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EXCLUSIVE: CAA विरोध पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कही ये बात

एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने ट्रिपल तलाक कानून से लेकर सीएए तक जैस मुद्दों पर अपनी बात रखी. ये रहे उनकी बातचीत के कुछ अंश....

नई दिल्ली: सीएए को लेकर चल रहे विरोध के बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि यहां एक नए तरह का प्रयोग चल रहा है. सीएए का विरोध करने के लिए मुस्लिम समाज ने महिलाओं को आगे किया है. ये महिलाएं भले ही गुमराह हो, गलत बात का विरोध कर रही हैं. लेकिन ट्रिपल तलाक कानून के बाद एक बात तो तय हुई है कि मुस्लिम समाज की महिलाओं की स्थिति में बदलाव आया है. जिन महिलाओं को यह समाज हमेशा दबा कर रखता था, आज उस समाज की महिलाएं सड़क पर उतर आई हैं. निश्चित रूप में अब मुस्लिम समाज महिलाओं की आवाज को दबा नहीं सकेगा. मुस्लिम महिलाएं भी दूसरे लोगों की तरह कदम से कदम मिलाकर चलती नजर आएंगी.

दरअसल रविवार को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान दिल्ली के दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत की.आरिफ मोहम्मद खान ने कहा केरल के लोग बहुत ही देश प्रेमी है. देश के लिए हमेशा मर मिटने के लिए तैयार रहते हैं. केरल में राजनैतिक विरोध पर उन्होंने कहा राजनीतिक पार्टियां अथवा कोई व्यक्ति मेरा विरोध कर सकता है. लेकिन केरल की जनता से मुझे बहुत प्यार मिलता है.

सीएए कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा हमारे देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ. इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. पाकिस्तान तो इस्लामिक देश बन गया है. लेकिन हमारे देश मे हम सब भारतीय हैं. यूनाइटेड नेशन भी कहता है धार्मिक प्रताड़ित लोगों को शरण दी जाए. यदि भारत में धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों को नागरिकता देने के लिए कानून बनाया है. तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. जो लोग विरोध कर रहे हैं. उनके पास विरोध करने लायक कोई भी बात नहीं है.

पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर भी रखी अपनी बात पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति क्या थी और क्या हो गई है. मैं इस पर नहीं जाऊंगा. लेकिन वहां के हालात कितने बदतर हैं, इसका अंदाजा हाल ही में पाकिस्तान की एक एनजीओ औरत की रिपोर्ट से पता चलता है. हाल में पाकिस्तान की एक संस्था औरत ने 2019 का जिक्र करते हुए एक रिपोर्ट दी है. जिसमें एक साल में 1000 हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करके उनकी जबर्दस्ती शादी ऐसे लोगों से कर दी गई. जिनकी पहले से ही शादी हो चुकी है.

अगर भारत में इस तरह की एक-दो घटनाएं हो जाती है. तो पूरा देश पैरों पर खड़ा हो जाता है. सेकुलरिज्म के ठेकेदार क्यों नहीं इस बात के लिए आवाज उठाते कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ यह क्या हो रहा है. नागरिकता कानून का विरोध करने की बजाय अगर सब लोग एक साथ पाकिस्तान पर दबाव बनाते, तो शायद पाकिस्तान में मौजूद अल्पसंख्यकों के साथ ऐसी स्थिति ना होती.

ट्रिपल तलाक कानून आने के बाद महिलाएं घर से बाहर निकली शाहीनबाग में महिलाओं के प्रदर्शन पर बोलते हुए आरिफ मोहम्मद ने कहा ट्रिपल तलाक कानून आने के बाद महिलाएं घर से बाहर निकली हैं. अब उन्हें कोई रोक नहीं सकता. गलत बात का विरोध ही सही. लेकिन अब महिलाएं घर से निकली तो हैं.

अमेरिकी एजेंसी द्वारा सीएए को लेकर दी रिपोर्ट पर उन्होंने कहा कि क्या अमेरिका किसी को ऐसे ही अपने देश में घुसने की इजाजत दे सकता है. नहीं दे सकता. लेकिन धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों को शरण देने के लिए यूएन भी कहता है.

राज्यों के सीएए कानून न लागू करने के प्रस्तावों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ये वही बात हो गई कि जिसका मुझे अधिकार ही नहीं. उसी को किये जा रहा हूं. केरल सरकार को भी अधिकार नहीं है.थोड़े दिन बाद अपने आप समझ आ जायेगा.

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