाप के खौफ में भी बदल रहा है हरियाणा, अंतरजातीय विवाह का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है
प्रोत्साहन राशि बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार के इस कदम की तारीफ हुई थी लेकिन अभी युवक-युवतियां अंतरजातीय विवाह कर पूरी तरह से सुरक्षित नहीं महसूस करते हैं. उन्हें समाज, माता पिता और सगे संबंधियों का डर हमेशा सताते रहता है.

चंडीगढ़ः हरियाण में साल दर साल अतंरजातीय विवाह करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है. पिछले पांच सला से हर वर्ष युवक युवतियां जाति की दीवार को तोड़कर नई इबारत लिख रहे हैं. धीरे-धीरे ही सही ये युवा खाप पंचायत के उस तुगलकी फरमान को धता बताने की कोशिश में लगे हुए हैं जिनके कारण कई लोगों का प्यार परवान तो चढ़ता था लेकिन मौत की आगोश में जाकर टूट जाता था. खाप के खौफ के कारण ही अंतरजातीय विवाह करने वाले युवक युवतियों को समाज से बेदखल कर दिया जाता था.
एक दौर था जब इस तरह की शादी करने वालों को समाज बहिष्कृत कर देता था या माता-पिता बेदखल कर देते थे. कई मामलों में तो झूठी शान में कत्ल भी कर दिया जाता था. हत्या के डर से लड़के-लड़कियां अंतरजातीय विवाह करने के बाद घर नहीं लौटते थे या लौटते थे तो सामाजिक डर के साय में जीने को मजबूर होते थे.
धीरे धीरे ही सही लेकिन युवकों के मन से यह डर निकल रहा है. परिवार और समाज के लोग उन्हें अपना रहे हैं. ऐसे प्रेमी जोड़े जो अंतरजातीय शादी कर रहे हैं वह अब अपने परिवार और समाज के नजरिए से खुश दिखाई दे रहे हैं.
अंतरजातीय विवाह की रुकावट का तिलिस्म धीरे-धीरे ही सही लेकिन टूटने लगा है. खोजने पर इसके कारण दिखाई देंगे. लेकिन ऐसा माना जाता है कि राज्य में जागरुकता बढ़ने के बाद अब वहां के माता-पिता और समाज के लोग जागरुक हुए हैं. सोशल मीडिया के इस दौरा में लगातार बेटियों के प्रति जागरुकता फैलाई जा रही है और अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है. इस कारण भी घर के बड़े-बुजुर्ग भी इस विषय पर धीरे-धीरे उदार रवैया अपना रहे हैं.
इतना ही नहीं हरियाण में गिरते लिंगानुपात को लेकर केंद्र और राज्य सरकार भी चिंतित थी इस कारण सूबे से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को लॉन्च किया था. माना जा रहा था कि इसका भी अच्छा असर देखने को मिलने लगा है.
अंतरजातीय विवाह में प्रोत्साहन राशि बढ़ना अहम कारण
सूबे की सरकार ने अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़े को मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह शगुन योजना के तहत 2.50 लाख रुपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में देने का निर्णय लिया है. हालांकि पहले यह राशि 1.01 लाख रुपये होती थी.
माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से भी समाज के लोगों के बीच बदलाव को महसूस किया जा रहा है. शादी के बाद ऐसे जोड़े अब समाज के बची सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और समाज भी उन्हें स्वीकर कर रहा है. प्रोत्साहन राशि बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार के इस कदम की तारीफ भी हुई थी.
अतंरजातीय विवाहों की संख्या में बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार साल में अतंरजातिय विवाह करने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इस साल के छह महीने का आंकड़ा काफी खुश करने वाला है. साल 2014-15 में राज्य में जहां 249 अंतरजातीय जोड़े परिणयसूत्र में बंधे तो 2015-16 में यह आंकड़ा बढ़कर 359 हो गया. वहीं 2016-17 में यह आंकड़ा 465 तक पहुंच गया जबकि 2017-18 में 608 युवक-युवतियों ने शादी रचाए. 2018-19 साल का ताजा आंकड़ा काफी अच्छा है. सिर्फ छह महीने में ही ये संख्या (1 सिंतबर) तक 585 तक पहुंच गया है जबकि अभी कई महीनें बाकी हैं. माना जा रहा है कि यह आंकड़ा इस साल एक हजार तक पहुंच सकता है.
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Source: IOCL





















