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दिल्ली: राशन के लिए छलका एक मां का दर्द, बिना राशनकार्ड वालों के लिए बने केंद्रों पर लगी लंबी कतारें

सुलेखा नाम की महिला कोंडली में किराए के घर में रहती हैं. उन्होंने कहा कि वो 15 दिनों से बिना राशनकार्ड वाले केंद्र पर आ रही हैं लेकिन दो बार टोकन मिलने के बाद भी राशन नहीं मिल पाया.

नई दिल्ली: दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर के चलते दिल्ली में लॉकडाउन लगाया गया जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया, काम धंधे बंद हो गए. ऐसे में दिल्ली सरकार ने दो महीने के लिए फ्री राशन की घोषणा की है, साथ ही बिना राशन कार्ड वालों को भी फ्री राशन देने को कहा है.

बिना राशनकार्ड वाले लोगों के लिए राशन वितरण केंद्र अलग से बनाये गए हैं जहां आधार कार्ड के ज़रिए राशन वितरण का काम किया जा रहा है. इन केंद्रों के बाहर राशन लेने वालों की भीड़ सुबह से ही जुटनी शुरू हो जाती है. कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें घन्टों इंतज़ार करने के बाद भी राशन नहीं मिल पाता. भीड़ और जल्दी लाइन में लगने की होड़ के चलते इन केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवा पाना भी चुनौती है. कई बार लोग नम्बर को लेकर आपस मे झगड़ने भी लगते हैं.

दिल्ली: राशन के लिए छलका एक मां का दर्द, बिना राशनकार्ड वालों के लिए बने केंद्रों पर लगी लंबी कतारें

एबीपी न्यूज़ की टीम ने बिना राशनकार्ड वाले लोगों के लिए बनाए गए राशन केंद्रों का जायज़ा लिया. दिल्ली के कोंडली इलाके में सरकारी स्कूल में बने राशन केंद्र के बाहर लोगों की लंबी कतार लगी हुई मिली और सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह से नदारद दिखा. ज़्यादातर लोगों ने बताया कि वो सुबह 4-5 बजे से लाइन में लगने आ जाते हैं. यहीं पर हमें सुलेखा मिलीं जो अपने ढाई साल के बेटे निशांत को गोद में लिए धूप में लाइन लगाकर खड़ी थीं. महामारी के समय में राशन के लिए चिलचिलाती गर्मी में भीड़ के बीच छोटे बच्चे के साथ घन्टों खड़े रहने की मजबूरी बताते हुए सुलेखा की आँखे छलक आईं.

कोंडली में किराए के घर पर रहने वाली सुलेखा का कहना है कि वो राशन के लिए 15 दिन से यहां आ रही हैं. 2 बार टोकन भी मिला लेकिन फिर भी राशन नहीं मिल पाया. उनका कहना है कि लाइन में लगते हैं लेकिन फिर लोग भगा देते हैं कि अगले दिन राशन मिलेगा. पति दिल्ली से बाहर रहते हैं, रिक्शा चलाते हैं. अभी पति का भी काम धंधा बन्द है. जब पैसे होते हैं तो बैंक से खाते में भेज दिया करते हैं. उससे काम चल जाता है. 15 दिन पहले आई थी तब 8 दिन बाद आने को कहा, 8 दिन बाद आई फिर नहीं मिला. अब 3 दिन से लगातार आ रही हूं नहीं मिला. सुबह 5 बजे से लाइन में खड़े हैं.

इतनी गर्मी में बच्चे को साथ लेकर आने की वजह बताते हुए सुलेखा की आंखों में आंसू छलक आए. उन्होंने बताया कि घर पर बच्चे को देखने वाला कोई नहीं है इसलिए उसे साथ लेकर आना पड़ता है. सुलेखा ने रोते हुए पूछा कि घर पर राशन खत्म है, अगर राशन नहीं मिला तो मेरा बच्चा कैसे रहेगा? कब तक अपने बच्चे को भूखे प्यासे लेकर खड़े रहेंगे. कल सुबह 5 बजे से आये थे शाम 4 बजे वापस गए लेकिन राशन नहीं मिला. परसों सुबह 10 बजे आये थे 3 बजे वापस गये तब भी नहीं मिला था. सुलेखा का कहना है कि राशन केंद्र वाले अपने जानकारों को स्टाफ बोलकर अंदर घुसा देते हैं.

इसी केंद्र पर 4 बच्चों के साथ राशन के इंतज़ार में खड़ी मंजू ने बताया कि सुबह साढ़े 7 बजे से राशन की लाइन में खड़े हैं. लाइन लंबी लग जाती है तो राशन नहीं मिल पाता. उनकी बहन राशन की लाइन में लगी हैं इसलिए वो अपने और बहन के बच्चों की देखरेख कर रही हैं. उन्होंने बताया कि वो और उनकी बहन पिछले हफ्ते शुक्रवार से लाइन में लग रहे थे तब जाकर उन्हें मंगलवार को राशन मिला पाया हालांकि उनकी बहन को तब भी नहीं मिला पाया था. बहन गर्भवती हैं इसलिये उस दिन ज़्यादा देर तक खड़ी नहीं हो पा रही थी. घर पर बच्चों को संभालने वाला कोई नहीं है. बच्चे परेशान तो होते ही हैं लेकिन राशन लेना है तो और कोई चारा नहीं है. कई बार लड़ाई भी हो जाती है.

कोंडली के इस केंद्र पर अपनी बेटी के साथ राशन लेने आये विजय श्रीवास्तव साप्ताहिक बाज़ार में प्लास्टिक के सामान की दुकान लगाते हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना के समय में सारा काम बंद हो गया करीब डेढ़ महीने से काम बंद है और आमदनी का कोई चारा नहीं है. उनका कहना है कि बिना बच्ची को लाये उसके आधार कार्ड पर राशन नहीं मिलेगा इसलिये बच्ची को लेकर आये हैं. उनका कहना है कि यूं भीड़ में बच्चे को लाना सुरक्षित नहीं है लेकिन मजबूरी है.

पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में भी सरकारी स्कूल में बने राशन वितरण केंद्र के बाहर भी लोगों की लंबी कतार नज़र आई. कुछ लोग लाइन में लगे हुए तो कुछ सड़क किनारे इंतज़ार करते नज़र आये. यहाँ राशन लेने आई पूजा का कहना है कि 5 दिन हो गए चक्कर काटते काटते आज जाकर टोकन मिला है. पति रिक्शा चलाते थे उस काम में अभी ज़्यादा कमाई है नहीं. मजदूरी भी नहीं है, और राशनकार्ड भी नहीं है. छोटे-छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर यहाँ कई घन्टों तक 5 दिन से खड़े हैं. राशन की ड्यूटी में लगे लोग कभी बोलते हैं कि गेहूं खत्म हो गया, कभी बोलते हैं चावल खत्म हो गया. राशन नहीं मिल पा रहा इसलिये उधार लेकर खाना खा रहे हैं.

त्रिलोकपुरी केंद्र पर ही लाइन में खड़े जयप्रकाश का कहना है कि टोकन लेने के लिए मैं सुबह साढ़े 3 -4 बजे तक पहुँच जाता हूँ. आज लगातार चौथा दिन है यहाँ आने का. आज जाकर कूपन मिल पाया है. रोज़ राशन केंद्र वाले कहते हैं कभी गेहूं नहीं है, कभी चावल नहीं है, इसलिये राशन नहीं देते.

गौरतलब है कि 5 जून से दिल्ली के 250 से ज़्यादा स्कूलों में बिना राशन कार्ड वालों को राशन देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके लिए कोई भी अपने आधार कार्ड या मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन कराकर राशन ले सकता है. हालांकि राशन लेने वाले लोगों की लंबी कतारें और केंद्रों के बाहर अव्यवस्था के चलते ज़रूरतमंद लोगों को काफी मुश्किलों का सामान भी करना पड़ रहा है.

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