'उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का बयान न्यायपालिका पर अभूतपूर्व हमला', सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ‘गलत’ कहने पर भड़की कांग्रेस
Congress Target On Jagdeep Dhankhar: कांग्रेस नेताओं ने उपराष्ट्रपति धनखड़ के बयान कि 'संसद के अधिकारों में न्यायपालिका दखल नहीं दे सकती' को लेकर सवाल उठाए हैं. यहां पूरा मामला जानिए.

Politics News: जजों की नियुक्ति को लेकर दिए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Vice President Jagdeep Dhankhar) के बयान पर कांग्रेस (Congress) ने निशाना साधा है. कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ (उपराष्ट्रपति) का केशवानंद भारती (Kesavananda Bharati) मामले से जुड़े फैसले को ‘गलत’ कहना न्यायपालिका पर अभूतपूर्व हमला है. धनखड़ ने बुधवार, 11 जनवरी को केशवानंद भारती मामले पर बयान दिया था, जिस पर कांग्रेस ने आज सवाल उठाए हैं.
'धनखड़ का बयान न्यायपालिका पर एक अभूतपूर्व हमला'
कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘सांसद के रूप में 18 वर्षों में मैंने कभी भी किसी को नहीं सुना कि वह सुप्रीम कोर्ट के केशवानंद भारती मामले के फैसले की आलोचना करे. वास्तव में, अरुण जेटली जैसे बीजेपी के कई कानूनविदों ने इस फैसले की सराहना मील के पत्थर के तौर पर की थी. मगर अब राज्यसभा के सभापति कहते हैं कि यह फैसला गलत है. उनका ऐसा कहना हमारे देश की न्यायपालिका पर एक अभूतपूर्व हमला है.’’
जयराम रमेश ने कहा, ‘एक के बाद एक संवैधानिक संस्थानों पर हमला किया जाना अप्रत्याशित है. विचारों की भिन्नता एक अलग बात है, लेकिन उपराष्ट्रपति (जगदीप धनखड़) सुप्रीम कोर्ट के साथ टकराव को एक अलग ही स्तर पर ले गए हैं.’’
संविधान सर्वोच्च है- पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम
जगदीप धनखड़ पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के एक और नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, ‘‘राज्यसभा के सभापति जब यह कहते हैं कि संसद सर्वोच्च है तो वह गलत हैं. संविधान सर्वोच्च है. उस फैसले (केशवानंद भारती) को लेकर यह बुनियाद थी कि संविधान के आधारभूत सिद्धांतों पर बहुसंख्यकवाद आधारित हमले को रोका जा सके.’’ चिदंबरम ने कहा, ‘‘असल में सभापति के विचार सुनने के बाद हर संविधान प्रेमी नागरिक को आगे के खतरों को लेकर सजग हो जाना चाहिए.’’
'भारतीय पुस्तकों की तरफ लौटने की जरूरत है'
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने भी धनखड़ के बयान पर प्रतिक्रिया दी. पवन खेड़ा ने कहा कि राज्यसभा के सभापति को ब्रिटिश संसद नहीं, बल्कि भारतीय पुस्तकों की तरफ लौटने की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘‘भारत का संविधान सर्वोच्च है, विधायिका नहीं. संविधान हम सबसे बड़ा है. हमें इसी सिद्धांत का अनुसरण करने की जरूरत है.’’
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने यह बयान दिया था
बता दें कि उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि संसद के बनाए कानून को किसी और संस्था की ओर से अमान्य किया जाना प्रजातंत्र के लिए ठीक नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से 2015 में एनजेएसी अधिनियम को निरस्त किए जाने को लेकर उन्होंने यह भी कहा था कि ‘दुनिया में ऐसा कहीं नहीं हुआ है.’
धनखड़ कल यानी 11 जनवरी को राजस्थान विधानसभा में अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे. जहां संवैधानिक संस्थाओं के अपनी सीमाओं में रहकर संचालन करने की बात करते हुए ने उन्होंने कहा था, ‘‘संविधान में संशोधन का संसद का अधिकार क्या किसी और संस्था पर निर्भर कर सकता है?'' धनखड़ ने कहा था, ''क्या भारत के संविधान में कोई नया ‘थियेटर’ (संस्था) है जो कहेगा कि संसद ने जो कानून बनाया उस पर हमारी मुहर लगेगी तभी कानून होगा? 1973 में एक बहुत गलत परंपरा पड़ी, 1973 में केशवानंद भारती के मामले में उच्चतम न्यायालय ने मूलभूत ढांचे का विचार रखा.. कि संसद, संविधान में संशोधन कर सकती है लेकिन मूलभूत ढांचे में नहीं.’’
'संसद के कानून को अमान्य करना ठीक नहीं'
धनखड़ ने कहा था, ‘‘यदि संसद के बनाए गए कानून को किसी भी आधार पर कोई भी संस्था अमान्य करती है तो यह प्रजातंत्र के लिए ठीक नहीं होगा, बल्कि यह कहना मुश्किल होगा कि क्या हम लोकतांत्रिक देश हैं?’’
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