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डोनाल्ड ट्रंप के दौरे से भारत के खाते का जमा-हासिल

पिछले आठ महीन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप आठ बार मिल चुके हैं. अपने चुनावी अभियान के बीच ट्रंप केवल भारत की यात्रा पर आ रहे हैं ये भी अपने आप में अहम हैं. इस यात्रा पर ट्रंप पूरे परिवार के साथ आ रहे हैं. यह भी अपने आप में सकारात्मक रुख को दर्शाता है.

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका की दोस्ती ने बीते दो दशकों में बदलाव के बड़े मुकाम देखे हैं. अमेरिका के प्रमुख रक्षा साझेदार भारत के दौरे पर आ रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 24-25 फरवरी की यह यात्रा जहां सहयोग का नया रोडमैप बनाएगी. वहीं आपसी फायदे के नए दरवाज़े भी खोलेगी.

राष्ट्रपति ट्रम्प की इस यात्रा के दौरान 10 अरब डॉलर से ज़्यादा के सहयोग समझौतों का रास्ता बनेगा. वहीं रणनीतिक लक्ष्यों को साधने वाली की सीढ़ियां बनाने में भी मदद मिलेगी. नौसेना और वायुसेना के लिए बड़े हथियार खरीद सौदों को अलग रखते हुए भारत की नज़र से देखें तो इस यात्रा में ऐसा बहुत कुछ है जो भारत की मौजूदा दौर ज़रूरतों को पूरा कर सकता है.

अपने चुनावी अभियान के बीच ट्रंप का केवल भारत आना अहम

सबसे पहले तो राष्ट्रपति ट्रम्प का अपने चुनावी अभियान के बीच केवल भारत की यात्रा पर आना ही अपने आप में अहमियत रखता है. यह अमेरिका समेत कई मुल्कों में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने या नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों को लेकर उभरे भारत आलोचना के सुरों को जवाब देता है. इसके अलावा ट्रम्प के चुनावी मौसम में हो रही यह यात्रा भारत को एक ऐसे नेता के साथ रिश्तों में निवेश करने का मौका देगी जो फिलहाल एक बार फिर दूसरे कार्यकाल के लिए व्हाइट हाऊस पहुंचता नज़र आ रहा है. ऐसे में ट्रम्प जैसे साथ दोस्ती मजबूत करना भारत की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थित को भी मजबूती देगा. साथ ही कई बड़े और कड़े फैसलों के लिए सहूलियतों का रास्ता आसान बनाएगा. अपने परिवार के साथ यात्रा कार्यक्रम बनाकर ट्रम्प ने भी भारत के लिए काफी सकारात्मकता दिखाई है.

'डोनाल्ड ट्रंप से दोस्ती एशिया में भारत की स्थिति को अधिक ताकत देगी'

पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति की इस यात्रा से फौरी तौर पर कोई बड़ा फायदा नहीं होता दिख रहा हो. लेकिन भविष्य में होने वाले कारोबार समझौते समेत ऐसे कई करार हैं जिनको लेकर बातचीत होगी और आगे का रास्ता साफ होगा. अमेरिका इन दिनों एशिया में काफी दिलचस्पी दिखा रहा है. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दोस्ती एशिया में भारत की स्थिति को अधिक ताकत देगी.

बीस सालों के दौरान अमेरिका से करीबी भारत के लिए मददगार साबित हुई

महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति क्लिंटन की भारत यात्रा से लेकर डोनाल्ड ट्रम्प के आगामी दौरे तक, बीस सालों के दौरान अमेरिका से करीबी भारत के लिए मददगार साबित हुई है. मामला आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनाने का हो या फिर बालाकोट एयर स्ट्राइक या सर्जिकल स्ट्राइक जैसे आतंकवाद निरोधक कार्रवाई का, अमेरिका के साथ ने भारत की ताकत बढ़ाई है. वहीं अमेरिका के साथ तालमेल ने मसूद अजहर जैसे आतंकी को यूएन में ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कराने में अहम भूमिका निभाई. वहीं अमेरिका और भारत दोनों ही देशों में राजनीतिक खेमों से परे इस बात पर एक राय है कि दोनों मुल्कों के बीच साझेदारी के दूरगामी फायदे हैं.

'पारंपरिक रूप से अमेरिका में बसे भारतीय डेमोक्रेट्स को वोट करते आए हैं'

बहरहाल, पेशेवर बिजनेसमैन से राजनेता बने ट्रम्प लेनदेन का गणित बखूबी जानते हैं. लिहाज़ा उन्हें इस बात का भी एहसास है कि भारत का दौरा उन्हें चुनाव के दौरान नया मतदाता आधार जुटाने में भी मदद कर सकता है. पूर्व राजनयिक दिलीप सिन्हा कहते हैं कि अमेरिका में लगभग 4000000 भारतीय रहते हैं. पारंपरिक रूप से अमेरिका में बसे भारतीय डेमोक्रेट्स को वोट करते आए हैं. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश होगी कि भारत में जाकर ज्यादा से ज्यादा अमेरिका में बसे भारतीय वोटरों को लुभाया जा सके.

बीते 8 महीनों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप पांच बार मिल चुके हैं

भारत की उम्मीदों और हासिल के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रवीश कुमार का कहना था कि, इस यात्रा को संबंधों में परिपक्वता के एक निश्चित चरण तक पहुंचने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. दो लोकतंत्रों के नेताओं के बीच हो रही नियमित बैठकें हमारे दोनों देशों के बीच बढ़ती सहझता की निशानी है. साथ ही दोनों नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से इस रिश्ते में निवेश किया है. ध्यान रहे कि बीते 8 महीनों में दोनों नेता 5 बार मिल चुके हैं.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प की पहली और एक ऐसी यात्रा है जिसमें वो भारत के अलावा और किसी मुल्क का दौरा नहीं कर रहे. यह सम्बन्धों की अहमियत को बताता है. लिहाज़ा भारत इस अवसर का लाभ व्यापक विस्तार वाले द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार में करेगा.

इस बीच राष्ट्रपति ट्रम्प की यात्रा तैयारियों से जुड़े उच्च पदस्थ आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प की यात्रा के दौरान ऊर्जा, रक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, निवेश समेत सभी अहम मुद्दों से जुड़े विषय एजेंडा में शामिल हैं. इसमें भारत की कोशिश अमेरिका से तकनीकी सहयोग हासिल करने और ढांचागत क्षेत्र में अधिक निवेश हासिल करने की है ताकि अर्थव्यवस्था को ताकत का नया टॉनिक दिया जा सके. साथ ही भारत को 5 खरब की अर्थव्यवस्था बनाने में भी मदद मिल सके.

अमेरिका ने भारत को अपना मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया है

भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में रक्षा सहयोग और सैन्य साझेदारी का बढ़ता ग्राफ भी अपने आप में आपसी भरोसे की निशानी है. अमेरिका ने भारत को अपना मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया है जो दर्जा किसी अन्य देश को नहीं दिया गया है. साथ ही पी-8 आई नैसैनिक निगरानी विमान से लेकर ट्रम्प की इस यात्रा में होने जा रहे 24 एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर सौदे तक उन्नत तकनीक से लैस हथियार भारत को देने का फैसला किया है. इस तरह संवेदनशील तकनीक वाले खरीद सौदे अमेरिका केवल कुछ चुनिंदा मुल्कों के साथ ही करता है. ऐसे में भारत की कोशिश डिफेंस ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव के तहत अमेरिका के साथ अत्यधुनिक सैन्य तकनीक में भागीदार बनने का प्रयास करेगा. ऐसे 8 अरब डॉलर से अधिक की रक्षा परियोजनाएं हैं जिनकी रफ्तार बढ़ाने में ट्रम्प का भारत दौरा मददगार साबित होगा. ट्रम्प के दौरे में अमेरिका से 6 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीद समझौते पर मुहर और गार्जियन प्रिडेटर जैसे उन्नत तकनीक ड्रोन हासिल करने की कवायद को भी रफ्तार मिलेगी.

भारत की नज़र अमेरिका से बेहतर प्रौद्योगिकी, अधिक निवेश और एक करीबी साझेदार की तरह भरोसा हासिल करने पर है. अंतरिक्ष भी एक अहम क्षेत्र है जहां भारत और अमेरिका सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में संकेत हैं कि 2022 में भारत की महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना के लिए में अमेरिकी सहयोग का नया समझौता सम्भव है. इसके अलावा एल और एस बैंड वाले ड्यूल फ्रीक्वेंसे सेटेलाइट की संयुक्त निर्माण परियोजना के लिए ही करारनामा सम्भव है.

कारोबारी रिश्तों में अमेरिका भले ही द्विपक्षीय व्यापार घाटे की दुहाई देता रहा है. साल 2016 के चुनावी अभियान और फिर राष्ट्रपति बनने के बाद कई बार भारत के साथ व्यापार घाटे और ऊंचे टैरिफ बैरियर को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं. मगर यदि भारत ट्रम्प को चुनावी मौसम में छोटे व्यापार समझौते के बाज़ाए एक व्यापक व्यापार समझौता करने और फिलहाल इसे छह महीने के लिए टालने पर राजी कर लेता है तो यह अहम कूटनीतिक क़ामयाबी होगी. ध्यान रहे कि अपने पिछले चुनावी अभियान में ट्रम्प ने जिस चीन, मेक्सिको और कनाडा पर सवाल उठाए थे उनमें से अधिकतर के साथ अमेरिका नया वाणिज्य समझौता कर चुका है.

कृषि-डेयरी उत्पाद क्षेत्र के दरवाजे अमेरिका के लिए पूरी तरह खोलना सम्भव नहीं

भारतीय खेमे के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक भारत की कोशिश एक ऐसे कारोबार समझौते की है जो दोनों मुल्कों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो. इस कड़ी में भारत जहां हार्ले डेविडसन जैसी मोटरबाइक पर आयात शुल्क कम करने को तैयार है जिसकी मांग ट्रम्प कई बार उठाते रहे हैं. मगर अपने कृषि या डेयरी उत्पाद क्षेत्र के दरवाजे अमेरिका के लिए पूरी तरह खोलना भारत के लिए सम्भव नहीं है.

भारत अपने स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार जैसे क्षेत्रों में भी अमेरिका से सहयोग की उम्मीद कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ होने वाली बातचीत के बाद, स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए समझौता सम्भव है. साथ ही भारतीय स्टार्टअप कम्पनियों को हैंडहोल्डिंग की सुविधा मुहैया कराने के भी दोनों पक्षों में सहमति बन गई है.

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