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Explained: पहले हरदीप सिंह पुरी ने कहा- 'सब ठीक', फिर नितिन गडकरी ने माना- 'माइलेज घटेगा', आखिर क्या है सच?

E20 Petrol Controversy: E20 देश का मानक ईंधन है और इसका मकसद तेल आयात कम करना, किसानों को फायदा और प्रदूषण घटाना है. सरकार को आम लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेना होगा और जांच करानी होगी.

6 दिन पहले यानी 4 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था, 'E20 पूरी तरह सफल है, किसी को कोई दिक्कत नहीं है.' लेकिन 10 जुलाई 2026 को सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने खुद कहा,'E20 से माइलेज पर असर पड़ेगा.' इन्हीं दो बयानों ने देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ आम लोग सोशल मीडिया पर अपनी गाड़ियों के माइलेज घटने और इंजन खराब होने की शिकायतें कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के दो बड़े मंत्री अलग-अलग बातें कह रहे हैं. आखिर चल क्या रहा है, क्या वाकई माइलेज पर फर्क पड़ेगा और बयानों के मायने क्या हैं...

E20 पेट्रोल पर बवाल क्या है?

E20 का मतलब है 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण. इथेनॉल गन्ना और मक्का जैसी फसलों से बनता है. सरकार ने अप्रैल 2026 से देशभर में E20 पेट्रोल को मानक ईंधन बना दिया. इससे पहले E10 (10% इथेनॉल) चलता था, जिसके लिए ज्यादातर पुरानी गाड़ियां डिजाइन की गई थीं.

सरकार का कहना है कि इससे तेल आयात कम होगा, किसानों को फायदा होगा और प्रदूषण घटेगा. भारत ने 2013-14 में 1.5% इथेनॉल ब्लेंडिंग से शुरू करके 2025-26 तक 20% का लक्ष्य 5 साल पहले ही हासिल कर लिया.

दिक्कतों की जड़ यह है कि इथेनॉल अल्को्हल है. इसकी दो बड़ी कैमिकल प्रॉपर्टीज हैं जो गाड़ी के लिए सिरदर्द बन सकती हैं:

  • पानी सोखने की आदत: इथेनॉल हवा से नमी खींचता है. जब पेट्रोल में पानी की मात्रा बढ़ जाती है तो ‘फेज सेपरेशन’ होता है यानी इथेनॉल और पानी नीचे बैठ जाते हैं और ऊपर पेट्रोल रह जाता है. यह निचली परत सीधे इंजन में जाकर जंग और खराब कंबस्शन पैदा करती है.
  • रबर और प्लास्टिक की गलन: पुरानी गाड़ियों की फ्यूल लाइनें, सील और गैस्केट एथेनॉल-रेसिस्टेंट मटेरियल से नहीं बने होते. इथेनॉल इन्हें धीरे-धीरे गला देता है, जिससे ईंधन रिसाव और महंगी मरम्मत का खतरा पैदा होता है.

पहले बोले हरदीप सिंह पुरी- 'सब ठीक है, कोई दिक्कत नहीं'

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 को लेकर साफ कहा, 'देश में 20 करोड़ दोपहिया और करीब 20 लाख कारें E20 पेट्रोल का इस्तेमाल कर रही हैं और किसी को कोई दिक्कत नहीं है.'

पुरी ने बताया कि भारत में पिछले साढ़े तीन साल से E15 और अप्रैल 2025 से E20 इस्तेमाल हो रहा है. कार-बाइक कंपनियां और मैकेनिक दोनों मान चुके हैं कि E20 से इंजन में कोई खराबी नहीं आ रही. पुरी ने यह भी कहा कि सरकार अब E25 (25% इथेनॉल) पर टेस्टिंग कर रही है. उन्होंने E20 को 'पूरी तरह सफल' बताया.

फिर बोले नितिन गडकरी- 'माइलेज घटेगी, पर गाड़ी खराब नहीं होगी'

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी. उन्होंने सबसे पहले माना कि E20 से माइलेज पर असर पड़ेगा क्योंकि इथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू (ऊर्जा) पेट्रोल से कम होती है. गडकरी ने कहा, 'इथेनॉल और पेट्रोल की कैलोरिफिक वैल्यू में अंतर है और यह एक फैक्ट है.'

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर मामलों में यह असर बहुत मामूली होगा. गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा, 'दिल्ली-गुरुग्राम के रुक-रुक कर चलने वाले ट्रैफिक में आप लगातार ब्रेक लगाते हैं, स्पीड 40-50 से ऊपर नहीं जाती. लेकिन अगर आप 100 किमी/घंटा की लगातार स्पीड पर चलते हैं, तो कुछ अंतर दिख सकता है.'

गडकरी ने E20 से इंजन खराब होने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'मुझे एक भी ऐसी कार दिखाओ जो E20 की वजह से खराब हुई हो. सोशल मीडिया पर जो चल रहा है, वह एक झूठी कहानी का हिस्सा है.'

गडकरी ने यह भी बताया कि E20 को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और वाहन कंपनियों के कई टेस्ट के बाद ही लॉन्च किया गया. पुरानी गाड़ियों के लिए कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि सर्विसिंग के दौरान कुछ पार्ट्स (जैसे वॉशर) मुफ्त में बदलें.

तो फिर क्यों E20 पर मचा है बवाल?

केंद्र सराकर के बयान के बावजूद आम लोगों की शिकायतें थम नहीं रही हैं. सोशल मीडिया पर हजारों लोग इंजन के खराब होने, माइलेज घटने और परफॉर्मेंस पर असर की शिकायत कर रहे हैं. कुछ लोगों ने तो दिल्ली में प्रदर्शन भी किया.

बड़ी समस्या यह है कि पुरानी गाड़ियां (जो E10 के लिए बनी थीं) अब E20 से चल रही हैं. हालांकि अनब्लेंडेड पेट्रोल (बिना इथेनॉल वाला) अब भी मिलता है, लेकिन वह 40-50% ज्यादा महंगा है. यानी आम आदमी के पास कोई विकल्प नहीं है. ARAI की रिपोर्ट ने भी पुरानी E10-कंपैटिबल गाड़ियों में रबर फ्यूल-सिस्टम पार्ट्स पर खतरे की बात कही है.

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को गंभीरता से उठाया. केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर साफ जवाब मांगा कि क्या E20 से पुरानी गाड़ियों को नुकसान होगा. केजरीवाल ने कहा कि कुछ कंपनियों के मैनुअल में E20 की जगह E10 की सलाह दी गई है. उन्होंने कंपनियों से लिखित आश्वासन मांगा कि E20 से न तो माइलेज घटेगा और न ही इंजन खराब होगा.

आखिर E20 पेट्रोल को लेकर सच क्या है?

नितिन गडकरी ने आलोचकों को खुली चुनौती दी है, 'अगर E20 पेट्रोल से एक भी कार, बाइक या स्कूटर खराब हुआ है, तो नाम बताइए.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि E20 के खिलाफ 'झूठी और पेड मुहिम' चलाई जा रही है. वहीं, हरदीप सिंह पुरी ने साफ कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आम जनता को E20 से कोई दिक्कत है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, E20 से माइलेज पर असर पड़ेगा, यह सच है. गडकरी ने खुद इसे माना है. इथेनॉल में पेट्रोल से कम ऊर्जा होती है, इसलिए माइलेज थोड़ी कम होना स्वाभाविक है. कंपनियों ने भी 3-3.5% माइलेज घटने की बात कही है. कुछ अनुमानों के मुताबिक यह 4-12% तक हो सकती है.

दूसरी ओर E20 से इंजन खराब होने के कोई ठोस सबूत नहीं है. सरकार, ARAI और कंपनियों का कहना है कि टेस्टिंग के बाद ही E20 लॉन्च किया गया. मारुति सुजुकी ने कहा कि उसने 1.5 करोड़ से ज्यादा पुरानी गाड़ियों   की सर्विसिंग की, जिनमें E20 से जुड़ी कोई खराबी नहीं मिली. लेकिन बड़ी समस्या यह है कि सरकार ने बहुत जल्दी (सिर्फ 3 साल में) यह बदलाव कर दिया. ब्राजील जैसे देशों ने यह बदलाव 40 साल में किया. अमेरिका में भी E20 वैकल्पिक है, अनिवार्य नहीं.

E20 पेट्रोल को लेकर दो मंत्रियों के बयानों में कोई बड़ा विरोधाभास नहीं है, लेकिन असली मसला पुरानी गाड़ियों और आम लोगों के अनुभवों का है. सोशल मीडिया पर हजारों शिकायतें आ रही हैं, लेकिन सरकार उन्हें 'फेक न्यूज' कह रही है. विपक्ष ने भी इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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