‘सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कुछ नहीं कहा’, E20 को एक्सपेरिमेंट बताने वाले दावे पर सरकार का बड़ा बयान
Supreme Court: सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सभी मामलों की एक साथ सुनवाई होने से विवाद का जल्द समाधान होगा और तेल कंपनियों को एथेनॉल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहेगी.

- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर याचिकाएं स्वीकारीं, आवंटन जारी।
केंद्र सरकार ने मंगलवार (30 जून, 2026) को E20 यानि 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत बताया है. सरकार ने कहा कि कुछ खबरों में दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट में भारत के अटॉर्नी जनरल ने E20 कार्यक्रम को एक प्रयोग (एक्सपेरिमेंट) बताया है और कहा है कि इसका असर अगले साल तक पता चलेगा. सरकार ने साफ किया कि कोर्ट में ऐसी कोई बात कही ही नहीं गई है.
यह मामला भारत पेट्रोलियम की ओर से एथेनॉल आवंटन को लेकर दायर विशेष अनुमति याचिका से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एथेनॉल आवंटन से जुड़े कई समान मामले अलग-अलग हाई कोर्ट में लंबित हैं. ये मामले डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट्स को एथेनॉल आवंटन से जुड़े हैं.
सरकार ने कोर्ट को बताया कि इन सभी मामलों को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में लाने के लिए ट्रांसफर याचिकाएं दायर की जा रही हैं, ताकि अलग-अलग अदालतों से अलग-अलग फैसले आने की स्थिति न बने और पूरे मामले का एक साथ निपटारा हो सके.
E20 ब्लेंडिंग जारी रखने पर सरकार का जोर
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने यह भी कहा कि सभी मामलों की एक साथ सुनवाई होने से विवाद का जल्द समाधान होगा और तेल कंपनियों को एथेनॉल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहेगी. इससे पूरे साल पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग का कार्यक्रम भी प्रभावित नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रांसफर याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दी और फिलहाल एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन की मौजूदा व्यवस्था बनाए रखने का आदेश दिया.
सरकार की दो टूक सफाई
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट में किसी भी समय E20 कार्यक्रम को प्रयोग नहीं बताया गया. सरकार के मुताबिक, इस तरह की मीडिया रिपोर्ट्स कोर्ट में दी गई दलीलों को सही तरीके से पेश नहीं करतीं और तथ्यों से मेल नहीं खातीं. इसी दौरान सरकार ने अपील की है कि अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग पूरी सटीकता और जिम्मेदारी के साथ की जाए, खासकर तब जब मामला देश की किसी महत्वपूर्ण नीति से जुड़ा हो.
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