करीब 2 लाख भारतीय नागरिकों की वतन वापसी का बना प्लान, विमानों और समंदर के रास्ते घर लौटने का बनेगा रास्ता
अगले कुछ दिनों में तीन चरणों में ईरान, इटली, ब्रिटेन और अमेरिका समेत क़ई देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को लौटने को इजाजत दी जा सकती है.

नई दिल्ली: लॉकडाउन की अवधि 3 मई के बाद जहां दो हफ्ते तक बढ़ाई गई है, वहीं विदेशों से करीब दो लाख लोगों को वापस की व्यापक योजना का क्रियान्वयन भी इस फैसले से कुछ धीमा हो सकता है. हालांकि इस बाबत तैयारियां हो गई हैं कि अगले कुछ दिनों के भीतर तीन चरणों में खाड़ी के मुल्कों और ईरान, इटली, ब्रिटेन अमेरिका समेत क़ई अन्य देशों में विभिन्न कारणों से फंसे भारतीय नागरिकों को लौटने की इजाजत दी जाए.
इस बीच भारतीय नौसेना और वायुसेना ने इस मिशन में अपना सहयोग देने की तैयारी जता दी है. सीडीएस जनरल बिपिन रावत की अगुवाई में हुई तीनों सेना प्रमुखों की साझा प्रेस कांफ्रेंस में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि विदेशों में भारत की बड़ी आबादी है. नौसेना के पोत तैनाती के लिए तैयार हैं. यह एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है. वहीं वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने कहा कि हमारे ट्रांसपोर्ट विमान स्टैंडबाय पर हैं और आदेश मिलते ही हम इस काम में जुट जाएंगे.
विदेशों में अटके भारतीय नागरिकों की होमकमिंग योजना के इस महा मिशन में 600 से अधिक विमान उड़ानों और नौसेना के युद्धपोत समेत कई साधनों का इस्तेमाल किया जाना है. विभिन्न मंत्रालयों के तालमेल से तैयार इस योजना के मुताबिक फिलहाल करीब दो लाख लोगों को लाने की योजना है. इसमें से करीब एक लाख लोग खाड़ी देशों से लाए जाने हैं. खड़ी देशों से भारतीयों की वापसी में नॉन शेड्यूल कमर्शियल उड़ानों के साथ साथ नौसैन के जहाजों का भी इस्तेमाल किया जाना है.
योजना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक विभिन्न मुल्कों में स्थित भारतीय दूतावासों से हासिल अनुमान के मुताबिक फिलहाल करीब दो लाख लोगों को वापसी में मदद की तैयारी की गई है. इनमें प्राथमिकता उन लोगों को दी जानी है जो बहुत अनिवार्य कारणों से लौटना चाहते हैं. जिनमें खड़ी मुल्कों से एमनेस्टी योजना पर छोड़े गए लोग, नौकरी छूटने के कारण लौटने वाले नागरिक, छात्र और ऐसे भारतीय शामिल हैं जो पर्यटन वीज़ा पर गए थे और लॉक डाउन के कारण लौट नहीं पाए.
इस घर वपसी प्लान का बहुत बड़ा हिस्सा खड़ी देशों में अंजाम दिया जाना हैं जहां भारतीय नागरिकों की खासी आबादी है. सूत्रों के अनुसार करीब 38 हज़ार लोग अकेले सँयुक्त अरब अमीरात से लौटने को तैयार हैं. इसके अलावा कुवैत, बहरीन जैसे देशों में भी 30 हज़ार से अधिक लोग लौटने को मजबूर हैं. लिहाज़ा इनमें से बहुत से लोगों को भारतीय नौसेना के बड़े जहाजों के जरिए लाया जा सकता है.
सूत्र बताते हैं कि जहां विमान की 660 उड़ानों की योजना है. वहीं समंदर के जरिए जहाजों के भी दस चक्कर लगाए जाने हैं. नौसैनिक पोत का औसत टर्न राउंड टाइम, जाने और आने का समय, करीब 4-5 दिन है. वापसी के इस प्लान में संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने लौटने वाले भारतीयों को कोविड19 नेगेटिव सर्टिफिकेट देने और इस काम में अपने क़ई विमान उपलब्ध कराने पर भी सहमति जताई है.
लौटने वाले भारतीय नागरिकों में बहुत से ऐसे लोग शामिल हैं जो नौकरी छूटने या आर्थिक मजबूरी क़ई स्थिति में लौट रहे हैं. ऐसे में विमानन कम्पनियों को प्रस्तावित उड़ानों के दौरान यात्री किराया लॉक डाउन अवधि के दौरान लागू न्यूनतम किराया रखने को कहा गया है.
करीब एक महीने के दौरान तीन चरणों में लागू होने वाली इस योजना में पहले खाड़ी क्षेत्र, फिर ईरान, इटली, यूके, मेलशिया, इंडोनेशिया, अमेरिका व तीसरे चरण में अन्य देशों से लोगों की वापसी की कवायद है. इसके अलावा विदेशों में फंसे भारतीय यदि किसी चार्टेड उड़ान से लौटना चाहते हैं तो उन्हें भी कोविड19 सर्टिफिकेट के आधार पर वपसी की इजाजत मिल सकती है. महत्वपूर्ण है कि जॉर्डन में एक भारतीय फ़िल्म क्रू के 150 से अधिक सदस्य फंसे हैं जो अपने साधन से लौटना चाहते हैं. ऐसे में उनकी वपसी का दरवाजा भी खुल सकता है.
कोरोना संकट के दौरान लागू पाबंदियों के मद्देनज़र विदेशों में अटके भारतीय नागरिकों की वापसी में इस बात का खास ख्याल रखा जाना है कि लोगों की आवाजाही को सीमित रखा जा सके.ऐसे में उन्हें अपने गंतव्य के सबसे करीबी हवाई अड्डे तक पहुँचाया जाना है. साथ लौटने वाले लोगों को अपने सम्बंधित राज्यों में 14 दिन के अनिवार्य क्वारन्टीन की अवधि भी पूरी करनी होगी.
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Source: IOCL

























