दिल्ली: 600 करोड़ के हेल्थ स्कैम में एक्शन, ED ने मांगे खरीद के दस्तावेज
राजधानी दिल्ली में करीब 600 करोड़ रुपये के हेल्थ स्कैम की जांच अब तेज हो गई है. दिल्ली सरकार के पूर्व हेल्थ मिनिस्टर सौरभ भारद्वाज ने इस मामले से जुड़ी फाइल गायब होने का आरोप लगाया है.

राजधानी दिल्ली में करीब 600 करोड़ रुपये के हेल्थ स्कैम की जांच अब तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से मेडिकल सामान और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज मांगे हैं.
ED ने टेंडर प्रक्रिया, कंपनियों के चयन, सामान की सप्लाई, गुणवत्ता जांच और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड तलब किए हैं. जांच के दायरे में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म मशीन, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ORS, बेडशीट, सर्जिकल सामान, ग्लव्स और दवाइयों की खरीद शामिल है. इस मामले में अब तक 20 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो चुकी है. ED यह पता लगा रही है कि खरीद प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग हुई है या नहीं.
बता दें कि इससे पहले तत्कालीन DGHS डॉ. वत्सला अग्रवाल और उप नियंत्रक लेखा नीरज चोपड़ा के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो चुकी है. वहीं CPA के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. अब सभी की भूमिका की गहन जांच जारी है.
ईडी ने वित्तीय लेन-देन की पूरी डिटेल मांगी
जांच एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, ठेके देने के नियम, सामान की सप्लाई, जांच, मंजूरी और पेमेंट रिलीज से जुड़े तमाम रिकॉर्ड्स मांगें हैं. इसके अलावा ईडी ने उन कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, ओईएम (OEM) और डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े वित्तीय लेन-देन की पूरी डिटेल भी मांगा है, जिनसे ये तमाम मेडिकल सामान खरीदे गए थे.
सौरभ भारद्वाज ने फाइल गायब होने का लगाया आरोप
दिल्ली सरकार के पूर्व हेल्थ मिनिस्टर और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने इस मामले से जुड़ी फाइल गायब होने का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है. बता दें कि इस बड़े घोटाले की जांच पहले से ही एसीबी और विजिलेंस विभाग द्वारा की जा रही है. बता दें कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश के बाद अब 2 और डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की गई है.
ED इस बात की जांच कर रही है कि मेडिकल उपकरणों और सामानों की खरीद प्रक्रिया में अनियमितताएं, ओवर-इनवॉइसिंग, क्वालिटी से समझौता या मनी लॉन्ड्रिंग तो नहीं हुई है. ED का मानना है कि इस घोटाले में बड़ी राशि का गबन और अवैध तरीके से पैसा घुमाया गया हो सकता है.
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