ओडिशाः पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किसान चींटियों के अंडे खाने को मजबूर
नायक ने ओडिशा में पहाड़ काटकर सिंचाई के लिए 3 किलोमीटर लंबी नहर का रास्ता बना दिया था. इस कार्य के बाद राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था.

भुवनेश्वर: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री से सम्मानित ओडिशा के किसान दैतारी नायक अपना पुरस्कार लौटाना चाहते हैं. पुरस्कार लौटाने को लेकर उन्होंने तर्क दिया है कि उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है और यह सम्मान उन्हें किसी भी तरह से मदद नहीं कर रहा है.
दैतारी नायक ने कहा, ''पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद भी मेरी स्थिति जस की तस है. पहले मुझे हर दिन काम मिल जाता था लेकिन अब लोग मुझे काम भी नहीं देते हैं. लोग सोचते हैं कि रोजाना का काम मेरी हैसियत से कम है. हमारी स्थिति यह हो गई है कि अब मुझे चींटी के अंडे खाकर गुजारा करना पड़ रहा है.
नायक ने कहा, ''अब मैं तेंदू पत्ता और आम का पापड़ बेचकर अपना घर चला रहा हूं. पद्मश्री अवॉर्ड की कोई कीमत नहीं है मेरे लिए. मैं यह पुरस्कार लौटाना चाहता हूं जिससे की मुझे कुछ काम मिल जाए.''
बता दें कि दैतारी नायक तब चर्चा में आए थे जब इसी साल उन्हें राष्ट्रपति ने अपने हाथों से पद्मश्री अवॉर्ड दिया था. राष्ट्रपति ने उन्हें यह अवॉर्ड नहर खोदने के लिए दिया था. नायक ने तीन किलोमीटर पहाड़ को काटकर नहर के लिए रास्ता बनाया था. नहर बनने के बाद आसपास के जमीन काफी उपजाऊ बन गए थे.
नायक ने कहा कि मुझे अपना परिवार चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मुझे सरकार की ओर से मात्र 700 रुपये प्रति महीना पेंशन मिलता है. परिवार चलाने में हो रही दिक्कतों को लेकर नायक ने अवॉर्ड में मिले मेडल को वहां टांग दिया जहां बकरियां बांधते हैं.
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