नागपुर: गरीबों का फ्रिज कहे जाने वाले घड़े बनकर तैयार, लेकिन नहीं मिल रहा कोई खरीदार
लाॅकडाउन इसी तरह जारी रहा और थोड़ी भी राहत नहीं मिली तो पुरा साल बरबाद होने का डर इन कुम्हारो को सता रहा है. हालांकि 20 अप्रैल से कुछ चुनिंदा व्यवसाय और उद्योंगों को रियायत मिल सकती है.

नागपुर: लॉकडाउन के कारण नागपुर के कुम्हारों को आर्थिक संकट कि मार झेलनी पड़ रही है. जब से लॉकडाउन की घोषणा हुई है तब से इनके व्यवसाय पर ताला लग गया है. गरीबों का फ्रिज कहे जाने वाले घड़े बनके तो तैयार है लेकिन उन्हें कोई ग्राहक नहीं मिल रहा. मार्च और अप्रैल ये दो महीने ऐसे होते हैं जब कुम्हारों के व्यवसाय का मौसम होता है, लेकिन इस बार लॉकडाउन ने पूरा धंधा चौपट कर दिया है.
बंद के कारण यातायात पूरी तरीके से बंद है, ऐसे में जो व्यापारी कुम्हारों से घड़े खरीद कर बाजार मे बेचते हैं उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं, ऐसे में बड़ी मेहनत से बनाये हुए घड़ों का क्या किया जाये ये सवाल कुम्हारों को सता रहा है.

अलग अलग आकार के घड़े इन गांवो मे बनाये जाते हैं, आम तौर इसकी किमत 70 से 250 रुपये तक होती है. नागपुर के पास महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश कि सीमा पर जो गांव बसे हैं उनमें घड़े बनाने का काम होता है. यही से मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों और नागपुर विदर्भ के कई इलाकों मे घड़ों की बिक्री कि जाती है, नागपुर शहर घड़ों की बिक्री का बड़ा मार्केट है.
महाराष्ट्र में अक्षय तृतिया के अवसर पर हिंदू घरों में जो धार्मिक अनुष्ठान होता है उसमे नए घड़ों की पूजा का रिवाज है, बाद मे उन्हीं घड़ों का ठंडा पानी पीने के लिये इस्तेमाल किया जाता है. हर साल अक्षय तृतिया के मौके पर घड़ों की बड़ी मात्रा में बिक्री होती है, लेकीन लॉकडाउन के कारण इस बार की अक्षय तृतिया कुम्हारों के लिये आफत बन गई है.
पंजाबः तकनीकी खराबी के कारण खेत में हुई 'अपाचे' हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, दोनों पायलट सुरक्षित
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के कार्यक्रम में नहीं दिखी सोशल डिस्टेंसिंग, बीजेपी ने दी ये सलाह


















